गांव के पास मुख्य सड़क पर चल रही एक छोटी-सी खाने की दुकान इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वजह है यहां मिलने वाली सिर्फ ₹100 की थाली, रोजाना आने वाले ग्राहक और टिफिन के लगातार मिल रहे ऑर्डर। दुकान से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद लोग इसके कारोबार और कमाई के तरीके को लेकर दिलचस्पी दिखा रहे हैं। कई लोगों ने कम कीमत में मिलने वाले खाने की मात्रा और वैरायटी की भी तारीफ की है।
आमतौर पर बड़े शहरों में रेस्टोरेंट, कैफे और फूड आउटलेट को ही ज्यादा कमाई वाला कारोबार माना जाता है। लेकिन इस दुकान की कहानी बताती है कि सही लोकेशन, कम कीमत, नियमित ग्राहक और नियंत्रित खर्च के दम पर छोटा फूड बिजनेस भी अच्छी बिक्री कर सकता है।
₹100 में मिलती है पूरी थाली
Never underestimate a small shop.
I visited a small food shop on a main road near a village and talked to the owner.
They sell a full thali for ₹100:
– 2 sabjis, roti, dal, rice, papad and salad
I asked: How many people come daily?
Owner:
– 25+ people eat here daily because… pic.twitter.com/ZBaSzwYTrh
— Nalini Unagar (@NalinisKitchen) August 14, 2026 सोशल मीडिया यूजर नलिनी उनागर ने इस दुकान से जुड़ी जानकारी X पर साझा की। पोस्ट के मुताबिक, यहां ₹100 में पूरी थाली मिलती है। इसमें दो सब्जियां, रोटी, दाल, चावल, पापड़ और सलाद शामिल हैं।
यानी ग्राहक को एक ही थाली में पूरा खाना मिल जाता है। यही वजह है कि आसपास रहने और काम करने वाले लोगों के लिए यह दुकान सस्ता और सुविधाजनक विकल्प बनती दिखाई देती है।
खास बात यह है कि दुकान किसी बड़े शहर के पॉश इलाके में नहीं, बल्कि गांव के पास मुख्य सड़क पर स्थित है। ऐसे में यहां की कम कीमत और आसान पहुंच दोनों ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद करती हैं।
रोज 25 से ज्यादा लोग खाते हैं खाना
नलिनी उनागर की पोस्ट के मुताबिक, दुकान के मालिक ने बताया कि रोजाना 25 से ज्यादा ग्राहक दुकान पर बैठकर खाना खाते हैं।
मुख्य सड़क पर दुकान होने का फायदा यह है कि स्थानीय ग्राहकों के साथ-साथ रास्ते से गुजरने वाले लोग भी यहां रुककर खाना खा सकते हैं। कम कीमत होने के कारण ऐसे ग्राहकों के लिए यह महंगे रेस्टोरेंट की तुलना में ज्यादा किफायती विकल्प बन सकता है।
40 से ज्यादा टिफिन ऑर्डर भी
दुकान की कमाई सिर्फ वहां बैठकर खाना खाने वाले ग्राहकों तक सीमित नहीं है। मालिक के अनुसार, रोजाना 40 से ज्यादा पक्के टिफिन ऑर्डर भी मिलते हैं।
अगर बैठकर खाना खाने वाले 25 से ज्यादा ग्राहकों और 40 से ज्यादा टिफिन ऑर्डर को मोटे तौर पर जोड़ें, तो रोजाना 65 से ज्यादा थाली बिकने का आंकड़ा सामने आता है।
यही इस छोटे कारोबार की सबसे बड़ी खासियत है। दुकान में एक ही रसोई से दो तरह की बिक्री हो रही है—एक, सीधे ग्राहकों को खाना खिलाकर और दूसरी, टिफिन के जरिए।
गांव में कौन मंगाता है टिफिन?
यह सवाल स्वाभाविक है कि गांव या उसके आसपास टिफिन की जरूरत किन लोगों को पड़ती है।
दुकान के मालिक के मुताबिक, उनके ग्राहकों में खेतों में काम करने वाले लोग और अकेले रहने वाले बुजुर्ग भी शामिल हैं। ऐसे लोगों के लिए रोज खाना बनाना मुश्किल या समय लेने वाला हो सकता है।
₹100 में तैयार खाना मिलने से उन्हें खाना खरीदने का एक आसान विकल्प मिल जाता है। दूसरी तरफ दुकान के लिए ऐसे नियमित ग्राहक कारोबार की स्थिर बिक्री का आधार बन सकते हैं।
₹100 की थाली से कितनी बिक्री?
अगर दुकान पर रोजाना 65 थाली ₹100 के हिसाब से बिकती हैं, तो केवल थाली की बिक्री से अनुमानित कारोबार इस तरह समझा जा सकता है:
- रोजाना बिक्री: 65 × ₹100 = ₹6,500
- 30 दिन की बिक्री: ₹6,500 × 30 = ₹1.95 लाख
- एक साल की बिक्री: ₹6,500 × 365 = ₹23.72 लाख
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि ये आंकड़े अनुमानित बिक्री हैं, मुनाफा नहीं। वास्तविक बिक्री इससे कम या ज्यादा हो सकती है और टिफिन के मूल्य या अतिरिक्त बिक्री को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
कम कर्मचारियों से घटता है खर्च
सोशल मीडिया पर साझा जानकारी के अनुसार, दुकान का खाना मालिक और उनकी पत्नी खुद तैयार करते हैं। अगर यह जानकारी सही है, तो कारोबार में कर्मचारियों की नियमित सैलरी का खर्च कम हो जाता है।
इसके अलावा बताया गया है कि मालिक की अपनी खेती भी है और वह वहां सब्जियां उगाते हैं। यदि दुकान में इस्तेमाल होने वाली कुछ सब्जियां अपनी खेती से आती हैं, तो बाजार से खरीदारी पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है।
यही छोटा-सा अंतर फूड बिजनेस की लागत और मार्जिन पर बड़ा असर डाल सकता है।
हर महीने ₹1 लाख से ज्यादा मुनाफे का दावा
सोशल मीडिया पोस्ट में दुकान के 60 फीसदी तक मुनाफे का दावा किया गया है। ₹1.95 लाख की अनुमानित मासिक बिक्री पर इस मार्जिन को लागू करने पर करीब ₹1.17 लाख का आंकड़ा निकलता है।
हालांकि, इस आंकड़े को शुद्ध मुनाफा नहीं माना जा सकता, क्योंकि उपलब्ध जानकारी में दुकान के सभी खर्चों का विस्तृत हिसाब मौजूद नहीं है।
मसलन, कच्चा माल, LPG, बिजली, पानी, पैकिंग, टिफिन डिलीवरी, किराया, खाद्य पदार्थों की बर्बादी और अन्य छोटे-बड़े खर्चों को घटाने के बाद ही वास्तविक लाभ का पता चलेगा।
60% मुनाफे के दावे पर क्यों उठे सवाल?
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसी वजह से 60 फीसदी मुनाफे के दावे पर सवाल उठाए। किसी भी फूड बिजनेस में बिक्री और मुनाफे के बीच बड़ा अंतर हो सकता है।
उदाहरण के लिए ₹1.95 लाख की बिक्री होने का मतलब यह नहीं है कि पूरा पैसा दुकानदार की कमाई है। इसमें से राशन, तेल, मसाले, गैस, बिजली, पैकिंग और अन्य परिचालन खर्च निकालने पड़ते हैं।
इसके अलावा अगर मालिक और उनकी पत्नी खुद काम कर रहे हैं, तो उनकी मेहनत की लागत भी बिजनेस के वास्तविक आर्थिक हिसाब में शामिल की जा सकती है।
इसलिए ₹1 लाख से ज्यादा मासिक मुनाफे का आंकड़ा सोशल मीडिया पर किए गए दावे के तौर पर देखना चाहिए, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में।
इस छोटे कारोबार की सफलता का क्या फॉर्मूला है?
इस दुकान के मॉडल को देखें तो इसकी संभावित सफलता के पीछे कुछ प्रमुख कारण दिखाई देते हैं:
1. कम कीमत: ₹100 की थाली ग्राहकों के बड़े वर्ग के लिए किफायती है।
2. पूरी थाली: दाल, चावल, रोटी, सब्जी, पापड़ और सलाद जैसी चीजें एक साथ मिलती हैं।
3. मुख्य सड़क की लोकेशन: स्थानीय लोगों के अलावा गुजरने वाले ग्राहक भी आसानी से पहुंच सकते हैं।
4. टिफिन मॉडल: बैठकर खाना खाने वालों के अलावा नियमित टिफिन ग्राहक भी हैं।
5. कम स्टाफ खर्च: मालिक और उनकी पत्नी खुद खाना तैयार करते हैं।
6. अपनी खेती: कुछ सब्जियों की जरूरत अपनी खेती से पूरी होने पर लागत कम हो सकती है।
इन सभी चीजों का संयोजन छोटे कारोबार को टिकाऊ बनाने में मदद कर सकता है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?
पोस्ट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। कुछ लोगों ने कहा कि छोटे कारोबार की क्षमता को कम नहीं आंकना चाहिए। उनके मुताबिक, कम कीमत और लगातार ग्राहकों का मॉडल कई स्थानीय कारोबारों को सफल बना सकता है।
कुछ लोगों ने ₹100 में मिलने वाली थाली की तारीफ करते हुए इसे ग्राहकों के लिए अच्छा सौदा बताया। वहीं कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि फूड बिजनेस में सिर्फ कीमत और बिक्री ही महत्वपूर्ण नहीं है। स्वच्छता, खाने की गुणवत्ता और स्वाद भी लंबे समय तक ग्राहक बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कम कीमत वाला बिजनेस क्यों हो सकता है सफल?
इस उदाहरण से एक बड़ी कारोबारी बात समझ आती है। हर सफल बिजनेस का मतलब महंगा प्रोडक्ट बेचना नहीं होता। कई बार कम कीमत पर ज्यादा ग्राहक बनाना भी प्रभावी बिजनेस मॉडल हो सकता है।
अगर किसी दुकान की प्रति ग्राहक कमाई कम है, लेकिन ग्राहक नियमित हैं और बिक्री लगातार होती है, तो कुल कारोबार अच्छा हो सकता है। खासकर तब, जब किराया, स्टाफ और कच्चे माल जैसे खर्चों को नियंत्रण में रखा जाए।
हालांकि, किसी भी बिजनेस को शुरू करने से पहले स्थानीय मांग, लागत, प्रतियोगिता और ग्राहक क्षमता का वास्तविक सर्वे करना जरूरी है।
निष्कर्ष
गांव के पास चल रही इस छोटी-सी दुकान की कहानी ने यह जरूर दिखाया है कि कारोबार की सफलता के लिए हमेशा बड़ा रेस्टोरेंट या महंगा खाना जरूरी नहीं है। ₹100 की थाली, रोजाना 25 से ज्यादा dine-in ग्राहक और 40 से ज्यादा टिफिन ऑर्डर का दावा एक ऐसा मॉडल दिखाता है, जिसमें कम कीमत और ज्यादा वॉल्यूम के जरिए बिक्री बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, ₹1 लाख से ज्यादा मासिक मुनाफे का दावा उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है। इसलिए इसे संभावित कमाई के उदाहरण के तौर पर देखना बेहतर होगा, निश्चित आय के तौर पर नहीं।
फिर भी, इस तरह के छोटे कारोबार यह जरूर बताते हैं कि सही लोकेशन, किफायती कीमत, नियमित ग्राहक और खर्चों पर नियंत्रण हो तो गांव और छोटे शहरों में भी फूड बिजनेस अच्छी क्षमता रखता है।


