PM Modi Red Fort Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई और आगे की चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि देश ने हथियारबंद नक्सलवाद को कमजोर करने में बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन अब भी एक वैचारिक चुनौती मौजूद है, जिसे उन्होंने “वैचारिक नक्सलवाद” और “दिमागी नक्सलवाद” बताया।
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने भारत को नक्सली हिंसा से मुक्त करने का जो संकल्प लिया था, उसे पूरा करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। उनके मुताबिक, कभी नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे इलाकों में अब विकास, भरोसे और नई उम्मीद का माहौल दिखाई दे रहा है।
हथियारबंद नक्सलवाद पर सरकार की बड़ी सफलता का दावा
प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के समय की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में नक्सलवाद देश के सामने एक गंभीर चुनौती था। नक्सली हिंसा के कारण कई क्षेत्रों में आम लोगों का जीवन प्रभावित हुआ था और विकास कार्यों में भी बाधाएं आती थीं।
पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया था। उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और सरकार के प्रयासों के कारण अब माओवादी विद्रोहियों के लिए उन इलाकों में टिके रहना मुश्किल हो गया है, जो कभी हथियारबंद नक्सली गतिविधियों के केंद्र माने जाते थे।
उन्होंने कहा कि जहां कभी नक्सलियों की गोलियां चलती थीं और हिंसा का माहौल था, उन्हीं इलाकों में अब विकास और भरोसे का वातावरण बन रहा है।
‘वैचारिक नक्सलवाद’ को लेकर PM मोदी की चेतावनी
अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने हथियारबंद नक्सलवाद के अलावा एक अलग चुनौती की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने इसे “वैचारिक नक्सलवाद” यानी “दिमागी नक्सलवाद” कहा।
पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि माओवादी सोच रखने वाले लोग लंबे समय तक देश के सत्ता तंत्र और नीति निर्माण से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में प्रभाव रखते रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग सरकारी समितियों में सलाहकार के रूप में भी मौजूद रहे और उनकी विचारधारा ने नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश की।
प्रधानमंत्री ने हथियार उठाने वाले माओवादी विद्रोहियों और माओवादी विचारधारा से प्रभावित लोगों के बीच अंतर का जिक्र करते हुए कहा कि जंगलों से हथियारबंद नक्सलियों को खत्म करने में सफलता मिली है, लेकिन वैचारिक नक्सलवाद अभी भी अवसर तलाश रहा है।
‘हिंसा और अराजकता का रास्ता बनाने की कोशिश’
पीएम मोदी ने कहा कि यह वैचारिक धारा हिंसा और अराजकता का रास्ता तैयार करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने देशवासियों से ऐसी विचारधारा के प्रति सतर्क रहने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “वैचारिक नक्सलियों” की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें अलग-थलग किया जाना चाहिए। उनके इस बयान ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की रणनीति में वैचारिक स्तर पर भी कार्रवाई और सामाजिक सतर्कता को लेकर नई बहस को जन्म दिया है।
नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास पर जोर
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में केवल सुरक्षा कार्रवाई का जिक्र नहीं किया, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि जिन क्षेत्रों में कभी हिंसा का डर था, वहां अब विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के जरिए लोगों का भरोसा बढ़ रहा है।
सरकार की रणनीति में सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे से जुड़े विकास कार्यों को भी अहम माना गया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिली है।
PM मोदी के बयान का क्या संदेश है?
लाल किले से प्रधानमंत्री का यह बयान संकेत देता है कि सरकार नक्सलवाद की चुनौती को केवल हथियारबंद विद्रोह तक सीमित नहीं मानती। सरकार की नजर अब उन वैचारिक और राजनीतिक प्रभावों पर भी है, जिन्हें प्रधानमंत्री ने “वैचारिक नक्सलवाद” और “दिमागी नक्सलवाद” के रूप में परिभाषित किया।
हालांकि, किसी व्यक्ति या संगठन को केवल विचारधारा के आधार पर “नक्सली” ठहराने का सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवेदनशील है। इसलिए प्रधानमंत्री के इस आह्वान के बाद सुरक्षा और राष्ट्रहित के साथ-साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा लोकतांत्रिक असहमति को लेकर भी बहस होना स्वाभाविक है।
फिलहाल, स्वतंत्रता दिवस के मंच से पीएम मोदी का यह बयान नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की नीति में एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है—हथियारबंद हिंसा के बाद अब वैचारिक स्तर पर भी नक्सली प्रभाव को चुनौती देने की बात कही गई है।


