Shiprocket IPO: शिपरॉकेट आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। तीन दिन की बोली प्रक्रिया खत्म होने के बाद इश्यू कुल 102.28 गुना सब्सक्राइब हुआ। QIB कैटेगरी में 125.20 गुना और NII कैटेगरी में 92.58 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। वहीं रिटेल निवेशकों ने भी 48.38 गुना बोली लगाई। अब निवेशकों की नजर शेयर अलॉटमेंट और संभावित लिस्टिंग गेन पर है।
ग्रे मार्केट में भी शिपरॉकेट के शेयरों को लेकर माहौल मजबूत बना हुआ है। मौजूदा GMP करीब 34 रुपये, यानी ऊपरी प्राइस बैंड के मुकाबले लगभग 35% प्रीमियम बताया जा रहा है। अगर यही ट्रेंड लिस्टिंग तक बना रहता है, तो शेयर करीब 131 रुपये के आसपास बाजार में एंट्री कर सकता है। हालांकि, GMP सिर्फ एक अनौपचारिक संकेत है और वास्तविक लिस्टिंग प्राइस इससे अलग हो सकता है।
शिपरॉकेट IPO को मिला 102 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन
शिपरॉकेट ने आईपीओ के जरिए करीब 1,617.59 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था। इसके लिए शेयर का प्राइस बैंड 92 से 97 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था।
तीन दिन की बोली के दौरान निवेशकों ने इश्यू में भारी दिलचस्पी दिखाई। करीब 9.44 करोड़ शेयरों के मुकाबले लगभग 938 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई गई। इस तरह कुल सब्सक्रिप्शन 102.28 गुना तक पहुंच गया।
कैटेगरी के हिसाब से देखें तो सबसे ज्यादा मांग QIB निवेशकों की तरफ से आई। QIB के लिए आरक्षित करीब 5.09 करोड़ शेयरों के मुकाबले 125.20 गुना बोली मिली।
NII कैटेगरी में करीब 2.60 करोड़ आरक्षित शेयरों के मुकाबले 92.58 गुना सब्सक्रिप्शन आया। वहीं रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित लगभग 1.73 करोड़ शेयरों के मुकाबले 48.38 गुना बोली लगाई गई।
यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी के आईपीओ को संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ आम निवेशकों से भी मजबूत प्रतिक्रिया मिली।
एंकर निवेशकों ने भी लगाया बड़ा दांव
आईपीओ खुलने से पहले ही कंपनी ने एंकर निवेशकों से करीब 727.41 करोड़ रुपये जुटा लिए थे। एंकर निवेशकों को 97 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर करीब 7.50 करोड़ इक्विटी शेयर आवंटित किए गए।
एंकर बुक में घरेलू म्यूचुअल फंड्स की भी मजबूत भागीदारी रही। करीब 66.76% शेयर, यानी लगभग 5 करोड़ शेयर, 13 घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने 31 अलग-अलग योजनाओं के जरिए खरीदे।
कंपनी को Temasek और Eternal जैसे बड़े निवेशकों का समर्थन भी हासिल है। ऐसे में एंकर निवेशकों की मजबूत भागीदारी को बाजार में कंपनी के प्रति संस्थागत भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
GMP 34 रुपये, 35% प्रीमियम का संकेत
Shiprocket IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम भी निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। मौजूदा समय में शेयर का GMP करीब 34 रुपये बताया जा रहा है।
अगर 97 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड में 34 रुपये का GMP जोड़ें, तो संभावित लिस्टिंग प्राइस करीब 131 रुपये बैठता है। इस हिसाब से IPO निवेशकों को लगभग 35% के संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत मिल रहा है।
हालांकि, निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि GMP आधिकारिक एक्सचेंज डेटा नहीं है। यह अनौपचारिक ग्रे मार्केट में चल रही धारणा को दर्शाता है। लिस्टिंग के दिन शेयर की वास्तविक कीमत बाजार की मांग, सेंटीमेंट और अन्य परिस्थितियों के आधार पर तय होगी।
17 अगस्त को अलॉटमेंट, 19 अगस्त को लिस्टिंग
Shiprocket IPO के शेयरों का अलॉटमेंट 17 अगस्त 2026 को फाइनल होने की उम्मीद है। जिन निवेशकों ने आईपीओ में आवेदन किया है, वे अलॉटमेंट स्टेटस रजिस्ट्रार KFin Technologies की वेबसाइट के जरिए चेक कर सकते हैं।
इसके बाद कंपनी के शेयर 19 अगस्त 2026 को NSE और BSE पर लिस्ट होने की संभावित तारीख है।
जिन निवेशकों को शेयर अलॉट नहीं होंगे, उनके लिए रिफंड प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि सफल आवेदकों के डीमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट किए जाएंगे।
IPO में फ्रेश इश्यू और OFS दोनों
शिपरॉकेट के आईपीओ में फ्रेश इश्यू के साथ-साथ ऑफर फॉर सेल यानी OFS भी शामिल है।
कंपनी ने करीब 9.13 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 885.60 करोड़ रुपये है। इसके अलावा करीब 7.55 करोड़ शेयरों का OFS रखा गया है, जिसकी कीमत लगभग 731.98 करोड़ रुपये है।
OFS के जरिए कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों को अपनी हिस्सेदारी बेचने का मौका मिला। इनमें LR India Fund I Sarl सबसे बड़े बिक्री करने वाले शेयरधारकों में शामिल है। इसके अलावा Arvind Limited, Shiprocket के सह-संस्थापक Gautam Kapoor और Sahil Goel तथा Tribe Capital III LLC-Series 1 जैसे शेयरधारक भी OFS में शामिल रहे।
OFS से मिलने वाली रकम सीधे कंपनी के कारोबार में नहीं जाती, बल्कि संबंधित शेयरधारकों को मिलती है। वहीं फ्रेश इश्यू से जुटाई गई रकम कंपनी के विस्तार और अन्य कारोबारी जरूरतों में इस्तेमाल की जाती है।
IPO से जुटाए पैसे का क्या करेगी कंपनी?
Shiprocket ने आईपीओ से मिलने वाली रकम के इस्तेमाल के लिए कई उद्देश्यों की पहचान की है।
कंपनी करीब 294 करोड़ रुपये मार्केटिंग और ब्रांड निर्माण पर खर्च करने की योजना बना रही है। इसके अलावा लगभग 211 करोड़ रुपये टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे।
कंपनी करीब 210 करोड़ रुपये कर्ज के भुगतान या समय से पहले भुगतान में लगाने की योजना बना रही है। इसमें संबंधित ब्याज भी शामिल है।
इसके अलावा शेष रकम संभावित अधिग्रहण, इनऑर्गेनिक ग्रोथ और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।
क्या करती है Shiprocket?
Shiprocket एक टेक्नोलॉजी आधारित ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म है। कंपनी का लक्ष्य कारोबारियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन कॉमर्स से जुड़ी अलग-अलग सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध कराना है।
कंपनी की सेवाओं में शिपिंग, चेकआउट, पेमेंट, फुलफिलमेंट, क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड और कस्टमर एक्सपीरियंस से जुड़े समाधान शामिल हैं।
शुरुआत में Shiprocket का फोकस मुख्य रूप से ई-कॉमर्स कारोबारियों के लिए शिपिंग और लॉजिस्टिक्स को आसान बनाने पर था। समय के साथ कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म का विस्तार करते हुए फुलफिलमेंट, हैवी लॉजिस्टिक्स, ओमनीचैनल कॉमर्स, इंटरनेशनल शिपिंग, कस्टम्स सपोर्ट, एडवरटाइजिंग, पेमेंट, बिजनेस फाइनेंसिंग और हाइपरलोकल डिलीवरी जैसी सेवाओं को भी जोड़ा है।
1.45 लाख से ज्यादा एक्टिव मर्चेंट्स
30 सितंबर 2025 को खत्म हुई छह महीने की अवधि के दौरान Shiprocket के प्लेटफॉर्म पर 1.45 लाख से ज्यादा एक्टिव मर्चेंट्स मौजूद थे।
इस अवधि में इन मर्चेंट्स ने प्लेटफॉर्म के जरिए 9.7 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन किए और कंपनी का नेटवर्क 4.2 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचा।
कंपनी का रिपीट कस्टमर रेट करीब 64.56% रहा। यह आंकड़ा बताता है कि प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों का एक बड़ा हिस्सा दोबारा कंपनी की सेवाओं का इस्तेमाल करता है।
Shiprocket के नेटवर्क में छोटे कारोबारियों के साथ बड़े कारोबारी भी शामिल हैं। कंपनी के पास 8,500 से ज्यादा हाई-वॉल्यूम पावर मर्चेंट्स भी हैं।
102 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद अब लिस्टिंग पर नजर
Shiprocket IPO की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूत निवेशक मांग रही। 102.28 गुना कुल सब्सक्रिप्शन, 125.20 गुना QIB बोली और करीब 35% GMP ने आईपीओ को बाजार में काफी चर्चा में ला दिया है।
अब निवेशकों की नजर 17 अगस्त को अलॉटमेंट और 19 अगस्त को संभावित लिस्टिंग पर है। मौजूदा GMP के आधार पर करीब 131 रुपये की संभावित लिस्टिंग का अनुमान लगाया जा रहा है, लेकिन यह सिर्फ ग्रे मार्केट संकेत है।
इसलिए निवेशकों को केवल GMP देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। लिस्टिंग के बाद कंपनी का वैल्यूएशन, कारोबार की ग्रोथ, मुनाफे की स्थिति और ई-कॉमर्स एवं लॉजिस्टिक्स सेक्टर में प्रतिस्पर्धा जैसे फैक्टर्स भी अहम रहेंगे।
अस्वीकरण: IPO में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल अनौपचारिक संकेत है और इससे लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं होती। निवेश का निर्णय लेने से पहले कंपनी के ऑफिशियल दस्तावेज और वित्तीय स्थिति का अध्ययन करें। विशेषज्ञों द्वारा दी गई सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं। ये NewsJagran के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।


