Apollo Hospitals Share Price: जून तिमाही में Apollo Hospitals का कंसॉलिडेटेड टैक्स बाद मुनाफा सालाना आधार पर 34% बढ़कर 581 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के हॉस्पिटल बिजनेस समेत लगभग सभी प्रमुख सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ देखने को मिली है। हालांकि, शेयर की वैल्यूएशन महंगी होने और हॉस्पिटल बेड टैरिफ पर संभावित सरकारी हस्तक्षेप को लेकर चिंता बनी हुई है।
जून तिमाही में शानदार रहा प्रदर्शन
Apollo Hospitals ने जून तिमाही में मजबूत वित्तीय नतीजे पेश किए। कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 21% बढ़कर 7,044 करोड़ रुपये हो गया। वहीं EBITDA 28% बढ़कर 1,092 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी का EBITDA मार्जिन भी सुधरकर 15.5% हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 14.6% था। इससे संकेत मिलता है कि रेवेन्यू ग्रोथ के साथ कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी में भी सुधार हुआ है।
मुनाफा 34% बढ़कर 581 करोड़ रुपये
जून तिमाही में Apollo Hospitals का कंसॉलिडेटेड टैक्स बाद मुनाफा यानी PAT सालाना आधार पर 34% बढ़कर 581 करोड़ रुपये पहुंच गया।
कंपनी के लगभग सभी प्रमुख बिजनेस में डबल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की गई। इनमें हेल्थकेयर सर्विसेज, Apollo HealthCo और AHLL प्रमुख रहे। अलग-अलग बिजनेस में ग्रोथ कंपनी के समग्र प्रदर्शन को मजबूत बनाने में मदद कर रही है।
हॉस्पिटल बिजनेस की रेवेन्यू ग्रोथ 22%
कंपनी के हॉस्पिटल बिजनेस का रेवेन्यू जून तिमाही में सालाना आधार पर 22% बढ़कर 3,567 करोड़ रुपये हो गया।
इस ग्रोथ में वॉल्यूम का योगदान करीब 11%, प्राइसिंग का 4% और केस व पेयर मिक्स का लगभग 3% रहा। इस दौरान इनपेशेंट वॉल्यूम में 13% की बढ़ोतरी हुई, जबकि हॉस्पिटल ऑक्युपेंसी 70% रही।
वहीं, प्रति मरीज औसत रेवेन्यू यानी ARPP में सालाना आधार पर 8% का इजाफा हुआ। इससे कंपनी के हॉस्पिटल बिजनेस में बेहतर केस मिक्स और प्राइसिंग पावर का संकेत मिलता है।
FY27 में 20% रेवेन्यू ग्रोथ का भरोसा
कंपनी के मैनेजमेंट को FY27 में हॉस्पिटल बिजनेस की रेवेन्यू ग्रोथ करीब 20% रहने की उम्मीद है। क्षमता बढ़ाने के लिए Apollo Hospitals लगातार नए हॉस्पिटल और बेड जोड़ रही है।
बेंगलुरु में 180 बेड वाले हॉस्पिटल में सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। वहीं, गुरुग्राम हॉस्पिटल के इस वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में ऑपरेशनल होने की उम्मीद है।
कंपनी ने FY31 तक अपने कुल बेड की संख्या बढ़ाकर 14,100 करने का लक्ष्य रखा है। अगर यह विस्तार योजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में कंपनी की रेवेन्यू क्षमता को फायदा मिल सकता है।
बेड टैरिफ पर सरकारी हस्तक्षेप चिंता का विषय
Apollo Hospitals के लिए आगे की ग्रोथ का आउटलुक मजबूत नजर आ रहा है। बेहतर ऑक्युपेंसी, बढ़ती क्लिनिकल जटिलता, नई क्षमता और डिजिटल बिजनेस से मुनाफे में सुधार कंपनी के लिए सकारात्मक फैक्टर हैं।
हालांकि, हॉस्पिटल सेक्टर के लिए एक जोखिम भी सामने आया है। हाल में संसदीय समिति ने हॉस्पिटल्स में बेड के टैरिफ की सीमा तय करने की सलाह दी है। अगर भविष्य में इस तरह का नियामकीय कदम लागू होता है, तो हॉस्पिटल कंपनियों की प्राइसिंग पावर और रेवेन्यू ग्रोथ पर दबाव पड़ सकता है।
शेयर में इस साल 25% की तेजी
Apollo Hospitals का शेयर इस साल अब तक करीब 25% चढ़ चुका है। 14 अगस्त को शेयर 3.71% की तेजी के साथ 8,919 रुपये पर बंद हुआ।
हालांकि, मजबूत प्रदर्शन के बावजूद शेयर की वैल्यूएशन काफी ऊंची है। शेयर FY28 के अनुमानित EV/EBITDA के करीब 24 गुना पर कारोबार कर रहा है। यही वजह है कि ब्रोकरेज के नजरिए में भी सावधानी बढ़ी है और रेटिंग को Overweight से Equal-Weight किया गया है।
Apollo Hospitals Share: खरीदें, बेचें या होल्ड करें?
Apollo Hospitals के फंडामेंटल मजबूत हैं। जून तिमाही में रेवेन्यू, EBITDA और मुनाफे में अच्छी ग्रोथ, हॉस्पिटल क्षमता का विस्तार और डिजिटल बिजनेस में सुधार कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
लेकिन दूसरी तरफ शेयर की मौजूदा वैल्यूएशन काफी ऊंची है और इस साल की तेजी के बाद इसमें मुनाफावसूली की गुंजाइश भी बनती है। इसके अलावा, हॉस्पिटल टैरिफ से जुड़े संभावित नियामकीय बदलाव एक अतिरिक्त जोखिम हैं।
इसलिए मौजूदा स्तर पर नए निवेशकों के लिए आक्रामक खरीदारी के बजाय इंतजार करना बेहतर हो सकता है। वहीं, जिन निवेशकों के पास पहले से शेयर हैं, वे मुनाफे का कुछ हिस्सा बुक करके बाकी हिस्से को लंबी अवधि के लिए होल्ड करने पर विचार कर सकते हैं।
नोट: यह लेख निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय नतीजों, वैल्यूएशन और अपने जोखिम प्रोफाइल का आकलन जरूर करें।


