8th Pay Commission Pensioners Demands: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सामने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़ी कई अहम मांगें रखी गई हैं। पेंशनर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने आयोग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में न्यूनतम पेंशन बढ़ाने, महंगाई राहत (DR) को हर तीन महीने में संशोधित करने और पुराने-नए पेंशनर्स के बीच समानता सुनिश्चित करने जैसे कई प्रस्ताव दिए हैं। संगठन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में महंगाई बढ़ने के साथ पेंशनर्स की आर्थिक जरूरतों के अनुरूप बदलाव जरूरी है।
भारत पेंशनर्स समाज के मुताबिक, संगठन करीब 10 लाख पेंशनर्स का प्रतिनिधित्व करता है। 7 अगस्त 2026 को 8वें वेतन आयोग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में पेंशन और कर्मचारियों के वेतन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। इनमें न्यूनतम पेंशन को ₹45,000 करने से लेकर फिटमेंट फैक्टर 3.83 लागू करने तक की मांग शामिल है।
न्यूनतम पेंशन ₹45,000 करने का प्रस्ताव
पेंशनर्स संगठन ने 8वें वेतन आयोग के सामने सबसे प्रमुख मांग न्यूनतम बेसिक पेंशन को लेकर रखी है। BPS ने न्यूनतम पेंशन ₹45,000 प्रति माह करने का प्रस्ताव दिया है।
फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक पेंशन ₹9,000 प्रति माह बताई जाती है। पेंशनर्स संगठन का मानना है कि पिछले वर्षों में महंगाई और रोजमर्रा के खर्च में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए न्यूनतम पेंशन में पर्याप्त वृद्धि की जरूरत है।
संगठन ने सिर्फ पेंशनर्स के लिए ही नहीं, बल्कि मौजूदा कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन को लेकर भी प्रस्ताव रखा है। इसके तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69,000 करने की मांग की गई है।
इसके अलावा BPS ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करने का सुझाव दिया है। फिटमेंट फैक्टर वह गुणक है जिसका इस्तेमाल नए वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत मौजूदा बेसिक पे को संशोधित करने में किया जाता है।
हर 3 महीने में बढ़े महंगाई राहत यानी DR
पेंशनर्स की दूसरी बड़ी मांग महंगाई राहत यानी Dearness Relief (DR) को लेकर है। वर्तमान व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों के DA और पेंशनर्स के DR में आमतौर पर साल में दो बार, जनवरी और जुलाई में संशोधन किया जाता है।
भारत पेंशनर्स समाज ने इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। संगठन चाहता है कि DR को हर 6 महीने के बजाय हर 3 महीने में संशोधित किया जाए।
इसका उद्देश्य महंगाई में होने वाले बदलाव का असर पेंशनर्स की आय पर जल्दी पहुंचाना है। अगर महंगाई लगातार बढ़ती है तो मौजूदा छह महीने के अंतराल में पेंशनर्स को वास्तविक खर्च बढ़ने के बावजूद संशोधित राहत के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
BPS ने यह भी सुझाव दिया है कि जब महंगाई राहत 25 फीसदी से अधिक हो जाए, तो उसे बेसिक पेंशन में मर्ज करने की व्यवस्था होनी चाहिए। संगठन के अनुसार, इससे पेंशनर्स को बढ़ती महंगाई के बीच अपनी नियमित आय को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
आखिरी सैलरी के 67% तक पेंशन देने की मांग
पेंशनर्स संगठन ने रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन की गणना को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। BPS की मांग है कि कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली पेंशन आखिरी वेतन के 67% तक निर्धारित की जाए।
वहीं, फैमिली पेंशन को अंतिम वेतन के 50% तक रखने का प्रस्ताव दिया गया है। इस मांग का उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद पेंशनर्स और उनके परिवारों की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करना है।
संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि वेतन और पेंशन की समीक्षा के लिए लंबा इंतजार नहीं होना चाहिए। इसके लिए हर 5 साल में वेतन और पेंशन की समीक्षा करने की व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
पुराने और नए पेंशनर्स के बीच समानता की मांग
8वें वेतन आयोग के सामने पेंशनर्स संगठन ने पुराने और नए पेंशनर्स के बीच समानता का मुद्दा भी उठाया है।
BPS ने मांग की है कि 1 जनवरी 2026 से पहले और उसके बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों की पेंशन में केवल रिटायरमेंट की तारीख के आधार पर अंतर नहीं होना चाहिए। संगठन के मुताबिक, अगर कर्मचारी समान पद और समान सेवा से रिटायर हुआ है तो उसे समान वित्तीय लाभ मिलना चाहिए।
यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नए वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के समय अलग-अलग तारीख पर रिटायर होने वाले कर्मचारियों के पेंशन लाभ को लेकर अंतर पैदा हो सकता है। पेंशनर्स संगठन चाहता है कि ऐसी स्थिति में समान पद से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार किया जाए।
8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट कब तक आएगी?
केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया था। आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।
आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने और सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस समयसीमा के आधार पर आयोग की अंतिम रिपोर्ट मई या जून 2027 के आसपास आने की संभावना है।
आयोग की प्रक्रिया में कर्मचारियों, पेंशनर्स और विभिन्न संगठनों से सुझाव लिए जा रहे हैं। दिल्ली में बैठकों के बाद आयोग द्वारा चेन्नई, पुडुचेरी, चंडीगढ़ और जयपुर में भी कर्मचारियों और पेंशनर्स संगठनों के साथ परामर्श किए जाने की बात सामने आई है।
क्या तुरंत बढ़ जाएगी पेंशन?
यह समझना जरूरी है कि BPS की ओर से रखी गई ये मांगें फिलहाल प्रस्ताव और सुझाव हैं। ₹45,000 न्यूनतम पेंशन, 3.83 फिटमेंट फैक्टर, हर तीन महीने में DR संशोधन या अंतिम वेतन के 67% तक पेंशन जैसी मांगों को लागू करने का फैसला अभी सरकार और 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों पर निर्भर करेगा।
आयोग विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों, वित्तीय प्रभाव और सरकार की नीतियों का अध्ययन करने के बाद अपनी सिफारिशें देगा। इसके बाद सरकार इन सिफारिशों को स्वीकार करने, उनमें बदलाव करने या किसी अन्य तरीके से लागू करने पर फैसला कर सकती है।
इसलिए पेंशनर्स के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ₹45,000 न्यूनतम पेंशन अभी घोषित नई पेंशन नहीं है, बल्कि पेंशनर्स संगठन की ओर से 8वें वेतन आयोग के सामने रखी गई मांग है।
पेंशनर्स की प्रमुख मांगें एक नजर में
- न्यूनतम बेसिक पेंशन: ₹45,000 प्रति माह
- न्यूनतम बेसिक सैलरी: ₹69,000
- फिटमेंट फैक्टर: 3.83
- DR संशोधन: हर 3 महीने में
- 25% से अधिक DR को बेसिक पेंशन में मर्ज करने का प्रस्ताव
- अंतिम वेतन के 67% तक पेंशन
- अंतिम वेतन के 50% तक फैमिली पेंशन
- हर 5 साल में वेतन और पेंशन की समीक्षा
- समान पद से रिटायर होने वाले पुराने और नए पेंशनर्स के लिए समान वित्तीय लाभ
कुल मिलाकर, 8वें वेतन आयोग से पेंशनर्स को काफी उम्मीदें हैं। भारत पेंशनर्स समाज की ओर से रखे गए प्रस्तावों में न्यूनतम पेंशन बढ़ाने के साथ-साथ महंगाई के असर को तेजी से कम करने और अलग-अलग समय पर रिटायर हुए कर्मचारियों के बीच समानता स्थापित करने पर जोर दिया गया है। हालांकि, इन मांगों पर अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद केंद्र सरकार के निर्णय से ही होगा।


