Mumbai Ghatkopar Landslide: मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच बुधवार तड़के बड़ा हादसा हो गया। कुर्ला के चिराग नगर स्थित गौसिया चॉल के पास पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक ढह गया और उसका मलबा चॉल के दो से तीन कमरों पर जा गिरा। हादसे में अब तक 2 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
सुबह करीब 3:48 बजे हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, यह भूस्खलन बुधवार सुबह करीब 3:48 बजे कुर्ला के चिराग नगर इलाके में राठौड़ मेडिकल के पास स्थित गौसिया चॉल में हुआ। भारी बारिश के कारण पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक नीचे खिसक गया। इसके बाद बड़ी मात्रा में मिट्टी और पत्थरों का मलबा चॉल के पास बने कमरों पर जा गिरा।
अचानक हुए इस हादसे से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। इसके बाद मुंबई फायर ब्रिगेड, मुंबई पुलिस, BMC और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की।
दो लोगों की मौत, कई के दबे होने की आशंका
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से दो लोगों को बाहर निकाला गया। दोनों को राजावाड़ी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतकों की पहचान 28 वर्षीय साहिल अंसारी और 14 वर्षीय मोहम्मद समीर के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जानकारी में कुछ लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई थी। बाद में स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब 6 से 8 लोग मलबे के नीचे हो सकते हैं। हालांकि, बचाव अभियान पूरा होने तक फंसे लोगों की सही संख्या की पुष्टि नहीं की जा सकती।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि शुरुआती कुछ रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई है, लेकिन उपलब्ध अधिकारियों की जानकारी और प्रमुख रिपोर्टों के अनुसार फिलहाल 2 मौतों की पुष्टि हुई है। इसलिए 5 मौतों की संख्या को अभी पुष्ट आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
दो लोग घायल, अस्पताल में भर्ती
भूस्खलन की इस घटना में दो अन्य लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
घायलों में 18 वर्षीय सोहेल अंसारी को सिर में चोट लगी है, जबकि 14 वर्षीय मोहम्मद अंसारी की पीठ में चोट बताई गई है। डॉक्टरों की निगरानी में दोनों का इलाज चल रहा है।
फायर ब्रिगेड ने घोषित किया लेवल-2 इमरजेंसी
मुंबई फायर ब्रिगेड को घटना की सूचना मिलने के बाद करीब 4:32 बजे इसे लेवल-2 इमरजेंसी घोषित किया गया। इसके बाद अतिरिक्त राहत एवं बचाव संसाधनों को घटनास्थल पर भेजा गया।
मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए बचाव दल बेहद सावधानी से काम कर रहा है। भारी मलबे को हटाने के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के दौरान किसी और व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।
NDRF और BMC की टीमें मौके पर
हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान में कई एजेंसियां शामिल हैं। मुंबई फायर ब्रिगेड और पुलिस के साथ राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें भी मौके पर काम कर रही हैं। BMC के कर्मचारी और स्थानीय आपातकालीन कर्मी भी अभियान में सहयोग कर रहे हैं।
बचावकर्मी मलबे को चरणबद्ध तरीके से हटा रहे हैं। ऐसी घटनाओं में बड़े पत्थरों और मिट्टी के नीचे लोगों के दबे होने की संभावना को देखते हुए मशीनों के इस्तेमाल के साथ-साथ मैनुअल सर्च भी किया जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरे क्षेत्र की तलाशी नहीं हो जाती, तब तक मलबे के नीचे फंसे लोगों की संख्या के बारे में अंतिम जानकारी देना संभव नहीं होगा।
DCP ने क्या बताया?
DCP गणेश शिंदे ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि भारी बारिश के कारण घाटकोपर पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आने वाले अशोकनगर इलाके में भूस्खलन हुआ। उन्होंने बताया कि अब तक दो शव बरामद किए जा चुके हैं और बचाव अभियान जारी है।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मलबे के नीचे कुल कितने लोग फंसे हुए हैं। हालांकि, आशंका है कि कुछ लोग अभी भी मलबे में दबे हो सकते हैं।
पुलिस और बचाव एजेंसियां स्थानीय लोगों से भी जानकारी जुटा रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हादसे के समय चॉल के कमरों में कितने लोग मौजूद थे।
बारिश बनी हादसे की बड़ी वजह
मुंबई और आसपास के इलाकों में भारी बारिश के बीच यह हादसा हुआ है। लगातार बारिश होने पर पहाड़ी ढलानों की मिट्टी में पानी की मात्रा बढ़ जाती है। इससे मिट्टी कमजोर होकर खिसक सकती है और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है।
मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में पहाड़ी इलाकों के आसपास बनी बस्तियों के लिए मानसून के दौरान यह जोखिम और गंभीर हो जाता है। BMC के आपदा प्रबंधन दस्तावेजों में भी मुंबई में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन के खतरे वाले इलाकों का उल्लेख किया गया है।
BMC अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया
हादसे के बाद BMC के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा किया और राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद टीमों से मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली।
स्थानीय प्रशासन का पूरा ध्यान फिलहाल बचाव अभियान पर है। मलबे में किसी व्यक्ति के जीवित होने की संभावना को देखते हुए रेस्क्यू टीम सावधानी से तलाशी अभियान चला रही है।
मुंबई में लैंडस्लाइड का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
मुंबई में मानसून के दौरान तेज बारिश के कारण पहाड़ी और ढलान वाले इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। कई जगहों पर घनी आबादी पहाड़ी ढलानों के आसपास बसी हुई है। ऐसे क्षेत्रों में लगातार बारिश से जमीन की ऊपरी परत कमजोर हो सकती है।
मुंबई की आपदा प्रबंधन योजना में भी बताया गया है कि भारी बारिश और तेज हवाओं के दौरान भूस्खलन की घटनाएं हो सकती हैं और इससे जान-माल को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
इस वजह से मानसून के दौरान ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की चेतावनियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। यदि किसी इलाके में जमीन खिसकने, दीवारों में नई दरारें आने या पहाड़ी से मिट्टी-पत्थर गिरने जैसे संकेत दिखाई दें, तो स्थानीय प्रशासन को तुरंत सूचना देना जरूरी है।
बचाव अभियान अभी जारी
फिलहाल घटनास्थल पर NDRF, फायर ब्रिगेड, पुलिस और BMC की टीमें मौजूद हैं। मलबा हटाकर संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। प्रशासन की ओर से मृतकों की संख्या को लेकर अभी 2 मौतों की पुष्टि है, जबकि कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका बनी हुई है।
नोट: शुरुआती सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 5 बताई गई है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक/प्रमुख मीडिया रिपोर्टों में फिलहाल दो मौतों की पुष्टि है। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही अंतिम आंकड़ा स्पष्ट होगा।


