Gold Silver Price: ग्लोबल बुलियन मार्केट में सोमवार को सोने की कीमतों में मामूली गिरावट देखने को मिली, जबकि चांदी की कीमतों में तेजी बनी रही। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों, डॉलर की चाल और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर है। इन सभी फैक्टर्स का असर आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।
कॉमेक्स पर सोना करीब $4,383 प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया। यह पिछले बंद भाव $4,400 प्रति औंस की तुलना में करीब $16.70 यानी 0.38% की गिरावट है। कारोबार के दौरान सोने ने $4,411.50 प्रति औंस का ऊपरी स्तर और $4,373.90 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।
वहीं, चांदी में मजबूती देखने को मिली। COMEX पर सिल्वर करीब 0.23% बढ़कर $63.645 प्रति औंस पर पहुंच गई। सत्र के दौरान चांदी ने $63.195 से लेकर $64.240 प्रति औंस तक का स्तर देखा।
पिछले हफ्ते सोने-चांदी ने दिया शानदार रिटर्न
बुलियन मार्केट के लिए पिछला सप्ताह काफी मजबूत रहा। उपलब्ध मार्केट डेटा के मुताबिक, इंटरनेशनल गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 7% की तेजी दर्ज की गई और कीमत लगभग $4,399.70 प्रति औंस तक पहुंच गई।
इसी अवधि में सिल्वर फ्यूचर्स ने इससे भी बेहतर प्रदर्शन किया। चांदी में करीब 10% की तेजी आई और यह लगभग $63.50 प्रति औंस तक पहुंच गई।
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से जुड़ी ब्याज दरों की उम्मीदों में बदलाव रहा। कमजोर अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट ने बाजार में यह उम्मीद बढ़ाई कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख अपना सकता है।
कमजोर अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट से सोने को मिला सपोर्ट
सोने की कीमतों पर अमेरिकी ब्याज दरों का सीधा असर पड़ता है। इसकी वजह यह है कि सोना कोई ब्याज नहीं देता। ऐसे में जब बाजार में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ती है, तो बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाली संपत्तियों की तुलना में सोना निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकता है।
अमेरिकी रोजगार बाजार के कमजोर आंकड़ों ने तत्काल ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को कमजोर किया है। इससे बुलियन मार्केट को सपोर्ट मिला और पिछले सप्ताह सोने-चांदी में मजबूत तेजी देखने को मिली।
अब बाजार की नजर अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर है। आने वाले दिनों में जारी होने वाला US Consumer Price Inflation यानी CPI डेटा फेड की अगली नीति को लेकर निवेशकों की उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है।
अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद कमजोर हो सकती है। ऐसी स्थिति सोने की कीमतों के लिए दबाव पैदा कर सकती है। दूसरी तरफ, कमजोर महंगाई आंकड़े ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद को मजबूत कर सकते हैं, जिससे सोने और चांदी को सहारा मिल सकता है।
डॉलर की चाल भी रहेगी बेहद अहम
अमेरिकी डॉलर बुलियन मार्केट के लिए एक और महत्वपूर्ण फैक्टर है। आम तौर पर डॉलर कमजोर होने पर डॉलर में कीमत तय होने वाला सोना दूसरी करेंसी रखने वाले निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की मांग बढ़ सकती है।
इसके उलट डॉलर में मजबूती आने पर सोने पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसलिए इस सप्ताह अमेरिकी डॉलर इंडेक्स की चाल पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
पश्चिम एशिया का तनाव बढ़ा सकता है उतार-चढ़ाव
बुलियन की कीमतों के लिए सिर्फ अमेरिकी आर्थिक आंकड़े ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा क्षेत्रीय घटनाक्रमों में किसी तरह की तेजी से निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ सकती है। ऐसे समय में सोने को पारंपरिक तौर पर सेफ-हेवन एसेट माना जाता है और इसमें निवेश की मांग बढ़ सकती है।
इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपिंग को लेकर अनिश्चितता का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ रहा है। अगर ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इसका अप्रत्यक्ष असर फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदों और अंततः सोने की कीमतों पर पड़ सकता है।
एक्सपर्ट्स को सोने-चांदी में तेजी की उम्मीद
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने और चांदी में तेजी का रुख बना रह सकता है। हालांकि, मौजूदा स्तरों पर दोनों धातुओं में उतार-चढ़ाव भी काफी ज्यादा रह सकता है।
JM Financial Services के EBG Commodity & Currency Research के Senior Vice President प्रणव मेर के मुताबिक, शॉर्ट टर्म में सोने और चांदी में तेजी की संभावना बनी हुई है। उनके अनुमान के अनुसार, सोने की कीमत ₹1.57 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2.80 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच सकती है।
वहीं, LKP Securities के Commodity & Currency Research Analyst और VP जतिन त्रिवेदी ने कहा कि सोने की हालिया तेजी को अमेरिकी लेबर मार्केट के कमजोर आंकड़ों, डॉलर में नरमी और फेडरल रिजर्व की अपेक्षाकृत नरम मौद्रिक नीति की उम्मीदों से समर्थन मिला है।
उनके मुताबिक, इस सप्ताह निवेशकों को खास तौर पर अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, फेड की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर नजर रखनी चाहिए।
इस हफ्ते किन फैक्टर्स पर रहेगी नजर?
सोने और चांदी की कीमतों के लिए इस सप्ताह मुख्य रूप से ये फैक्टर्स महत्वपूर्ण रहेंगे:
- US CPI और महंगाई के आंकड़े
- फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें
- अमेरिकी डॉलर की चाल
- कच्चे तेल की कीमतें
- पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव
- होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी शिपिंग अनिश्चितता
- अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों में बदलाव
कुल मिलाकर, बुलियन मार्केट के लिए फंडामेंटल तस्वीर फिलहाल पूरी तरह कमजोर नहीं दिख रही है। कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़े और ब्याज दरों में नरमी की संभावनाएं सोने को सपोर्ट दे रही हैं, जबकि भू-राजनीतिक जोखिम भी सेफ-हेवन डिमांड को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, अगर अमेरिकी महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा मजबूत आते हैं और डॉलर में तेजी लौटती है, तो सोने-चांदी में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
इसलिए इस सप्ताह बुलियन मार्केट में तेजी के साथ-साथ तेज उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
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