नई दिल्ली: अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक और बड़ा कदम उठाया है। जांच एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामले में सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की है। ED के मुताबिक, इस मामले में करीब ₹40,185.55 करोड़ की अपराध से अर्जित आय से जुड़े आरोप सामने आए हैं।
जांच एजेंसी ने अदालत से पहले ही अटैच और एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी द्वारा कन्फर्म की जा चुकी करीब ₹8,078.06 करोड़ की संपत्तियों को जब्त करने का अनुरोध किया है। इन संपत्तियों में नई दिल्ली, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे में मौजूद लीजहोल्ड और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं।
RCom के खिलाफ ED की नई शिकायत क्या है?
ED has filed a Prosecution Complaint (PC) on 08.08.2026 under the Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 before the Hon'ble Special Court (PMLA), Dwarka District Courts, New Delhi, in the case of M/s Reliance Infrastructure Ltd. pic.twitter.com/EYItlVZrTQ
— ED (@dir_ed) August 9, 2026 ED ने बताया कि 27 मार्च को दायर की गई शुरुआती प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट के बाद शनिवार को सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की गई। इस मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom), रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL), गौतम भाईलाल दोषी, सतीश सेठ, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य को आरोपी बनाया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों पर PMLA, 2002 की धारा 3 और धारा 70 के साथ धारा 4 के तहत दंडनीय अपराधों से जुड़े आरोप हैं। ED ने अपराध से अर्जित आय की राशि ₹40,185.55 करोड़ बताई है। एजेंसी के मुताबिक यह वह कुल बकाया रकम है जिसे संबंधित उधार लेने वाली कंपनियां बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बॉन्डहोल्डर्स के समूह को नहीं चुका सकीं।
₹8,078 करोड़ की संपत्ति पर ED की नजर
इस मामले में ED ने करीब ₹8,078.06 करोड़ की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है। एजेंसी के मुताबिक इन संपत्तियों को पहले ही अटैच किया जा चुका है और एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने भी इन्हें कन्फर्म कर दिया है।
इन संपत्तियों में कई शहरों की अचल और लीजहोल्ड प्रॉपर्टी शामिल हैं। इनमें नई दिल्ली, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे की संपत्तियां बताई गई हैं।
हालांकि, संपत्ति जब्ती की अंतिम प्रक्रिया संबंधित न्यायिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी। ED की शिकायत में लगाए गए आरोपों पर अदालत की कार्यवाही भी महत्वपूर्ण होगी।
$1 बिलियन FCCB फंड को लेकर क्या आरोप?
ED की जांच में फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड (FCCB) के जरिए जुटाई गई करीब 1 अरब डॉलर की रकम के अंतिम इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस रकम के उपयोग को लेकर गलत सर्टिफिकेट जमा किए गए। ED ने फंड जुटाने, उसके इस्तेमाल, उसे अलग-अलग माध्यमों से ट्रांसफर करने और कथित तौर पर उसके वास्तविक इस्तेमाल को छिपाने में आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं की पहचान करने का दावा किया है।
2007 से चल रही थी कथित फंड रूटिंग की कहानी
ED के अनुसार, जांच में सामने आया कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की शुरुआत कम से कम 2007 में हुई थी। एजेंसी का दावा है कि इसके बाद आपस में जुड़ी हुई वित्तीय गतिविधियों की एक लगातार श्रृंखला चलती रही।
जांच के मुताबिक, नई क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल मंजूर उद्देश्य के बजाय मौजूदा घरेलू और विदेशी देनदारियों को चुकाने, फंड को एक जगह से दूसरी जगह घुमाने और कथित तौर पर ‘एवरग्रीनिंग’ के लिए किया गया।
एवरग्रीनिंग का मतलब ऐसी व्यवस्था से है जिसमें पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नए कर्ज या नई क्रेडिट सुविधा का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे खाते को तत्काल संकट में जाने से रोका जा सके।
ग्रुप कंपनियों और कई खातों के जरिए फंड ट्रांसफर का आरोप
ED ने आरोप लगाया है कि फंड को ग्रुप कंपनियों, स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPVs), अलग-अलग बैंक खातों और लिक्विड म्यूचुअल फंड्स के जरिए घुमाया गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इन रकमों का इस्तेमाल मौजूदा External Commercial Borrowings (ECBs) और Foreign Currency Convertible Bonds (FCCBs) से जुड़ी देनदारियों को चुकाने के लिए किया गया। आरोप है कि इन लेन-देन को वैध कारोबारी खर्च या आय के तौर पर दिखाने की कोशिश की गई।
ED का कहना है कि इस पूरे मामले में कई आपस में जुड़े लेन-देन की जांच की गई है और फंड के अंतिम इस्तेमाल को समझने के लिए वित्तीय रिकॉर्ड तथा अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की गई।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस कैपिटल का भी जिक्र
जांच एजेंसी के मुताबिक, लोन से प्राप्त रकम का एक हिस्सा रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड जैसी ग्रुप कंपनियों में ट्रांसफर किया गया।
ED ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रमोटरों ने लोन से मिली रकम का इस्तेमाल भारत के बाहर व्यक्तिगत संपत्तियां खरीदने और RCom के मुनाफे को कथित तौर पर कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए किया।
इन आरोपों की जांच अभी जारी है और मामले में आगे भी अतिरिक्त जानकारी सामने आने की संभावना है।
दो आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में
इस मामले में ED ने गौतम भाईलाल दोषी को 12 जून और सतीश सेठ को 9 जुलाई को गिरफ्तार किया था। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
PMLA की विशेष अदालत ने मुख्य प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट का 15 जून को संज्ञान लिया था। अब सप्लीमेंट्री कंप्लेंट दाखिल होने के बाद मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
CBI की FIR के आधार पर शुरू हुई ED जांच
ED ने बताया कि इस मामले में जांच कई FIR के आधार पर शुरू की गई थी। ये FIR बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों के बाद CBI की बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच, नई दिल्ली द्वारा दर्ज की गई थीं।
मामले में RCom, RTL और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड द्वारा कथित तौर पर फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं का गलत तरीके से लाभ उठाने तथा बाद में रकम को दूसरी जगह ट्रांसफर करने के आरोपों की जांच की गई।
ED का कहना है कि जांच में फंड के इस्तेमाल से जुड़े कई लेन-देन आपस में जुड़े पाए गए हैं।
आगे क्या होगा?
ED की सप्लीमेंट्री कंप्लेंट के बाद अब अदालत में इस मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। एजेंसी ने करीब ₹8,078.06 करोड़ की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है, जबकि जांच में कथित अपराध से अर्जित आय का आंकड़ा ₹40,185.55 करोड़ बताया गया है।
फिलहाल मामले में ED की जांच जारी है। एजेंसी की ओर से लगाए गए आरोप अदालत में विचाराधीन हैं और आरोपियों की कानूनी स्थिति अंतिम न्यायिक निर्णय के अधीन रहेगी।


