मुंबई में पढ़ाई के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने वाले शब्बीर मिठाईवाला की कहानी संघर्ष, जिम्मेदारी और कारोबारी सोच की मिसाल है। कभी ₹18,000 की नौकरी से करियर शुरू करने वाले शब्बीर ने परिवार के करीब 10 लाख दिरहम के कर्ज के बीच कारोबार संभाला और उसे एक नए क्षेत्र में ले जाने की कोशिश की। आज वह हर महीने करीब 40,000 दिरहम यानी लगभग ₹10 लाख की सैलरी लेने का दावा करते हैं।
सफलता की कहानियां अक्सर हमें उस मुकाम से दिखाई देती हैं, जहां व्यक्ति पहुंच चुका होता है। लेकिन उसके पीछे की मेहनत, असफलताएं और मुश्किल फैसले कई बार नजर नहीं आते। शब्बीर मिठाईवाला की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। UAE में बचपन बिताने के बाद वह पढ़ाई के लिए मुंबई आए थे। आर्थिक परिस्थितियां ऐसी थीं कि अपनी पढ़ाई और रहने का खर्च निकालने के लिए उन्हें नौकरी करनी पड़ी।
शब्बीर ने करीब ₹18,000 महीने की सैलरी से अपने कामकाजी सफर की शुरुआत की। दिन में कॉलेज और प्रोफेशनल पढ़ाई करने के बाद रात में कॉल सेंटर की नौकरी करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। कई साल तक उन्होंने बेहद व्यस्त शेड्यूल के बीच पढ़ाई और नौकरी दोनों को संभाला। यही दौर आगे चलकर उनके कारोबारी जीवन की नींव बना।
18-19 घंटे की दिनचर्या ने सिखाया मुश्किलों से लड़ना
शब्बीर के शुरुआती दिनों की दिनचर्या आसान नहीं थी। सुबह कॉलेज, उसके बाद CA की कोचिंग और फिर रात की नौकरी। बताया जाता है कि कई बार उनका दिन करीब 18 से 19 घंटे तक पढ़ाई और काम में बीतता था।
सुबह करीब 11 बजे तक कॉलेज में पढ़ाई, दोपहर से शाम तक CA की कोचिंग और रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक कॉल सेंटर की नौकरी—इस तरह वह लगातार कई वर्षों तक अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहे।
उस समय मिलने वाली सैलरी का इस्तेमाल किराए, खाने और पढ़ाई के खर्च को पूरा करने में होता था। कमाई सीमित थी, लेकिन इस दौर ने उन्हें आत्मनिर्भर बनना सिखाया। करीब पांच साल तक ऐसी दिनचर्या के बाद उनके पास सिर्फ पढ़ाई की डिग्री और नौकरी का अनुभव ही नहीं था, बल्कि कठिन परिस्थितियों में लंबे समय तक काम करने का आत्मविश्वास भी था।
पिता की आंख की रोशनी जाने के बाद आया बड़ा मोड़
शब्बीर के जीवन में बड़ा बदलाव तब आया, जब CA की पढ़ाई के दौरान उन्हें अपने पिता की तबीयत और परिवार की स्थिति के बारे में गंभीर जानकारी मिली। उनके पिता लंबे समय से दुबई में पिक्चर-फ्रेम का कारोबार चला रहे थे। बताया जाता है कि उन्होंने 1984 में यह कारोबार शुरू किया था।
लेकिन समय के साथ परिवार का कारोबार आर्थिक दबाव में आ गया। 2013 में जब शब्बीर UAE वापस लौटे, तब बिजनेस के सामने कैश-फ्लो की समस्या थी और परिवार पर करीब 10 लाख दिरहम का कर्ज होने की बात सामने आई।
इस बीच उनके पिता की एक आंख की रोशनी भी चली गई थी। परिवार में छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई और दूसरी जिम्मेदारियां थीं। ऐसे समय में शब्बीर के सामने अपने करियर को लेकर एक बड़ा फैसला लेने की स्थिति आ गई।
CA बनने का सपना छोड़ा और संभाला पारिवारिक कारोबार
शब्बीर ने CA की पढ़ाई और उससे जुड़े करियर के लिए काफी मेहनत की थी। उनके सामने विकल्प था कि वह अपनी प्रोफेशनल जिंदगी को आगे बढ़ाएं या परिवार के मुश्किल दौर में कारोबार की जिम्मेदारी संभालें।
उन्होंने परिवार को प्राथमिकता दी और CA करियर के बजाय पारिवारिक कारोबार में लौटने का फैसला किया।
मुंबई में बिताए वर्षों के दौरान जिस मेहनत और अनुशासन को उन्होंने अपनाया था, वही अब उनके लिए कारोबार संभालने में काम आया। दुबई लौटने के बाद उन्होंने बिजनेस को संभालने के लिए एक बार फिर लंबे घंटों तक काम करना शुरू किया।
हालांकि इस बार चुनौती सिर्फ अपनी पढ़ाई या नौकरी संभालने की नहीं थी। उनके सामने परिवार के कारोबार को बचाने, कर्ज चुकाने और भविष्य के लिए एक नया बिजनेस मॉडल तैयार करने की चुनौती थी।
पिक्चर फ्रेम के कारोबार को आर्किटेक्चरल ग्लास की ओर ले गए
शब्बीर ने पारंपरिक कारोबार को उसी रूप में आगे बढ़ाने के बजाय नए बाजार की तलाश शुरू की। परिवार का पुराना कारोबार पिक्चर फ्रेम से जुड़ा था, लेकिन उन्होंने इसमें विस्तार की संभावना देखी।
इसी सोच के तहत 2017 में Glass R Us Industries की शुरुआत की गई। कंपनी ने धीरे-धीरे आर्किटेक्चरल ग्लास सॉल्यूशंस के क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ाईं।
इस बिजनेस का फोकस सिर्फ पारंपरिक पिक्चर फ्रेम तक सीमित नहीं रहा। रेजिडेंशियल, कमर्शियल और हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स के लिए ग्लास से जुड़े समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में कारोबार को आगे बढ़ाया गया।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि शब्बीर के सामने एक ऐसा कारोबार था, जिस पर पहले से कर्ज का दबाव था। नए क्षेत्र में विस्तार करने का मतलब जोखिम लेना भी था। लेकिन पुराने बिजनेस मॉडल को बदलने की कोशिश ने आगे बढ़ने का रास्ता तैयार किया।
करीब 7 साल में कर्ज से निकलने का दावा
कारोबार में बदलाव के बावजूद परिवार की आर्थिक परेशानियां तुरंत खत्म नहीं हुईं। शब्बीर के अनुसार, करीब 6 से 7 साल का समय कर्ज चुकाने में लगा।
यह अवधि उनके लिए वित्तीय अनुशासन सीखने का भी समय रही। कारोबार से होने वाली कमाई को व्यक्तिगत खर्च में इस्तेमाल करने के बजाय बिजनेस में दोबारा निवेश करना उनकी रणनीति का हिस्सा बना।
कर्ज खत्म होने के बाद भी उन्होंने खर्च बढ़ाने के बजाय कंपनी के विस्तार पर ध्यान देना जारी रखा। यही वजह है कि उनकी कहानी में कमाई से ज्यादा वित्तीय अनुशासन पर जोर दिखाई देता है।
हर महीने करीब ₹10 लाख सैलरी लेने का दावा
शब्बीर के मुताबिक, वह अपनी कंपनी से हर महीने करीब 40,000 दिरहम की सैलरी लेते हैं। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग ₹10 लाख के आसपास बैठती है, हालांकि विनिमय दर के अनुसार रुपये में इसकी वास्तविक राशि बदल सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि उनका कहना है कि वह कंपनी से इससे अधिक रकम भी निकाल सकते हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी व्यक्तिगत सैलरी को एक सीमा तक रखने का फैसला किया है।
उनकी सोच है कि कंपनी से मिलने वाली पूरी रकम व्यक्तिगत खर्च में लगाने के बजाय कारोबार में वापस निवेश करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, कर्ज का अनुभव उन्हें आज भी खर्च और उधार को लेकर सावधान रहने के लिए प्रेरित करता है।
अब नजर ग्लोबल मार्केट पर
शब्बीर की महत्वाकांक्षा अब सिर्फ पारिवारिक कारोबार को सफल बनाने तक सीमित नहीं है। वह अपने बिजनेस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
उनका एक बड़ा लक्ष्य भविष्य में रोजाना 1 मिलियन डॉलर की कमाई तक पहुंचना है। यह लक्ष्य वर्तमान कमाई की तुलना में बेहद बड़ा है, लेकिन शब्बीर इसे कारोबार को बड़े स्तर पर ले जाने की महत्वाकांक्षा के तौर पर देखते हैं।
उनकी कहानी में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि शुरुआत एक सीमित सैलरी वाली नाइट शिफ्ट की नौकरी से हुई थी। इसके बाद CA की पढ़ाई, परिवार की जिम्मेदारी, पिता की बीमारी, भारी कर्ज और पारिवारिक कारोबार को बदलने की चुनौती सामने आई।
शब्बीर ने हर मोड़ पर अपने करियर की दिशा बदली और अंततः कारोबार को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना। आज वह अपनी कमाई के साथ-साथ बिजनेस के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बनाने का लक्ष्य रखते हैं।
₹18,000 से ₹10 लाख तक का सफर क्या सिखाता है?
शब्बीर मिठाईवाला की कहानी को सिर्फ कमाई बढ़ने की कहानी के तौर पर देखना अधूरा होगा। इसमें कई ऐसे पहलू हैं जो किसी भी व्यक्ति के लिए सीख हो सकते हैं।
सबसे पहली सीख है कि शुरुआती कमाई छोटी होने का मतलब यह नहीं कि भविष्य भी सीमित रहेगा। दूसरी सीख वित्तीय अनुशासन की है। शब्बीर के अनुसार, कर्ज चुकाने के अनुभव ने उन्हें अपनी कमाई और खर्च के बीच संतुलन बनाना सिखाया।
तीसरी बात यह है कि मुश्किल समय में लिया गया फैसला कई बार पूरी जिंदगी की दिशा बदल सकता है। CA करियर छोड़कर परिवार का कारोबार संभालना उनके लिए आसान फैसला नहीं रहा होगा, लेकिन इसी निर्णय के बाद उन्होंने पारंपरिक बिजनेस को नए क्षेत्र में ले जाने की कोशिश की।
मुंबई में नाइट शिफ्ट से शुरू हुआ यह सफर अब दुबई में कारोबार और ग्लोबल विस्तार की महत्वाकांक्षा तक पहुंच चुका है। हालांकि उनकी भविष्य की कमाई और कारोबारी लक्ष्यों से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की गई है।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध सोशल मीडिया/यूज़र-शेयर किए गए कंटेंट और उसमें किए गए दावों पर आधारित है। इसमें बताई गई कमाई, कारोबार, कर्ज और भविष्य के लक्ष्यों के आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। रुपये में बताई गई रकम अनुमानित है और दिरहम-रुपया विनिमय दर के अनुसार बदल सकती है।


