घर में रखा सोना अब सिर्फ बचत और निवेश का साधन नहीं रह गया है, बल्कि जरूरत के समय तुरंत पैसा जुटाने का एक अहम जरिया भी बनता जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि सोने के बदले कर्ज लेने की मांग में तेज उछाल आया है। जून 2026 में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) का गोल्ड लोन सालाना आधार पर 69.3 फीसदी बढ़कर 3.41 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
गोल्ड लोन की यह वृद्धि एनबीएफसी के कुल रिटेल क्रेडिट की ग्रोथ से कई गुना ज्यादा है। खास बात यह है कि मई 2026 में भी गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में सालाना आधार पर 69.9 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई थी। यानी लगातार दूसरे महीने इस सेगमेंट में करीब 70 फीसदी की रफ्तार देखने को मिली है।
गोल्ड लोन बाकी रिटेल लोन से क्यों आगे निकला?
RBI के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में एनबीएफसी का कुल रिटेल लोन सालाना आधार पर 20.3 फीसदी बढ़ा। एक साल पहले यानी जून 2025 में रिटेल क्रेडिट की वृद्धि दर 14.3 फीसदी थी। इस दौरान एनबीएफसी का कुल रिटेल क्रेडिट करीब 21.29 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 25.62 लाख करोड़ रुपये हो गया।
इस पूरे आंकड़े में गोल्ड लोन की तेज वृद्धि सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है। इसका संकेत यह है कि बड़ी संख्या में ग्राहक अपनी तत्काल वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए सोने को गिरवी रखकर कर्ज लेने का विकल्प अपना रहे हैं।
गोल्ड लोन की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसकी अपेक्षाकृत आसान उपलब्धता भी है। ग्राहक अपने सोने के आभूषणों को गिरवी रखकर कर्ज ले सकता है और कई मामलों में यह प्रक्रिया दूसरे असुरक्षित कर्ज की तुलना में सरल हो सकती है। हालांकि, कर्ज लेने से पहले ब्याज और दूसरी फीस को समझना बेहद जरूरी है।
हाउसिंग और वाहन लोन भी बढ़े
एनबीएफसी के रिटेल क्रेडिट में सिर्फ गोल्ड लोन ही नहीं बढ़ा है। हाउसिंग और वाहन लोन में भी सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की गई है। जून 2026 में हाउसिंग लोन 11.4 फीसदी बढ़कर करीब 8.44 लाख करोड़ रुपये हो गया।
वहीं, वाहन लोन में 15.2 फीसदी की सालाना वृद्धि हुई और यह लगभग 6.24 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में भी 46.8 फीसदी की तेज वृद्धि दर्ज की गई। इस श्रेणी में टीवी, फ्रिज, मोबाइल और अन्य टिकाऊ उपभोक्ता सामानों की खरीद के लिए लिए जाने वाले कर्ज शामिल होते हैं। जून में कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन करीब 72,201 करोड़ रुपये रहा।
इन सभी आंकड़ों के बीच गोल्ड लोन की करीब 69 फीसदी वृद्धि इसे रिटेल क्रेडिट के सबसे तेजी से बढ़ने वाले प्रमुख हिस्सों में शामिल करती है।
ग्राहक सोने के बदले इतना कर्ज क्यों ले रहे हैं?
गोल्ड लोन की बढ़ती मांग के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। घर में मौजूद सोने को गिरवी रखकर ग्राहक अपनी तत्काल वित्तीय जरूरत पूरी कर सकता है। यह जरूरत कारोबार में पैसा लगाने, बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल खर्च, शादी या किसी अन्य अचानक आई आर्थिक जरूरत से जुड़ी हो सकती है।
सोने की कीमतों में तेजी ने भी गोल्ड लोन की क्षमता को प्रभावित किया है। जब गिरवी रखे जाने वाले सोने का मूल्य बढ़ता है तो पात्रता के हिसाब से ग्राहक को अधिक कर्ज मिल सकता है। हालांकि, कितना कर्ज मिलेगा यह सिर्फ सोने की कीमत पर निर्भर नहीं करता। लोन की शर्तें, सोने की शुद्धता, वजन, लोन-टू-वैल्यू (LTV) और संबंधित संस्था की नीति भी महत्वपूर्ण होती है।
गोल्ड लोन लेते समय इन बातों का रखें ध्यान
गोल्ड लोन जल्दी मिल सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे बिना शर्तों को समझे ले लेना चाहिए। ग्राहक को लोन लेने से पहले ब्याज दर के साथ-साथ प्रोसेसिंग फीस, अन्य शुल्क, भुगतान की समयसीमा और डिफॉल्ट की स्थिति से जुड़ी शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण जोखिम गिरवी रखे सोने से जुड़ा है। अगर ग्राहक तय शर्तों के अनुसार लोन नहीं चुका पाता है तो लेंडर नियमों के तहत गिरवी रखे सोने की नीलामी कर सकता है। ऐसे में ग्राहक अपना कीमती सोना गंवा सकता है।
इसलिए गोल्ड लोन लेने से पहले यह आकलन करना जरूरी है कि EMI या अन्य भुगतान समय पर किया जा सकेगा या नहीं। सिर्फ इस वजह से कर्ज लेना उचित नहीं है कि घर में सोना मौजूद है।
RBI ने गोल्ड लोन के नियम क्यों बदले?
गोल्ड लोन कारोबार में तेजी के साथ RBI ने इसके लिए नियामकीय व्यवस्था को भी मजबूत किया है। केंद्रीय बैंक ने जून 2025 में Reserve Bank of India (Lending Against Gold and Silver Collateral) Directions, 2025 जारी किए थे। इनका उद्देश्य बैंकों और एनबीएफसी समेत विनियमित संस्थाओं के लिए सोने और चांदी को गिरवी रखकर दिए जाने वाले कर्ज के संबंध में एक समान नियामकीय ढांचा तैयार करना था।
इससे पहले सितंबर 2024 में RBI ने कुछ संस्थानों की गोल्ड लोन व्यवस्था में कई तरह की कमियां सामने आने की बात कही थी। इनमें लोन की प्रक्रिया और सोने के मूल्यांकन में थर्ड पार्टी की भूमिका, ग्राहकों की पर्याप्त जांच, LTV अनुपात की निगरानी और डिफॉल्ट होने पर सोने की नीलामी में पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन पोर्टफोलियो के बीच इन जोखिमों को नियंत्रित करना नियामक के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। इसलिए गोल्ड लोन की बढ़ती मांग के साथ-साथ इस सेक्टर पर RBI की निगरानी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
हर सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार अलग
RBI के आंकड़ों में क्रेडिट ग्रोथ की तस्वीर हर क्षेत्र में एक जैसी नहीं रही। जून 2026 में उद्योग क्षेत्र को दिए गए कर्ज में सालाना आधार पर 6.7 फीसदी की वृद्धि हुई। जून 2025 में यह वृद्धि दर 10.3 फीसदी थी। यानी औद्योगिक क्रेडिट की रफ्तार में कमी आई है।
RBI के मुताबिक इसकी एक प्रमुख वजह इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में कर्ज की धीमी वृद्धि रही। दूसरी ओर सर्विस सेक्टर में भी क्रेडिट ग्रोथ घटकर 17.6 फीसदी रह गई, जबकि एक साल पहले यह 22.4 फीसदी थी।
हालांकि कमर्शियल रियल एस्टेट में क्रेडिट विस्तार मजबूत बना रहा। वहीं ट्रेड और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को दिए गए कर्ज की वृद्धि दर में कमी देखने को मिली।
कृषि क्षेत्र के कर्ज में भी तेज उछाल
कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों के लिए दिए गए कर्ज में इसके उलट काफी तेज वृद्धि दर्ज की गई। जून 2026 में कृषि क्षेत्र का क्रेडिट सालाना आधार पर 17.9 फीसदी बढ़ा। जून 2025 में इसकी वृद्धि दर सिर्फ 5.1 फीसदी थी।
इससे पता चलता है कि क्रेडिट ग्रोथ केवल रिटेल और गोल्ड लोन तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि क्षेत्र में भी कर्ज की मांग में मजबूत बदलाव देखने को मिला है।
RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि सेक्टोरल क्रेडिट से जुड़े ये आंकड़े प्रोविजनल हैं। इन्हें एनबीएफसी की अपर और मिडिल लेयर तथा हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के एक सैंपल के आधार पर तैयार किया गया है। इस सैंपल में शामिल संस्थान केंद्रीय बैंक के रेफरेंस डेटा में शामिल कुल क्रेडिट का करीब 87 फीसदी हिस्सा कवर करते हैं।
गोल्ड लोन की तेज ग्रोथ से क्या संकेत मिलता है?
जून 2026 के आंकड़ों में सबसे बड़ा संकेत एनबीएफसी के गोल्ड लोन में करीब 70 फीसदी की सालाना वृद्धि है। 3.41 लाख करोड़ रुपये का बकाया गोल्ड लोन बताता है कि सोने को गिरवी रखकर पैसा जुटाने का विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
हालांकि, इस बढ़ती मांग को केवल सकारात्मक नजरिए से देखना सही नहीं होगा। गोल्ड लोन ग्राहक के लिए आसान और तेज वित्तीय विकल्प हो सकता है, लेकिन इसके साथ सोना खोने का जोखिम भी जुड़ा है। इसलिए ब्याज दर, कुल लागत, भुगतान की शर्तें और डिफॉल्ट होने पर नीलामी की प्रक्रिया समझने के बाद ही फैसला लेना चाहिए।
कुल मिलाकर, RBI के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोना अब जरूरत के समय क्रेडिट जुटाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। गोल्ड लोन की तेज वृद्धि इस बदलती वित्तीय आदत का संकेत है, लेकिन ग्राहकों के लिए जिम्मेदारी से कर्ज लेना और समय पर भुगतान करना उतना ही महत्वपूर्ण है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी गोल्ड लोन या अन्य वित्तीय उत्पाद का निर्णय लेने से पहले ब्याज दर, शुल्क, नियम और अपनी पुनर्भुगतान क्षमता की जांच जरूर करें। विशेषज्ञों द्वारा दी गई सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं। ये NewsJagran.in के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।


