नई दिल्ली: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आई जानकारी ने पिछले सात वर्षों के दौरान योजना के बजट आवंटन और वास्तविक खर्च की स्थिति को स्पष्ट किया है। आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार ने हर साल इस योजना के लिए हजारों करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया, लेकिन कई वित्तीय वर्षों में पूरा आवंटित धन खर्च नहीं हो पाया। इसकी प्रमुख वजह लाभार्थियों के सत्यापन, ई-केवाईसी, आधार प्रमाणीकरण और अपात्र किसानों को सूची से हटाने जैसी प्रक्रियाएं रहीं।
यह योजना वर्ष 2019 में शुरू की गई थी और आज देश की सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं में शामिल है। इसके तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है।
RTI में क्या खुलासा हुआ?
RTI के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, PM-KISAN योजना के लिए प्रत्येक वित्तीय वर्ष में पर्याप्त बजट आवंटित किया गया, लेकिन वास्तविक व्यय कई बार निर्धारित राशि से कम रहा। इसका मुख्य कारण लाभार्थियों का लगातार सत्यापन, ई-केवाईसी अनिवार्य होना, आधार से बैंक खातों का मिलान, भूमि रिकॉर्ड की जांच तथा अपात्र लाभार्थियों को योजना से बाहर करना रहा।
इन प्रक्रियाओं के कारण कई किसानों की किस्तें अस्थायी रूप से रुकीं या वे पात्रता सूची से बाहर हो गए, जिससे आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं हो सका।
PM-KISAN योजना कैसे करती है काम?
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को खेती से जुड़े खर्चों में आर्थिक सहायता प्रदान करना है। योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर वर्ष 6,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है, जिसे 2,000-2,000 रुपये की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है।
यह पूरी प्रक्रिया DBT प्रणाली के जरिए संचालित होती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और सहायता राशि सीधे किसानों तक पहुंचती है।
करोड़ों किसानों को मिला लाभ
PM-KISAN योजना के माध्यम से अब तक करोड़ों किसान परिवारों को आर्थिक सहायता मिल चुकी है। सरकार समय-समय पर लाभार्थियों का सत्यापन कर यह सुनिश्चित करती है कि केवल पात्र किसानों को ही योजना का लाभ मिले। इसी वजह से समय-समय पर लाभार्थियों की संख्या में बदलाव भी देखने को मिलता है।
क्यों नहीं खर्च हो पाया पूरा बजट?
विशेषज्ञों के अनुसार, आवंटित बजट पूरी तरह खर्च न होने के पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण रहे, जिनमें शामिल हैं—
- ई-केवाईसी पूरा न होना।
- आधार और बैंक खाते का सत्यापन लंबित होना।
- भूमि रिकॉर्ड में त्रुटियां।
- अपात्र लाभार्थियों की पहचान और उन्हें सूची से हटाना।
- नए पात्र किसानों के पंजीकरण में समय लगना।
इन कारणों से कई बार स्वीकृत राशि का एक हिस्सा उपयोग नहीं हो पाया।
अगले पांच वर्षों तक जारी रहेगी योजना
केंद्र सरकार ने हाल ही में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए लगभग 3.15 लाख करोड़ रुपये के कुल वित्तीय प्रावधान को स्वीकृति दी गई है। इस निर्णय से आने वाले वर्षों में भी पात्र किसानों को नियमित रूप से आर्थिक सहायता मिलती रहेगी।
सरकार का कहना है कि लाभार्थियों का डिजिटल सत्यापन और रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी, ताकि योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र किसानों तक ही पहुंचे।
PM-KISAN योजना का महत्व
PM-KISAN योजना भारत सरकार की सबसे महत्वपूर्ण किसान कल्याण योजनाओं में से एक है। यह किसानों को बीज, खाद, सिंचाई और अन्य कृषि आवश्यकताओं के लिए न्यूनतम वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। सरकार का मानना है कि नियमित आय सहायता से छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और खेती की लागत का कुछ बोझ कम करने में मदद मिलती है।


