नई दिल्ली: देश के सरकारी बैंकों (PSBs) ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वित्तीय सुधार दर्ज किया है। सरकार के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है, मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है और फंसे हुए कर्ज (NPA) कई दशकों के सबसे निचले स्तर पर आ गए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी बैंकों का संयुक्त शुद्ध लाभ करीब ₹2 लाख करोड़ रहा, जो 2021-22 में दर्ज लगभग ₹67,000 करोड़ के मुकाबले लगभग तीन गुना है।
राज्यसभा में एक लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार द्वारा किए गए सुधारों और बैंकिंग सेक्टर में अपनाए गए सख्त कदमों का सकारात्मक असर अब साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। बैंक अब अधिक लाभदायक होने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से कर्ज भी उपलब्ध करा रहे हैं।
पांच साल में बैड लोन में बड़ी गिरावट
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) पिछले पांच वर्षों में तेजी से घटा है।
- पांच साल पहले GNPA अनुपात: 7.3%
- वर्तमान GNPA अनुपात: 1.9%
यह कई दशकों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। इससे बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत हुई है और नए कर्ज देने की उनकी क्षमता में भी इजाफा हुआ है।
सरकार के कदमों से मिली बड़ी राहत
सरकारी बैंकों की स्थिति सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई अहम कदम उठाए। इनमें सबसे महत्वपूर्ण रहा बैंकों में पूंजी निवेश (Recapitalisation), जिससे कमजोर बैंकों को वित्तीय मजबूती मिली।
इसके अलावा, इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के प्रभावी क्रियान्वयन से फंसे हुए कर्ज की वसूली की प्रक्रिया तेज हुई। इससे खराब ऋणों में लगातार कमी आई और बैंकिंग प्रणाली अधिक मजबूत हुई।
सरकार का कहना है कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने से उद्योगों और कारोबारों की कर्ज मांग बढ़ी, जिससे बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ भी मजबूत रही।
ECLGS योजना बनी कारोबारियों के लिए सहारा
कोविड महामारी के दौरान शुरू की गई Emergency Credit Line Guarantee Scheme (ECLGS) ने भी बैंकिंग प्रणाली को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अब पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए सरकार ने ECLGS 5.0 लागू किया है। इसका उद्देश्य कारोबारियों को नकदी संकट (Liquidity Mismatch) से राहत देना और ₹2.55 लाख करोड़ तक का क्रेडिट फ्लो बनाए रखना है।
वित्त राज्य मंत्री के अनुसार अब तक इस योजना के तहत ₹1.9 लाख करोड़ के लिए सरकारी गारंटी जारी की जा चुकी है।
किन सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा?
ECLGS 5.0 के तहत सबसे अधिक लाभ इन क्षेत्रों को मिला है—
- ट्रेडिंग सेक्टर
- फूड प्रोसेसिंग उद्योग
- टेक्सटाइल उद्योग
- छोटे और मध्यम कारोबार
वहीं सिविल एविएशन सेक्टर के लिए ₹5,000 करोड़ तक की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, लेकिन अब तक इस क्षेत्र में केवल आठ गारंटी जारी हुई हैं, जिनकी कुल राशि ₹163 करोड़ है।
सरकारी बैंकों की स्थिति क्यों हुई मजबूत?
विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी बैंकों की मौजूदा मजबूती के पीछे कई प्रमुख कारण हैं—
- सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश
- IBC के जरिए फंसे कर्ज की बेहतर वसूली
- बैड लोन की लगातार सफाई
- अर्थव्यवस्था में मजबूत क्रेडिट ग्रोथ
- बेहतर जोखिम प्रबंधन और डिजिटल बैंकिंग का विस्तार
- सरकारी गारंटी योजनाओं का प्रभाव
इन सुधारों के चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अब पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत वित्तीय स्थिति में हैं और देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


