India-UAE Critical Minerals: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अपनी रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं। दोनों देश अब केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि तीसरे देशों में संयुक्त निवेश (Joint Investment) की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं। खासकर लिथियम, निकल, कोबाल्ट और तांबा जैसे क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही भारत और UAE के बीच हवाई सेवाओं का विस्तार कर व्यापार, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देने की योजना है। दोनों देशों का अगला लक्ष्य 200 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार तक पहुंचना है।
भारत और UAE तीसरे देशों में क्यों करेंगे संयुक्त निवेश?
संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री ने कहा कि भारत और UAE की साझेदारी अब नए चरण में प्रवेश कर रही है। इस चरण में दोनों देश तीसरे देशों में मिलकर निवेश करने पर विचार कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि यह निवेश विशेष रूप से क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में हो सकता है। मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में आ रहे बदलावों को देखते हुए यह पहल दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगी।
क्रिटिकल मिनरल्स क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण?
आज की आधुनिक अर्थव्यवस्था में कुछ खनिज ऐसे हैं जिनके बिना नई तकनीक आधारित उद्योगों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इनमें शामिल हैं:
- लिथियम – इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और बैटरियों के लिए आवश्यक।
- निकल – हाई-परफॉर्मेंस बैटरियों और औद्योगिक उपयोग में अहम।
- कोबाल्ट – सेमीकंडक्टर और बैटरी निर्माण में उपयोगी।
- तांबा (Copper) – डेटा सेंटर, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए जरूरी।
अल मर्री के अनुसार, केवल इन खनिजों की खरीद ही नहीं, बल्कि उनकी प्रोसेसिंग और सुरक्षित सप्लाई भी भविष्य के उद्योगों के लिए बेहद जरूरी होगी।
सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने पर रहेगा फोकस
यूएई के मंत्री ने कहा कि दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण वैश्विक सप्लाई चेन दोबारा आकार ले रही है। ऐसे में भारत और UAE को मिलकर नई सप्लाई चेन विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अब साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि इसमें शामिल होंगे:
- संयुक्त निवेश (Joint Investment)
- सह-निवेश प्लेटफॉर्म (Co-investment Platforms)
- औद्योगिक सहयोग
- वित्तीय कनेक्टिविटी
- भविष्य के उद्योगों के लिए भरोसेमंद सप्लाई नेटवर्क
इससे दोनों देशों को ऊर्जा सुरक्षा और नई तकनीक आधारित उद्योगों में मजबूती मिलेगी।
भारत-UAE के बीच हवाई सेवाएं बढ़ाने की मांग
अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री ने भारत और UAE के बीच हवाई सेवा समझौते (Air Services Agreement) में संशोधन की जरूरत भी बताई।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सीट क्षमता पूरी तरह भर चुकी है और बढ़ती मांग को पूरा नहीं कर पा रही है।
फिलहाल:
- दुबई के लिए साप्ताहिक सीट सीमा: 66,000
- अबू धाबी के लिए साप्ताहिक सीट सीमा: 50,000
उनका कहना है कि इन सीमाओं को बढ़ाने से व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई गति मिलेगी।
सीट क्षमता बढ़ने से हवाई किराए भी होंगे कम
अल मर्री ने कहा कि सीमित सीटों के कारण भारत-UAE मार्ग पर हवाई किराए बढ़ रहे हैं, जिसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ता है।
उन्होंने ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि:
यदि भारत और UAE के बीच सीट क्षमता में 1% की वृद्धि होती है, तो औसतन हवाई किराया लगभग 0.2% तक कम हो सकता है।
इससे लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी।
40 लाख भारतीय रहते हैं UAE में
यूएई आज 40 लाख से अधिक भारतीयों का दूसरा घर बन चुका है। भारतीय समुदाय वहां व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा, सेवा और निर्माण जैसे कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अल मर्री का कहना है कि बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से:
- परिवारों की आवाजाही आसान होगी।
- व्यापारिक यात्राएं बढ़ेंगी।
- पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
- निवेशकों के लिए अवसर बढ़ेंगे।
छोटे भारतीय शहरों को भी मिलेगा फायदा
यूएई के मंत्री ने कहा कि भारत के कई टियर-2 और टियर-3 शहर अभी भी पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय हवाई कनेक्टिविटी से वंचित हैं।
यदि नई उड़ानें शुरू होती हैं तो:
- छोटे शहरों से सीधे UAE पहुंचना आसान होगा।
- रोजगार और व्यापार के नए अवसर खुलेंगे।
- पर्यटन उद्योग को भी लाभ मिलेगा।
200 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे दोनों देश
भारत और UAE पहले ही 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ चुके हैं। अब दोनों देशों ने 200 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने का रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया है।
अल मर्री का मानना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने में:
- मजबूत हवाई कनेक्टिविटी,
- संयुक्त निवेश,
- क्रिटिकल मिनरल्स में सहयोग,
- और औद्योगिक साझेदारी
अहम भूमिका निभाएंगे।
भारतीय नेताओं से हुई अहम बैठक
भारत दौरे के दौरान अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री ने कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इनमें शामिल हैं:
- केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल
- नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू
- आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू
- गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल
इन बैठकों में व्यापार, निवेश, विमानन, औद्योगिक सहयोग और भविष्य की रणनीतिक साझेदारी पर विस्तार से चर्चा हुई।
निष्कर्ष
भारत और UAE की साझेदारी अब पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर वैश्विक रणनीतिक सहयोग की दिशा में बढ़ रही है। तीसरे देशों में संयुक्त निवेश, क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित सप्लाई चेन और हवाई सेवाओं के विस्तार जैसी पहलें आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई दे सकती हैं। यदि यह रणनीति सफल होती है तो न केवल 200 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य तक पहुंचना आसान होगा, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, हाई-टेक उद्योगों और वैश्विक सप्लाई चेन में भी भारत और UAE की भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी।


