नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के शानदार वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 22% बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पहुंच गया है। इसके साथ ही बोर्ड ने प्रति शेयर ₹1,10,717 के भारी-भरकम डिविडेंड की सिफारिश की है। हालांकि, एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, Agratas और Tata Electronics जैसे नए कारोबारों में लगातार हो रहे घाटे का असर कंपनी के प्रदर्शन पर साफ दिखाई दिया।
इसके बावजूद निवेश से मिलने वाले मजबूत रिटर्न और समूह की प्रमुख कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन ने टाटा संस की कमाई को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
FY26 में 22% बढ़ा टाटा संस का मुनाफा
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में टाटा संस का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 31,961 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले यह 26,232 करोड़ रुपये था। यानी कंपनी के मुनाफे में करीब 22 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वहीं कंपनी की कुल आय (Revenue) भी 9.1% बढ़कर 42,367 करोड़ रुपये हो गई। मजबूत निवेश आय और पोर्टफोलियो कंपनियों से बेहतर रिटर्न इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह रहे।
हर शेयर पर मिलेगा ₹1,10,717 का डिविडेंड
टाटा संस के बोर्ड ने शेयरधारकों के लिए प्रति शेयर ₹1,10,717 का डिविडेंड देने की सिफारिश की है।
इस डिविडेंड का सबसे बड़ा फायदा टाटा ट्रस्ट्स को मिलेगा, जिसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है। इसके अलावा अन्य शेयरधारकों को भी इस विशेष लाभांश का फायदा मिलेगा।
ग्रुप का कारोबार भी रिकॉर्ड स्तर पर
टाटा ग्रुप ने समूह स्तर पर भी मजबूत प्रदर्शन किया है।
- ग्रुप रेवेन्यू: 16.24 लाख करोड़ रुपये (7.8% की वृद्धि)
- ग्रुप नेट प्रॉफिट: 1.71 लाख करोड़ रुपये (52% की वृद्धि)
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि FY20 की तुलना में ग्रुप का राजस्व 2.1 गुना और मुनाफा 5.4 गुना हो चुका है। इससे समूह की दीर्घकालिक विकास रणनीति की सफलता दिखाई देती है।
एयर इंडिया बना सबसे बड़ा घाटे वाला कारोबार
हालांकि पूरे समूह के लिए सबसे बड़ी चिंता एयर इंडिया रही।
वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया का घाटा बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह नुकसान कई कारणों से बढ़ा, जिनमें शामिल हैं—
- कई देशों में एयरस्पेस बंद होना
- पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ईंधन महंगा होना
- विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव
- अहमदाबाद विमान दुर्घटना का असर
- विमानों की सप्लाई में देरी
चंद्रशेखरन ने कहा कि एयर इंडिया का ट्रांसफॉर्मेशन एक 5 से 10 साल की लंबी प्रक्रिया है। कंपनी अपने पूरे फ्लीट को आधुनिक बना रही है और पुराने सिस्टम व कार्य संस्कृति में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।
टाटा डिजिटल का घाटा भी बढ़ा
टाटा समूह की डिजिटल इकाई टाटा डिजिटल का घाटा भी बढ़ा है।
- FY25 घाटा: 4,610 करोड़ रुपये
- FY26 घाटा: 4,974 करोड़ रुपये
हालांकि कंपनी का कहना है कि भारत का ई-कॉमर्स बाजार तेजी से क्विक कॉमर्स की ओर बढ़ रहा है और BigBasket इस बदलाव का लाभ उठा रही है।
पिछले चार वर्षों में टाटा डिजिटल ने 46,515 करोड़ रुपये का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) हासिल किया है। वहीं Tata Neu अब फाइनेंशियल सर्विसेज, लॉयल्टी प्रोग्राम और डिजिटल पेमेंट्स पर अधिक फोकस कर रहा है।
Agratas और Tata Electronics में भी निवेश जारी
टाटा समूह भविष्य की तकनीकों पर भी बड़ा दांव लगा रहा है।
- Agratas (बैटरी बिजनेस): 1,101 करोड़ रुपये का घाटा
- Tata Electronics: 1,611 करोड़ रुपये का घाटा
चंद्रशेखरन का कहना है कि ये निवेश आने वाले वर्षों में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करेंगे और लंबे समय में समूह के लिए बड़े अवसर पैदा करेंगे।
चेयरमैन ने बताया क्यों जरूरी हैं ये निवेश
एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और नई टेक्नोलॉजी कंपनियों में हो रहा निवेश अल्पकालिक लाभ के लिए नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
उनके अनुसार, भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सेमीकंडक्टर और एविएशन सेक्टर में भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए ये निवेश आने वाले वर्षों में मजबूत रिटर्न दे सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
टाटा संस के नतीजे यह संकेत देते हैं कि समूह की पारंपरिक कंपनियां मजबूत नकदी प्रवाह और मुनाफा पैदा कर रही हैं। इसी वजह से कंपनी भारी डिविडेंड देने की स्थिति में है। दूसरी ओर, एयर इंडिया, डिजिटल बिजनेस, बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए क्षेत्रों में फिलहाल घाटा जारी है, लेकिन प्रबंधन का मानना है कि ये निवेश भविष्य में ग्रुप की ग्रोथ के प्रमुख इंजन बनेंगे।


