Hiring Process Viral Post: नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए इंटरव्यू के बाद कंपनी की ओर से जवाब न मिलना यानी “घोस्टिंग” एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। हाल ही में एक उम्मीदवार ने अपना ऐसा ही अनुभव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म LinkedIn पर साझा किया, जिसने हजारों लोगों का ध्यान खींचा। उम्मीदवार का कहना है कि इंटरव्यू के दौरान सब कुछ सकारात्मक लग रहा था, सैलरी पर भी पहले ही स्पष्ट बातचीत हो गई थी, लेकिन बाद में कंपनी ने कई बार संपर्क करने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया।
इंटरव्यू से पहले ही सैलरी को लेकर थी पूरी स्पष्टता
LinkedIn पर अपना अनुभव साझा करने वाली श्रुति राय ने लिखा कि उन्होंने जिस एजेंसी में इंटरव्यू दिया था, वहां वह पहले भी काम कर चुकी थीं। इंटरव्यू शुरू होने से पहले ही उन्होंने अपनी सैलरी की अपेक्षाओं के बारे में साफ-साफ बता दिया था।
श्रुति के मुताबिक, उन्होंने कंपनी से कहा था कि यदि उनकी अपेक्षित सैलरी कंपनी के बजट में फिट नहीं बैठती है, तो इंटरव्यू आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं है ताकि किसी का समय बर्बाद न हो। इसके बावजूद कंपनी ने इंटरव्यू जारी रखने का फैसला किया।
इंटरव्यू का अनुभव रहा निराशाजनक
श्रुति ने अपने पोस्ट में बताया कि इंटरव्यू के दौरान उनके अनुभव, पिछले प्रोजेक्ट्स या उनके द्वारा लीड किए गए कैंपेन पर चर्चा करने के बजाय इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति लगातार उनके जवाबों पर सवाल उठाता रहा।
उन्होंने लिखा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे इंटरव्यू का उद्देश्य उनकी क्षमता को समझना नहीं, बल्कि उन्हें असहज महसूस कराना था।
उनका मानना है कि आज के समय में हायरिंग प्रक्रिया का मकसद उम्मीदवार की योग्यता को परखना होना चाहिए, न कि इंटरव्यू के दौरान अनावश्यक दबाव या पावर डायनामिक बनाना।
ऑफर की उम्मीद में गंवा दिया दूसरा मौका
श्रुति ने बताया कि इंटरव्यू के बाद उन्हें पूरा भरोसा था कि उन्हें जल्द ही नौकरी का ऑफर मिलेगा। इसी उम्मीद में उन्होंने एक अन्य कंपनी के अवसर पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया।
लेकिन तय समय गुजर जाने के बाद भी जब कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई तो उन्होंने कई बार संपर्क करने की कोशिश की। इसके बावजूद उन्हें किसी प्रकार का जवाब नहीं मिला।
उन्होंने लिखा कि उन्हें रिजेक्ट होने से कोई परेशानी नहीं होती, क्योंकि हर कंपनी को अपनी जरूरत के अनुसार उम्मीदवार चुनने का अधिकार है। परेशानी इस बात से है कि उम्मीदवारों से समय और धैर्य की अपेक्षा की जाती है, लेकिन बदले में उन्हें एक साधारण जवाब तक नहीं दिया जाता।
“अगर आगे नहीं बढ़ना है तो साफ बता दीजिए”
श्रुति ने अपने पोस्ट में कंपनियों से अपील करते हुए लिखा कि यदि किसी उम्मीदवार को आगे नहीं बढ़ाना है या भर्ती की योजना बदल गई है, तो इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उम्मीदवार भी इंसान होते हैं और उनके समय की भी उतनी ही अहमियत है। बिना किसी सूचना के लंबे समय तक इंतजार करवाना पेशेवर व्यवहार नहीं माना जा सकता।
उन्होंने यह भी लिखा कि किसी कंपनी की हायरिंग प्रक्रिया उसके कार्य संस्कृति (Work Culture) की झलक भी दिखाती है। उनके अनुसार, इस पूरे अनुभव के कारण उन्होंने एक दूसरा अच्छा नौकरी का अवसर भी खो दिया, जिसका उन्हें सबसे ज्यादा अफसोस है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने भी साझा किए अपने अनुभव
श्रुति की पोस्ट वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने कमेंट कर अपने अनुभव साझा किए।
एक यूजर ने लिखा कि कंपनियों द्वारा उम्मीदवारों को लंबे समय तक बिना जवाब के इंतजार करवाना बेहद परेशान करने वाला होता है।
दूसरे यूजर ने कहा कि उनके साथ भी ऐसा ही हुआ था, जहां कई दौर की बातचीत के बाद कंपनी अचानक गायब हो गई और कभी कोई जवाब नहीं दिया।
एक अन्य यूजर ने बताया कि उनसे इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान विस्तृत काम करवाया गया, लेकिन उसके बाद कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभव निराशाजनक जरूर होते हैं, लेकिन करियर में आगे बढ़ते रहना ही सबसे बेहतर विकल्प है।
क्या है ‘Candidate Ghosting’?
भर्ती विशेषज्ञों के अनुसार, Candidate Ghosting उस स्थिति को कहा जाता है जब इंटरव्यू या चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी उम्मीदवार को उसके आवेदन की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं देती।
इससे उम्मीदवारों को न केवल मानसिक तनाव होता है, बल्कि कई बार वे दूसरे नौकरी के अवसर भी गंवा देते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि कंपनियों को चयन हो या अस्वीकृति, दोनों ही स्थितियों में उम्मीदवार को समय पर सूचना देना पेशेवर और पारदर्शी हायरिंग प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए।
निष्कर्ष
सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस पोस्ट ने एक बार फिर हायरिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और बेहतर संवाद की जरूरत पर बहस छेड़ दी है। उम्मीदवारों का कहना है कि यदि कंपनियां समय पर स्पष्ट जवाब दें, तो इससे दोनों पक्षों का समय बचेगा और भर्ती प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बन सकेगी। वहीं, विशेषज्ञ भी मानते हैं कि किसी संगठन की कार्य संस्कृति की पहली झलक उसकी भर्ती प्रक्रिया से ही दिखाई देती है।


