भारत के शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली। अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दिनभर दबाव में कारोबार करते रहे। इंट्राडे में सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 23,800 के करीब पहुंच गया।
इस बिकवाली का असर केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेज कमजोरी देखने को मिली। दिनभर की गिरावट के चलते बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹3.02 लाख करोड़ घट गया, जिससे निवेशकों की संपत्ति में बड़ी गिरावट दर्ज हुई।
लगातार चौथे दिन लाल निशान में बंद हुआ बाजार

सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी वाले दिन बाजार की शुरुआत कमजोर रही और दिनभर बिकवाली का दबाव बना रहा।
- BSE Sensex 363.66 अंक (0.47%) गिरकर 76,391.39 पर बंद हुआ।
- Nifty 50 126.65 अंक (0.53%) टूटकर 23,869.60 पर बंद हुआ।
इंट्राडे कारोबार के दौरान सेंसेक्स 603.07 अंक टूटकर 76,151.98 तक पहुंच गया था, जबकि निफ्टी 189 अंक फिसलकर 23,807.20 के स्तर तक आ गया था।
निवेशकों के ₹3.02 लाख करोड़ स्वाहा
बाजार में आई इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों की दौलत पर पड़ा।
- 22 जुलाई 2026 को बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹4,79,87,102.05 करोड़ था।
- 23 जुलाई 2026 को यह घटकर ₹4,76,84,616 करोड़ (लगभग) रह गया।
इस तरह एक ही कारोबारी दिन में निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग ₹3.02 लाख करोड़ की गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिका-ईरान तनाव और महंगा कच्चा तेल बना बड़ी वजह

विश्लेषकों के अनुसार बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव रहा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय होती हैं क्योंकि इससे महंगाई, चालू खाते का घाटा और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। यही कारण रहा कि निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाई।
किन सेक्टर्स ने बाजार पर बनाया दबाव?
सेक्टर आधारित प्रदर्शन में आज मिला-जुला रुख देखने को मिला।
सबसे बेहतर प्रदर्शन
- निफ्टी ऑटो इंडेक्स 0.5% से अधिक चढ़कर बंद हुआ।
- ऑटो कंपनियों में खरीदारी ने बाजार को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की।
सबसे कमजोर सेक्टर्स
- निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 1.5% से ज्यादा टूटा।
- निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स करीब 1% गिरा।
- निफ्टी मेटल और प्राइवेट बैंक इंडेक्स भी आधा फीसदी से अधिक कमजोर रहे।
इसके अलावा निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों सूचकांक लगभग 1% की गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे व्यापक बाजार में कमजोरी साफ दिखाई दी।
सेंसेक्स के सिर्फ 11 शेयर हरे निशान में
30 शेयरों वाले सेंसेक्स में केवल 11 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए जबकि 19 शेयर गिरावट में रहे।
सबसे ज्यादा बढ़ने वाले शेयर
- महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M)
- टीसीएस
- एटर्नल (पूर्व में Zomato)
सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर
- अदाणी पोर्ट्स
- बजाज फाइनेंस
- इंडिगो
बाजार की चौड़ाई भी रही कमजोर
बीएसई पर गुरुवार को कुल 4,391 शेयरों में कारोबार हुआ।
- बढ़ने वाले शेयर: 1,637
- गिरने वाले शेयर: 2,585
- बिना बदलाव वाले शेयर: 169
इसके अलावा,
- 96 शेयर अपने 52 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचे।
- 96 शेयर 52 सप्ताह के निचले स्तर पर फिसल गए।
- 7 शेयर अपर सर्किट में रहे।
- 10 शेयर लोअर सर्किट पर बंद हुए।
यह आंकड़े बताते हैं कि बिकवाली केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे बाजार में दबाव देखने को मिला।
आगे बाजार की दिशा किन बातों पर रहेगी निर्भर?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कई अहम फैक्टर्स पर रहेगी।
- अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम
- ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीद-बिक्री
- कंपनियों के जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे
- वैश्विक बाजारों और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का असर
यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है और वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो घरेलू शेयर बाजार में निकट अवधि तक उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। NewsJagran किसी भी शेयर में खरीद या बिक्री की सलाह नहीं देता।


