नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने दक्षिण पूर्व रेलवे के व्यस्त रेल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन से मिदनापुर के बीच 14.52 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन बिछाने की 440 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना का उद्देश्य हाई-डेंसिटी रेल मार्ग पर बढ़ते यात्री और माल यातायात के दबाव को कम करना, परिचालन क्षमता बढ़ाना और रेलवे नेटवर्क को अधिक दक्ष बनाना है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना भारतीय रेलवे की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों पर अतिरिक्त ट्रैक बिछाकर नेटवर्क क्षमता का विस्तार किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद इस कॉरिडोर पर मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुचारु और तेज हो सकेगी।
हर साल 3.52 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई होगी संभव
रेलवे के आधिकारिक बयान के मुताबिक, तीसरी रेल लाइन तैयार होने के बाद इस मार्ग पर हर वर्ष लगभग 3.52 मिलियन टन (एमटीपीए) अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी। इससे उद्योगों, व्यापारिक गतिविधियों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला को बड़ा फायदा मिलेगा।
यह परियोजना विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जहां भारी मात्रा में खनिज और औद्योगिक उत्पादों का परिवहन रेल मार्ग के जरिए किया जाता है।
हाई यूटिलाइजेशन नेटवर्क (HUN-2) का महत्वपूर्ण हिस्सा
निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन से मिदनापुर का यह रेल खंड हाई यूटिलाइजेशन नेटवर्क (HUN-2) का हिस्सा है। वर्तमान में निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन से गोकुलपुर तक का सेक्शन सिंगल लाइन पर संचालित हो रहा है, जबकि डबलिंग का कार्य पहले से जारी है।
तीसरी लाइन जुड़ने के बाद इस रणनीतिक रेल मार्ग की परिचालन क्षमता और लचीलापन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे ट्रेनों के संचालन में होने वाली देरी भी कम होने की उम्मीद है।
इन प्रमुख वस्तुओं की होती है बड़े पैमाने पर ढुलाई
यह रेल मार्ग पूर्वी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस रूट के माध्यम से कई अहम वस्तुओं का परिवहन किया जाता है, जिनमें शामिल हैं:
- मैंगनीज
- लौह अयस्क
- कंटेनर
- कोयला
- क्लिंकर
- पेलेट आयरन
- लोहा और इस्पात
- गेहूं
- चावल
- पत्थर
- रेलवे स्लीपर
- स्लैग
- नमक
- पेट्रोलियम उत्पाद
- चूना पत्थर
- जिप्सम
- उर्वरक
- खाद्य तेल
- केमिकल सॉल्ट
- चारकोल
- सीमेंट
- बैलेस्ट
- राख
फिलहाल इस रेल कॉरिडोर के जरिए करीब 23.80 मिलियन टन प्रतिवर्ष माल ढुलाई की जा रही है।
115% से अधिक क्षमता पर चल रहा है यह रेल मार्ग
रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, इस सेक्शन की लाइन क्षमता का उपयोग 115.71 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इसका अर्थ है कि यह मार्ग अपनी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक ट्रैफिक संभाल रहा है, जिससे ट्रेनों के संचालन में देरी और भीड़भाड़ जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
तीसरी रेल लाइन बनने से अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होगा, जिससे ट्रेनों की आवाजाही बेहतर तरीके से प्रबंधित की जा सकेगी और परिचालन संबंधी बाधाएं कम होंगी।
उद्योगों और कारोबार को मिलेगा सीधा लाभ
रेल मंत्रालय का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद:
- आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति तेज होगी।
- मालगाड़ियों की समयबद्ध आवाजाही सुनिश्चित होगी।
- यात्री ट्रेनों के संचालन में सुधार आएगा।
- रेलवे नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
- औद्योगिक क्षेत्रों और कारोबारों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी।
- लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में भी मदद मिलेगी।
रेलवे का दीर्घकालिक लक्ष्य
भारतीय रेलवे लगातार हाई-डेंसिटी रेल कॉरिडोर पर क्षमता विस्तार की दिशा में काम कर रहा है। तीसरी और चौथी रेल लाइनों का निर्माण, ट्रैक आधुनिकीकरण और नेटवर्क विस्तार जैसी परियोजनाएं इसी रणनीति का हिस्सा हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य बढ़ती यात्री और माल परिवहन की मांग को पूरा करना, ट्रेनों की गति बढ़ाना और देश के आर्थिक विकास को मजबूत रेल अवसंरचना के माध्यम से गति देना है।


