Delhi-Dehradun Expressway News: करीब ₹12,000 करोड़ की लागत से बने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के कुछ महीनों बाद गड्ढे मिलने का मामला संसद तक पहुंच गया। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में बताया कि एक्सप्रेसवे पर मिले गड्ढों की मरम्मत सरकार के खजाने से नहीं, बल्कि निर्माण कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी के तहत अपने खर्च पर कराई है।
सरकार ने संसद में स्वीकार किया कि नए बने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर दो जगह गड्ढे पाए गए थे। हालांकि, इनकी मरम्मत के लिए किसी तरह का अतिरिक्त सरकारी फंड जारी नहीं किया गया। ठेकेदार कंपनी ने डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (Defect Liability Period) के तहत इनकी मरम्मत की।
वायरल वीडियो के बाद उठे थे सड़क की गुणवत्ता पर सवाल
Delhi-Dehradun Expressway constructed at a cost of ₹ 1,20,00,00,00,000
Inaugurated by PM Modi on 14 April 2026. pic.twitter.com/NUzq9AeDpE
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) July 2, 2026 दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने का मामला उस समय चर्चा में आया था, जब उत्तर प्रदेश के शामली इलाके के पास सड़क के एक हिस्से में गड्ढा दिखाई देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
वीडियो में सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त नजर आने के बाद एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे। इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर कुछ ही महीनों में ऐसी समस्या सामने आने से विपक्ष ने भी सरकार से जवाब मांगा था।
संसद में नितिन गडकरी ने क्या कहा?
राज्यसभा सांसद अशोक सिंह के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे 10 साल की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि के अंतर्गत आता है।
इसका मतलब है कि अगर निर्माण कार्य में कोई तकनीकी कमी, खराबी या डिजाइन से जुड़ी समस्या सामने आती है तो उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होती है।
गडकरी ने कहा कि एक्सप्रेसवे पर दो गड्ढों की पहचान की गई थी और उन्हें निर्माण कंपनी ने अपने खर्च पर ठीक कराया। इसके लिए सरकार को कोई अतिरिक्त पैसा खर्च नहीं करना पड़ा।
हालांकि, मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये वही गड्ढे थे या नहीं, जिनका वीडियो शामली के पास वायरल हुआ था। इसके अलावा सड़क धंसने की वास्तविक वजह भी संसद में विस्तार से नहीं बताई गई।
क्या होता है डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड?
डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड किसी भी बड़े निर्माण प्रोजेक्ट में एक तय अवधि होती है, जिसमें निर्माण कंपनी को अपनी बनाई संरचना की गुणवत्ता बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है।
अगर इस अवधि में सड़क, पुल या अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर में कोई खराबी आती है तो ठेकेदार को बिना अतिरिक्त सरकारी भुगतान के उसे ठीक करना पड़ता है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के मामले में भी इसी नियम के तहत मरम्मत का काम कराया गया।
NHAI ने बताई सड़क धंसने की वजह
इससे पहले नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने सड़क धंसने की घटना पर सफाई देते हुए कहा था कि यह समस्या निर्माण सामग्री की खराब गुणवत्ता के कारण नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर पानी जमा होने की वजह से हुई थी।
NHAI के अनुसार, बारिश के पानी की निकासी के लिए वहां बैलेंसिंग कल्वर्ट (Balancing Culvert) बनाया गया था। लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा इसके मुहाने का इस्तेमाल वाहन निकालने के रास्ते के तौर पर किया जाने लगा, जिससे ड्रेनेज सिस्टम पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाया।
इसके कारण पानी जमा हुआ और सड़क का एक हिस्सा प्रभावित हुआ।
अप्रैल 2026 में हुआ था एक्सप्रेसवे का उद्घाटन
करीब ₹12,000 करोड़ की लागत से बने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2026 में किया था।
यह देश के प्रमुख ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसका उद्देश्य दिल्ली से देहरादून के बीच यात्रा समय को लगभग 6 घंटे से घटाकर करीब 2.5 घंटे करना है।
एक्सप्रेसवे शुरू होने से उत्तराखंड जाने वाले यात्रियों, पर्यटन उद्योग और व्यापार को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
निर्माण गुणवत्ता को लेकर फिर उठे सवाल
हालांकि, उद्घाटन के कुछ महीनों बाद सड़क पर गड्ढे और धंसने की घटनाओं ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकार का कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट के नियमों के अनुसार निर्माण कंपनियों को जवाबदेह बनाया जा रहा है और जहां भी खामियां मिलेंगी, उन्हें ठेकेदारों की जिम्मेदारी के तहत ठीक कराया जाएगा।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे देश के सबसे अहम सड़क प्रोजेक्ट्स में से एक है, इसलिए इसकी गुणवत्ता और रखरखाव पर आने वाले समय में भी नजर बनी रहेगी।


