Retirement Planning: नौकरी के दौरान हर महीने मिलने वाली सैलरी घर के खर्च को संभालने का सबसे बड़ा सहारा होती है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद नियमित वेतन बंद हो जाता है और जमा पूंजी से ही रोजमर्रा के खर्च, मेडिकल जरूरतों और अचानक आने वाले बड़े खर्चों को मैनेज करना पड़ता है। ऐसे में रिटायरमेंट फंड को इस तरह निवेश करना जरूरी हो जाता है, जिससे पैसा अपेक्षाकृत सुरक्षित रहे और नियमित आमदनी का स्रोत भी बना रहे।
रिटायरमेंट के बाद पूरी रकम को एक ही जगह निवेश करने के बजाय अलग-अलग विकल्पों में बांटना एक व्यावहारिक रणनीति हो सकती है। Senior Citizens Savings Scheme (SCSS), Post Office Monthly Income Scheme (MIS), Bank FD, RBI Floating Rate Savings Bonds और Annuity Plan जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, हर स्कीम के नियम, ब्याज दर, लॉक-इन और टैक्स का असर अलग होता है।
1. Senior Citizens Savings Scheme यानी SCSS
रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित निवेश की बात आती है तो Senior Citizens Savings Scheme (SCSS) एक प्रमुख विकल्प है। इसमें एकमुश्त रकम निवेश की जाती है और ब्याज का भुगतान तिमाही आधार पर होता है।
दिए गए उदाहरण के मुताबिक, अगर SCSS में ₹30 लाख निवेश किए जाएं और ब्याज दर 8.2% सालाना हो, तो एक साल में करीब ₹2.46 लाख ब्याज बनता है। यानी हर तिमाही लगभग ₹61,500 की ब्याज आय हो सकती है।
इस तरह की नियमित तिमाही आय रिटायरमेंट के बाद घर के खर्च को मैनेज करने में मदद कर सकती है। हालांकि, निवेश करने से पहले मौजूदा ब्याज दर, अधिकतम निवेश सीमा और योजना के नियम जरूर जांचने चाहिए।
2. Post Office Monthly Income Scheme
अगर रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित आमदनी चाहिए, तो Post Office Monthly Income Scheme यानी MIS पर भी विचार किया जा सकता है।
इस योजना में एकमुश्त रकम जमा करने के बाद ब्याज का भुगतान हर महीने किया जाता है। दिए गए उदाहरण में ब्याज दर 7.4% सालाना मानें और ₹10 लाख निवेश करें, तो सालाना ब्याज करीब ₹74,000 होगा।
यानी मासिक आधार पर लगभग ₹6,167 की आय बन सकती है। यह रकम बहुत बड़ी न हो, लेकिन पेंशन या दूसरी आय के साथ मिलकर रोजमर्रा के खर्च में योगदान दे सकती है।
यहां भी निवेश से पहले मौजूदा ब्याज दर और योजना की निवेश सीमा की पुष्टि करना जरूरी है।
3. Bank FD
Bank Fixed Deposit यानी FD रिटायरमेंट के बाद निवेश के सबसे आसान और लोकप्रिय विकल्पों में से एक है। इसमें निवेशक पहले से तय ब्याज दर के आधार पर रिटर्न प्राप्त कर सकता है।
उदाहरण के लिए अगर किसी FD पर 7% सालाना ब्याज मिलता है और ₹10 लाख जमा किए जाते हैं, तो एक साल में करीब ₹70,000 ब्याज बन सकता है।
FD का एक फायदा यह है कि जरूरत के मुताबिक अलग-अलग अवधि की FD बनाई जा सकती है। उदाहरण के लिए पूरी रकम को एक ही FD में रखने के बजाय अलग-अलग समय अवधि वाली FD में बांटा जा सकता है। इसे आम तौर पर FD Laddering की रणनीति कहा जाता है।
इससे जरूरत पड़ने पर पूरी जमा राशि तोड़ने की बजाय केवल एक FD का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, समय से पहले FD तोड़ने पर मिलने वाले ब्याज और संभावित पेनल्टी के नियम बैंक के अनुसार अलग हो सकते हैं।
4. RBI Floating Rate Savings Bonds
सरकारी समर्थित निवेश विकल्प तलाश रहे निवेशकों के लिए RBI Floating Rate Savings Bonds भी एक विकल्प हो सकता है।
जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इसमें ब्याज दर फिक्स नहीं रहती और समय के साथ बदल सकती है। इसलिए निवेशक को यह समझना जरूरी है कि भविष्य में मिलने वाली ब्याज आय मौजूदा दर के समान रहना जरूरी नहीं है।
यह विकल्प उन निवेशकों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें तत्काल रकम की जरूरत नहीं है और वे अपेक्षाकृत लंबी अवधि के लिए पैसा रखना चाहते हैं।
हालांकि, निवेश करने से पहले ब्याज भुगतान, मैच्योरिटी अवधि और निकासी से जुड़े नियम जरूर समझ लेने चाहिए।
5. Annuity Plan
रिटायरमेंट के बाद अगर आपको पेंशन जैसी नियमित आय चाहिए, तो Annuity Plan पर भी विचार किया जा सकता है।
इसमें निवेशक एकमुश्त रकम लगाता है और चुने गए प्लान की शर्तों के अनुसार नियमित अंतराल पर भुगतान प्राप्त करता है। यह भुगतान मासिक, तिमाही या अन्य निर्धारित अंतराल पर हो सकता है।
उदाहरण के तौर पर, अगर रिटायरमेंट फंड का कुछ हिस्सा एन्युटी में लगाया जाता है, तो उससे मिलने वाली नियमित रकम को पेंशन या दूसरे आय स्रोतों के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
लेकिन एन्युटी खरीदने से पहले रिटर्न, भुगतान विकल्प, सरेंडर नियम और मृत्यु के बाद मिलने वाले लाभ जैसी शर्तों को अच्छी तरह समझना जरूरी है।
₹30 लाख का रिटायरमेंट फंड हो तो कैसे बांट सकते हैं पैसा?
मान लीजिए रिटायरमेंट के समय आपके पास ₹30 लाख की कुल रकम है। ऐसे में पूरी पूंजी को एक ही निवेश विकल्प में लगाने के बजाय अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से बांटने का उदाहरण इस तरह समझा जा सकता है:
| निवेश विकल्प | निवेश राशि | उदाहरण के तौर पर सालाना ब्याज/आय |
|---|---|---|
| SCSS | ₹15 लाख | करीब ₹1,23,000 |
| Post Office MIS | ₹5 लाख | करीब ₹37,000 |
| Bank FD | ₹5 लाख | करीब ₹35,000* |
| नकद/लिक्विड फंड | ₹5 लाख | जरूरत के अनुसार |
*FD में उदाहरण के लिए 7% सालाना ब्याज माना गया है।
इस उदाहरण में ₹15 लाख SCSS में लगाने पर 8.2% की दर के हिसाब से करीब ₹1.23 लाख सालाना, यानी लगभग ₹30,750 प्रति तिमाही ब्याज बन सकता है।
वहीं ₹5 लाख MIS में 7.4% की उदाहरण दर से करीब ₹37,000 सालाना, यानी लगभग ₹3,083 प्रति माह की आय बन सकती है।
₹5 लाख की FD पर 7% की उदाहरण दर से लगभग ₹35,000 सालाना ब्याज बन सकता है। बाकी ₹5 लाख को तत्काल जरूरतों और आपातकालीन खर्च के लिए अलग रखा जा सकता है।
यह सिर्फ एक उदाहरणात्मक पोर्टफोलियो है। वास्तविक निवेश व्यक्ति की उम्र, मासिक खर्च, पेंशन, अन्य आय, टैक्स स्थिति, जोखिम क्षमता और भविष्य की जरूरतों के आधार पर अलग हो सकता है।
रिटायरमेंट के बाद सिर्फ ज्यादा ब्याज के पीछे न भागें
रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे ज्यादा ब्याज देने वाला विकल्प चुनना ही हमेशा सही रणनीति नहीं होती। इस चरण में पूंजी की सुरक्षा, नियमित कैश फ्लो और जरूरत पड़ने पर पैसे की उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
मसलन, कुछ पैसा नियमित आय देने वाले विकल्प में रखा जा सकता है, कुछ सुरक्षित और लंबी अवधि के निवेश में तथा एक हिस्सा आपातकालीन जरूरतों के लिए आसानी से उपलब्ध रखा जा सकता है।
इसके अलावा निवेश से मिलने वाली ब्याज आय पर टैक्स का असर भी ध्यान में रखना चाहिए। सीनियर सिटिजंस के लिए उपलब्ध टैक्स नियमों और छूट की पात्रता भी निवेश निर्णय को प्रभावित कर सकती है।
निष्कर्ष
रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है कि जमा पूंजी को सोच-समझकर इस्तेमाल किया जाए। SCSS, Post Office MIS, Bank FD, RBI Floating Rate Savings Bonds और Annuity जैसे विकल्प अलग-अलग जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
हालांकि, किसी एक स्कीम को सभी लोगों के लिए सबसे बेहतर नहीं माना जा सकता। निवेश करने से पहले योजना की मौजूदा ब्याज दर, नियम, टैक्स प्रभाव, लॉक-इन अवधि और निकासी की शर्तों की जांच करना जरूरी है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए आंकड़े उदाहरण के तौर पर इस्तेमाल किए गए हैं और ब्याज दरें समय के साथ बदल सकती हैं। किसी भी निवेश, टैक्स, बीमा या अन्य वित्तीय निर्णय से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी विशेष वित्तीय उत्पाद या योजना में निवेश की सिफारिश नहीं करता।


