विदेशी शेयर बाजारों में निवेश करना अब भारतीय निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। खासकर अमेरिका के अलावा दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में भी बड़ी संख्या में भारतीय निवेशक ट्रेडिंग और निवेश कर रहे हैं। इंटरनेशनल पोर्टफोलियो बनाने से निवेश में विविधता (Diversification) मिलती है, लेकिन इसके साथ टैक्स नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है।
अगर आप भारत के निवासी (Resident Taxpayer) हैं, तो विदेश से होने वाली आपकी आय भी भारतीय आयकर कानून के दायरे में आती है। ऐसे में विदेशी शेयरों से हुए कैपिटल गेन, डिविडेंड या ओवरसीज इंट्राडे ट्रेडिंग से हुई कमाई की सही जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में देना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर जुर्माना और नोटिस जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
भारत में विदेशी शेयरों पर कैसे लगता है टैक्स?
भारतीय आयकर नियमों के अनुसार विदेशी स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध शेयरों को भारतीय कानून के तहत Unlisted Securities माना जाता है। इसलिए इन पर टैक्स के नियम घरेलू सूचीबद्ध शेयरों से अलग होते हैं।
1. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG)
यदि आपने विदेशी शेयरों को 24 महीने से अधिक समय तक होल्ड किया है, तो बिक्री पर होने वाले लाभ को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा।
- 24 महीने से अधिक होल्डिंग पर LTCG लागू
- 12.5% की फ्लैट टैक्स दर
- इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता
2. शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG)
यदि विदेशी शेयर 24 महीने से पहले बेच दिए जाते हैं, तो होने वाला लाभ शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा।
- लाभ आपकी कुल आय में जुड़ता है
- टैक्स आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार लगता है
विदेशी इंट्राडे ट्रेडिंग पर क्या नियम हैं?
अगर आपने विदेशी बाजारों में इंट्राडे ट्रेडिंग की है और शेयरों की डिलीवरी नहीं ली है, तो इसे Capital Gain नहीं बल्कि Business Income माना जाता है।
ऐसी स्थिति में—
- कमाई पर आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।
- ट्रेडिंग में हुए नुकसान को आयकर नियमों के अनुसार सेट-ऑफ या अगले वर्षों में कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है।
करेंसी कन्वर्जन का भी पड़ता है असर
विदेशी शेयर खरीदते और बेचते समय लेनदेन विदेशी मुद्रा में होता है। टैक्स की गणना करते समय खरीद और बिक्री की राशि को RBI या निर्धारित एक्सचेंज रेट के अनुसार भारतीय रुपये में बदला जाता है।
इस वजह से डॉलर, वॉन या अन्य विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव का असर भी टैक्स की गणना पर पड़ सकता है।
ITR में कौन-कौन से शेड्यूल भरना जरूरी है?
विदेशी निवेश करने वाले भारतीय करदाताओं को ITR दाखिल करते समय कुछ विशेष शेड्यूल भरने होते हैं।
Schedule FA (Foreign Assets)
यदि आप Resident and Ordinarily Resident (ROR) हैं, तो आपको अपने—
- विदेशी ब्रोकरेज अकाउंट
- विदेशी शेयर
- अन्य विदेशी संपत्तियों
की जानकारी Schedule FA में देनी होती है, चाहे उनसे कोई आय हुई हो या नहीं।
Schedule FSI (Foreign Source Income)
यदि विदेशी शेयरों से—
- डिविडेंड मिला हो
- कैपिटल गेन हुआ हो
- अन्य विदेशी आय प्राप्त हुई हो
तो उसकी जानकारी Schedule FSI में दर्ज करनी होती है।
दोहरा टैक्स देने से कैसे बचें?
कई बार विदेशी देश में शेयर बेचने या डिविडेंड मिलने पर पहले ही टैक्स काट लिया जाता है। ऐसे मामलों में भारत में दोबारा पूरा टैक्स देने की जरूरत नहीं होती।
Foreign Tax Credit (FTC)
यदि विदेश में टैक्स कट चुका है तो भारत में Foreign Tax Credit (FTC) का दावा किया जा सकता है।
DTAA का लाभ
भारत ने कई देशों के साथ Double Taxation Avoidance Agreement (DTAA) किया हुआ है। इसके तहत योग्य करदाता दोहरे कराधान से राहत प्राप्त कर सकते हैं।
Form 67 भरना जरूरी
Foreign Tax Credit का दावा करने के लिए आयकर पोर्टल पर Form 67 ऑनलाइन भरना अनिवार्य है।
इसमें आपको बताना होता है—
- विदेश में कितनी आय हुई
- कितना टैक्स जमा किया गया
- टैक्स भुगतान के दस्तावेज
Schedule TR
FTC का लाभ लेने के लिए केवल Form 67 ही नहीं बल्कि ITR में Schedule TR (Tax Relief) भी भरना होता है।
ध्यान रखें कि मिलने वाला टैक्स क्रेडिट विदेश में चुकाए गए टैक्स या भारत में उस आय पर बनने वाले टैक्स, दोनों में जो कम होगा, उसी तक सीमित रहेगा।
जरूरी दस्तावेज संभालकर रखें
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार अब विभिन्न देशों के टैक्स विभागों के बीच डेटा साझा करने की व्यवस्था पहले से अधिक पारदर्शी हो गई है। इसलिए विदेशी निवेश करने वाले निवेशकों को निम्न दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए—
- विदेशी ब्रोकरेज स्टेटमेंट
- टैक्स डिडक्शन का प्रमाण
- टैक्स पेमेंट रसीद
- टैक्स असेसमेंट ऑर्डर
- Form 67 की कॉपी
इन दस्तावेजों की मदद से जरूरत पड़ने पर FTC का दावा करना आसान होता है और भविष्य में आयकर विभाग की किसी भी पूछताछ या नोटिस से बचा जा सकता है।
निष्कर्ष
विदेशी शेयरों में निवेश भारतीय निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न और वैश्विक विविधता का अवसर देता है, लेकिन इसके साथ टैक्स नियमों का सही पालन करना भी बेहद जरूरी है। चाहे आपने अमेरिका, दक्षिण कोरिया, ताइवान या किसी अन्य विदेशी बाजार में निवेश किया हो, विदेशी आय और संपत्तियों की पूरी जानकारी ITR में सही शेड्यूल के तहत देना अनिवार्य है। यदि विदेश में पहले ही टैक्स चुका चुके हैं तो Form 67 और Foreign Tax Credit के जरिए दोहरे टैक्स से राहत भी प्राप्त की जा सकती है।


