Maharashtra Urban Challenge Fund: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 423 शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies) के विकास के लिए ₹44,800 करोड़ के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य शहरों में सड़क, जलापूर्ति, स्वच्छता, ट्रैफिक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं को गति देना है। सरकार का दावा है कि यह पहल महाराष्ट्र के शहरों को आधुनिक, आत्मनिर्भर और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाएगी।
2025-26 से 2030-31 तक चलेगा मिशन
उप मुख्यमंत्री एवं नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने बताया कि यह योजना वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगी। आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि को तीन वर्ष तक बढ़ाने का भी प्रावधान रखा गया है। सरकार का लक्ष्य सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना नहीं, बल्कि शहरों की आर्थिक क्षमता बढ़ाकर उन्हें निवेश और रोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित करना है।
कैसे जुटाए जाएंगे ₹44,800 करोड़?
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका ब्लेंडेड फाइनेंसिंग मॉडल है। यानी परियोजनाओं के लिए धन केवल सरकार नहीं देगी, बल्कि कई स्रोतों से फंड जुटाया जाएगा।
फंडिंग का मॉडल इस प्रकार होगा:
- पात्र परियोजनाओं को केंद्र सरकार से 25% तक सहायता मिल सकती है।
- कुल परियोजना लागत का कम से कम 50% हिस्सा म्यूनिसिपल बॉन्ड, बैंक लोन या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के जरिए जुटाया जाएगा।
- शेष 25% राशि राज्य सरकार या संबंधित शहरी निकाय उपलब्ध कराएंगे।
इस मॉडल का उद्देश्य सरकारी खजाने पर दबाव कम करते हुए बड़े पैमाने पर शहरी विकास परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना है।
छोटे शहरों को भी मिलेगा बड़ा फायदा
सरकार ने साफ किया है कि यह योजना केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगी। 1 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए विशेष लोन रीपेमेंट गारंटी मैकेनिज्म बनाया जाएगा।
इससे छोटी नगरपालिकाओं को:
- वित्तीय संस्थानों से आसानी से ऋण मिलेगा।
- बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू करने में मदद मिलेगी।
- म्यूनिसिपल बॉन्ड जैसे वित्तीय विकल्पों का उपयोग करने का अवसर मिलेगा।
इन तीन बड़े क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
अर्बन चैलेंज फंड के तहत परियोजनाओं का चयन मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में किया जाएगा।
1. जलापूर्ति और स्वच्छता
- सुरक्षित पेयजल
- सीवरेज नेटवर्क
- स्वच्छता सुविधाओं का विस्तार
2. आधुनिक शहरी विकास
- स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर
- डिजिटल गवर्नेंस
- बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं
3. आर्थिक विकास
- शहरों को निवेश और रोजगार का केंद्र बनाना
- व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देना
- बेहतर कनेक्टिविटी और शहरी सुविधाएं
किन परियोजनाओं को मिलेगी फंडिंग?
योजना के तहत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शामिल किए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- डिजिटल गवर्नेंस और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड
- ट्रैफिक जाम कम करने और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी परियोजनाएं
- पुराने बाजारों और शहरी क्षेत्रों का पुनर्विकास
- नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट (साइकिल ट्रैक, पैदल मार्ग)
- ट्रांजिट हब और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट
- शहरी बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं
- इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम
- नई सड़कें और फ्लाईओवर
- रिवरफ्रंट डेवलपमेंट
- ग्रीनफील्ड एवं सेमी-ग्रीनफील्ड टाउनशिप
- लैंड बैंक तैयार करना
- शहरी क्षेत्रों से डेयरी गतिविधियों का स्थानांतरण
बड़े शहरों के लिए होंगी विशेष सुविधाएं
20 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए सरकार अतिरिक्त सुविधाओं पर भी निवेश करेगी। इनमें शामिल हैं:
- कन्वेंशन सेंटर
- आधुनिक मनोरंजन केंद्र
- पब्लिक लाइब्रेरी
- स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर
- वॉटर स्पोर्ट्स सुविधाएं
- वेलनेस पार्क
- ध्यान एवं योग केंद्र
इन परियोजनाओं का उद्देश्य बड़े शहरों को वैश्विक स्तर की सुविधाओं से लैस करना है।
परियोजनाओं की निगरानी कैसे होगी?
सरकार ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था तैयार की है।
इसके तहत:
- प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एवं मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स नियुक्त किए जाएंगे।
- प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) बनाई जाएगी।
- जिला स्तर पर निगरानी समितियां गठित होंगी।
- प्रत्येक शहर में मिशन मैनेजमेंट सेल स्थापित किया जाएगा।
- आवश्यकता होने पर स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के माध्यम से परियोजनाओं को लागू किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य परियोजनाओं को समय पर, पारदर्शी और गुणवत्ता के साथ पूरा करना है।
नागरिकों को क्या होगा फायदा?
सरकार के अनुसार इस योजना से:
- शहरों में बेहतर सड़क और ट्रैफिक व्यवस्था विकसित होगी।
- जलापूर्ति और स्वच्छता सेवाओं में सुधार आएगा।
- डिजिटल और स्मार्ट सिटी सुविधाएं बढ़ेंगी।
- निजी निवेश आकर्षित होगा।
- रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- शहरों की आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
- नागरिकों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा।
उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड केवल एक फंडिंग योजना नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के शहरों के व्यापक कायाकल्प का रोडमैप है। इसका उद्देश्य राज्य में प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर शहर विकसित करना है।


