Market Insight: भारतीय शेयर बाजार में लगातार बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशकों की चिंता भी बढ़ गई है। कमजोर शुरुआत के बाद बाजार में रिकवरी की कोशिश जरूर दिखी, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव बना हुआ है। इस बीच CNBC-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल का मानना है कि मौजूदा बाजार केवल एकतरफा तेजी का नहीं, बल्कि दोनों तरफ ट्रेडिंग के अवसर देने वाला है। उनका साफ कहना है कि “अगर शॉर्ट नहीं कर सकते तो ये बाजार आपके लिए नहीं है।”
निफ्टी फिलहाल 23,800-24,300 की रेंज में कारोबार करता नजर आ रहा है, जबकि बैंक निफ्टी के लिए 56,600-56,800 का स्तर सबसे अहम माना जा रहा है।
कमजोर शुरुआत के बाद रिकवरी, लेकिन खतरा अभी टला नहीं
बाजार ने दिन की शुरुआत कमजोरी के साथ की, हालांकि निचले स्तरों से निफ्टी में 100 अंकों से ज्यादा की रिकवरी देखने को मिली और यह 23,980 के आसपास पहुंच गया। बैंक निफ्टी भी करीब 250 अंक संभला, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली जारी रही।
अनुज सिंघल के अनुसार, पिछले दो हफ्तों से निफ्टी एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। पिछले शुक्रवार को मिला ब्रेकआउट टिक नहीं पाया और अब बाजार रेंज के निचले स्तर की ओर बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जैसे ब्रेकआउट फेल हुआ था, वैसे ही ब्रेकडाउन भी फेल हो सकता है।
US-ईरान तनाव और कच्चा तेल बढ़ा रहे चिंता
बाजार पर इस समय सबसे बड़ा दबाव वैश्विक घटनाक्रम का है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। आशंका है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।
हालांकि सकारात्मक बात यह है कि मार्च जैसी घबराहट वाली बिकवाली इस बार देखने को नहीं मिल रही है। कच्चे तेल से जुड़े शेयरों में भी अभी बड़ी कमजोरी नहीं आई है। इसके साथ ही India VIX का 14.5 स्तर भी बाजार की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है।
बैंकिंग सेक्टर बना बाजार की सबसे बड़ी कमजोरी
अनुज सिंघल के मुताबिक, मौजूदा गिरावट में सबसे बड़ा दबाव बैंकिंग सेक्टर से आ रहा है।
- HDFC Bank कमजोर नतीजों के बाद 52 सप्ताह के निचले स्तर के करीब पहुंच गया है।
- ICICI Bank के अच्छे नतीजों के बावजूद शेयर में मजबूत तेजी नहीं दिखी।
- SBI में नतीजों से पहले की चिंता और SBI Funds की फीकी लिस्टिंग का असर देखने को मिला।
इसके अलावा डॉलर-रुपया, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल जैसी मैक्रो आर्थिक परिस्थितियां भी फिलहाल बाजार के लिए नकारात्मक बनी हुई हैं।
IT सेक्टर की रैली फिर फेल
हाल के दिनों में आईटी शेयरों में आई तेजी भी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई। AI थीम के दम पर शुरू हुई खरीदारी कमजोर पड़ गई और निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।
अब बाजार की नजर Infosys के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यदि कंपनी का आउटलुक कमजोर रहा तो आईटी सेक्टर में एक और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं सकारात्मक कमेंट्री पूरे सेक्टर में नई तेजी ला सकती है।
फार्मा सेक्टर पर भी बढ़ा दबाव
फार्मा शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिल रही है। डॉ. रेड्डीज के कमजोर नतीजों और अमेरिकी चुनावी माहौल में दवा कंपनियों पर बढ़ती राजनीतिक टिप्पणियों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है।
इसके विपरीत ऑटो और FMCG सेक्टर अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।
बाजार में अब दोनों तरफ बनेंगे पैसे
अनुज सिंघल का कहना है कि यह बाजार केवल खरीदकर बैठने वालों के लिए नहीं है। मौजूदा माहौल में तेजी और गिरावट दोनों तरफ ट्रेडिंग के अवसर बन रहे हैं।
उनके अनुसार—
- केवल तेजी की सोच रखने वाले निवेशकों को नुकसान हो सकता है।
- रेंज के ऊपरी स्तर पर खरीदारी और निचले स्तर पर घबराकर बिकवाली से बचना चाहिए।
- अच्छे तिमाही नतीजे देने वाली कंपनियों को बाजार इनाम दे रहा है।
- वहीं खराब प्रदर्शन करने वाली कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है।
उन्होंने बजाज ऑटो का उदाहरण देते हुए कहा कि मजबूत नतीजों पर शेयर ने शानदार रिटर्न दिया, जबकि बंधन बैंक में कमजोर प्रतिक्रिया देखने को मिली।
निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस
अनुज सिंघल के अनुसार निफ्टी के लिए फिलहाल ये स्तर महत्वपूर्ण हैं—
सपोर्ट
- 23,800-23,850
सपोर्ट टूटने पर अगला लक्ष्य
- 23,600-23,700
रेजिस्टेंस
- 24,000-24,050
बड़ा रेजिस्टेंस
- 24,150-24,250
यदि 23,800 का स्तर कायम रहता है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है, लेकिन इसके नीचे फिसलने पर बिकवाली और तेज हो सकती है।
बैंक निफ्टी के लिए मेक या ब्रेक जोन
बैंक निफ्टी पर अनुज सिंघल की नजर 56,600-56,800 के स्तर पर है।
- 56,800 पर 50 DEMA मौजूद है।
- 56,600 पर 100 DEMA का सपोर्ट है।
यदि यह जोन टूटता है तो बैंक निफ्टी में 56,000 के नीचे जाने का जोखिम बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल बैंक निफ्टी की किसी भी रिकवरी पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। जब तक HDFC Bank, ICICI Bank या SBI जैसे बड़े बैंक नेतृत्व नहीं करते, तब तक बैंकिंग इंडेक्स पर दबाव बना रह सकता है।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो?
मौजूदा बाजार में जल्दबाजी से बचना सबसे जरूरी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि रेंज आधारित रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा। अच्छे कॉर्पोरेट नतीजों वाले शेयरों पर नजर रखें, जबकि कमजोर नतीजों वाली कंपनियों से दूरी बनाए रखें। साथ ही वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और इंडिया VIX पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश या ट्रेडिंग निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


