IHCL Share Price: टाटा ग्रुप की प्रमुख हॉस्पिटैलिटी कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) ने जून तिमाही में शानदार वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 18.5% बढ़कर 390 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसके बावजूद बुधवार के कारोबार में कंपनी के शेयरों में करीब 2% की गिरावट देखने को मिली। शेयरों पर दबाव की बड़ी वजह मुंबई पोर्ट अथॉरिटी द्वारा IHCL को टॉप डिफॉल्टर की सूची में शामिल किया जाना माना जा रहा है।
Highlights
- टाटा ग्रुप की होटल कंपनी IHCL के शेयर करीब 2% टूटे।
- जून तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 18.5% बढ़कर ₹390 करोड़ रहा।
- मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ने IHCL को टॉप डिफॉल्टर की सूची में रखा।
- लीज विवाद को लेकर अथॉरिटी और कंपनी के बीच लंबे समय से मामला जारी।
- कंपनी का दावा, वास्तविक देनदारी अथॉरिटी के दावे से काफी कम।
मुनाफा बढ़ा, फिर भी शेयर क्यों गिरा?
टाटा ग्रुप की होटल चेन ताज (Taj Hotels) संचालित करने वाली इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया। कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़कर 390 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में 18.5% अधिक है।
इसके बावजूद बाजार में निवेशकों का मूड कमजोर रहा और बीएसई पर IHCL का शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 2% गिरकर 718.70 रुपये तक पहुंच गया।
विश्लेषकों के अनुसार, शेयर में गिरावट की प्रमुख वजह कंपनी के खिलाफ सामने आया मुंबई पोर्ट अथॉरिटी का लीज विवाद है।
क्या है मुंबई पोर्ट अथॉरिटी का मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई पोर्ट अथॉरिटी (Mumbai Port Authority) ने IHCL को अपने टॉप डिफॉल्टर्स की सूची में शामिल किया है।
बताया गया है कि मुंबई के प्रतिष्ठित ताज महल पैलेस होटल जिस जमीन पर स्थित है, वह मुंबई पोर्ट अथॉरिटी से लीज पर ली गई थी। इस जमीन की मूल लीज साल 2001 में समाप्त हो चुकी थी।
इसके बाद से लीज के नवीनीकरण और संशोधित किराए को लेकर दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत और कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
₹1,874 करोड़ बनाम ₹163 करोड़ का विवाद
CareEdge Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2025 तक मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ने IHCL पर लगभग ₹1,874 करोड़ के बकाये का दावा किया है।
हालांकि, IHCL इस दावे से सहमत नहीं है।
कंपनी का कहना है कि उसकी वास्तविक देनदारी 163 करोड़ रुपये से अधिक नहीं बनती। यानी दोनों पक्षों के दावों में भारी अंतर है, जिसे लेकर विवाद जारी है।
मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ने ऐसे आठ बड़े डिफॉल्टर्स की सूची जारी की है, जिन पर कुल मिलाकर लगभग ₹3,500 करोड़ का किराया बकाया बताया गया है।
जून तिमाही में कैसा रहा कंपनी का प्रदर्शन?
वित्तीय नतीजों की बात करें तो IHCL ने एक बार फिर मजबूत परिचालन प्रदर्शन दिखाया।
मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:
- नेट प्रॉफिट: ₹390 करोड़
- सालाना वृद्धि: 18.5%
- स्टैंडअलोन रेवेन्यू: ₹1,298 करोड़
- 30 जून 2026 तक ग्रॉस कैश: ₹4,439 करोड़
कंपनी के MD एवं CEO पुनीत चटवाल ने कहा कि यह IHCL के इतिहास की लगातार 17वीं रिकॉर्ड तिमाही रही है। उन्होंने बताया कि मजबूत मांग, प्रीमियम होटल पोर्टफोलियो और बेहतर परिचालन दक्षता के चलते कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया।
शेयर की चाल कैसी रही?
IHCL का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 732.60 रुपये पर बंद हुआ था। बुधवार को यह 736 रुपये पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार में गिरकर 718.70 रुपये तक पहुंच गया।
52 सप्ताह का प्रदर्शन
- 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर: ₹811.90
- 52 सप्ताह का न्यूनतम स्तर: ₹565.25
- हाई बना था: 21 अगस्त 2025
- लो दर्ज हुआ: 2 अप्रैल 2026
हालांकि शेयर अपने निचले स्तर से अच्छी रिकवरी कर चुका है, लेकिन हालिया कानूनी और लीज विवाद ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
IHCL के तिमाही नतीजे मजबूत रहे हैं और कंपनी के होटल कारोबार में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है। लेकिन मुंबई पोर्ट अथॉरिटी के साथ चल रहा लीज और बकाया किराया विवाद फिलहाल निवेशकों की नजर में एक महत्वपूर्ण जोखिम बना हुआ है।
यदि यह मामला जल्द सुलझ जाता है तो शेयर पर दबाव कम हो सकता है। वहीं, विवाद लंबा खिंचने पर बाजार की प्रतिक्रिया आगे भी देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए आने वाले समय में कंपनी की कानूनी प्रगति, लीज विवाद और अगली तिमाही के प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।


