नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और चुनिंदा भारीभरकम शेयरों में दबाव के चलते बाजार लाल निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 400 अंक से अधिक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 100 अंकों तक फिसल गया। एविएशन सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला, जिसमें इंडिगो (InterGlobe Aviation) का शेयर प्रमुख रूप से कमजोर रहा।
सुबह करीब 9:23 बजे बीएसई सेंसेक्स 387 अंक (0.50%) की गिरावट के साथ 77,083.11 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 92.25 अंक (0.38%) टूटकर 24,095.45 के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।
क्यों दबाव में आया शेयर बाजार?
विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू बाजार पर कई कारकों का एक साथ असर देखने को मिल रहा है। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और निवेशकों की सतर्कता के कारण बाजार में कमजोरी बनी हुई है।
बाजार की गिरावट के पीछे प्रमुख वजहें हैं:
- लगातार तीसरे दिन मुनाफावसूली का दबाव।
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली।
- वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत।
- चुनिंदा बड़े शेयरों में भारी गिरावट।
- निवेशकों का जोखिम लेने से बचना।
इंडिगो के शेयर में सबसे ज्यादा दबाव
आज के कारोबार में एविएशन सेक्टर के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। इंडिगो (InterGlobe Aviation) के शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निफ्टी पर भी दबाव बढ़ा। इसके अलावा कुछ अन्य बड़े लार्जकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली।
बैंकिंग और आईटी शेयर भी फिसले
बैंकिंग, आईटी, ऑटो और वित्तीय सेवा सेक्टर के कई प्रमुख शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इन सेक्टरों में बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर दबाव बना रहा। हालांकि कुछ डिफेंसिव सेक्टरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली, लेकिन वह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
रुपये में भी कमजोरी
शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 0.1% कमजोर होकर 96.3425 पर खुला। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 96.2350 पर बंद हुआ था। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी विदेशी निवेश प्रवाह और आयात लागत को प्रभावित कर सकती है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को घबराकर बिकवाली करने के बजाय गुणवत्ता वाले शेयरों पर नजर बनाए रखनी चाहिए। यदि बाजार में और गिरावट आती है तो मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाई जा सकती है। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के दौरान जोखिम प्रबंधन और पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर इन प्रमुख कारकों पर रहेगी:
- विदेशी निवेशकों (FII) की खरीदारी या बिकवाली।
- वैश्विक शेयर बाजारों का रुख।
- अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव।
- कच्चे तेल की कीमतों की दिशा।
- कंपनियों के तिमाही नतीजे और प्रबंधन की टिप्पणियां।
यदि वैश्विक संकेतों में सुधार और विदेशी निवेशकों की खरीदारी लौटती है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्कता बरतना और दीर्घकालिक निवेश रणनीति पर टिके रहना बेहतर माना जा रहा है।


