AK-203 Ammunition: अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने AK-203 असॉल्ट राइफल के लिए स्वदेशी 7.62×39 mm गोला-बारूद की सप्लाई को लेकर इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) के साथ पांच साल का समझौता किया है। इस करार से भारत में छोटे कैलिबर के गोला-बारूद के उत्पादन और सप्लाई चेन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
Highlights
- अदाणी डिफेंस और IRRPL के बीच पांच साल का समझौता।
- AK-203 राइफल के लिए भारत में तैयार होगा 7.62×39 mm गोला-बारूद।
- घरेलू रक्षा उत्पादन और स्वदेशी सप्लाई चेन को मिलेगा बढ़ावा।
- बाहरी सप्लाई पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
- AK-203 प्रोग्राम के लिए भारत में ही हथियार और गोला-बारूद का इकोसिस्टम मजबूत होगा।
AK-203 के लिए भारत में बनेगा गोला-बारूद
अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने AK-203 असॉल्ट राइफल प्रोग्राम के लिए 7.62×39 mm छोटे कैलिबर वाले गोला-बारूद की सप्लाई हेतु इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) के साथ पांच साल का समझौता किया है।
इस साझेदारी का उद्देश्य AK-203 राइफल के निर्माण और उसके लिए जरूरी गोला-बारूद की घरेलू सप्लाई को एक ही इकोसिस्टम से जोड़ना है। इससे आने वाले वर्षों में भारतीय सशस्त्र बलों के लिए गोला-बारूद की सप्लाई को अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने में मदद मिल सकती है।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत रक्षा उत्पादन में घरेलू क्षमता बढ़ाने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने पर लगातार जोर दे रहा है।
कानपुर में मौजूद है अदाणी डिफेंस की क्षमता
इस व्यवस्था के तहत अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस अपनी मौजूदा छोटे कैलिबर के गोला-बारूद उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल करेगी। इसमें उत्तर प्रदेश के कानपुर में मौजूद उत्पादन सुविधा भी शामिल है।
भारत में ही 7.62×39 mm राउंड के लिए सप्लाई उपलब्ध होने से बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, घरेलू स्तर पर तैयार होने वाली सप्लाई चेन सशस्त्र बलों की जरूरतों को लगातार पूरा करने में उपयोगी साबित हो सकती है।
क्या है AK-203 राइफल प्रोग्राम?
AK-203 रूस की प्रसिद्ध AK सीरीज पर आधारित आधुनिक असॉल्ट राइफल है। भारत और रूस के बीच हुए अंतर-सरकारी समझौते के बाद भारत में इसके उत्पादन के लिए इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड यानी IRRPL का गठन किया गया था।
IRRPL की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा में स्थित है। इस संयुक्त उद्यम में भारतीय और रूसी रक्षा कंपनियों की भागीदारी है।
भारतीय पक्ष में एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड शामिल हैं, जबकि रूसी पक्ष से कंसर्न कलाश्निकोव और रोसोबोरोनएक्सपोर्ट की भागीदारी है।
कोरवा में बन रही हैं AK-203 राइफलें
दिसंबर 2021 में रक्षा मंत्रालय ने कोरवा स्थित सुविधा में 6,01,427 AK-203 असॉल्ट राइफलों के उत्पादन के लिए IRRPL के साथ औपचारिक अनुबंध किया था।
अब इन राइफलों के लिए जरूरी गोला-बारूद की घरेलू सप्लाई को मजबूत करने के लिए अदाणी डिफेंस के साथ हुआ पांच साल का समझौता महत्वपूर्ण है। इससे राइफल और उसके लिए जरूरी गोला-बारूद की सप्लाई को भारत में ही विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा क्षेत्र में किसी हथियार प्रणाली के लिए सिर्फ उसका निर्माण करना ही पर्याप्त नहीं होता। उसके साथ लगातार उपलब्ध रहने वाला गोला-बारूद, स्पेयर पार्ट्स और अन्य जरूरी सपोर्ट सिस्टम भी महत्वपूर्ण होते हैं।
AK-203 के लिए भारत में ही 7.62×39 mm गोला-बारूद की सप्लाई का यह करार इसी व्यापक रक्षा इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में कदम है।
इससे घरेलू कंपनियों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, सप्लाई चेन को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है। यह सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लक्ष्य के अनुरूप भी है।
सेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता?
AK-203 राइफल प्रोग्राम के साथ भारत में बड़ी संख्या में असॉल्ट राइफलों का उत्पादन किया जा रहा है। ऐसे में इनके लिए जरूरी गोला-बारूद की भरोसेमंद और लगातार उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है।
अगर राइफल और उसके लिए जरूरी गोला-बारूद दोनों की सप्लाई चेन भारत में मजबूत होती है, तो इससे लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने और बाहरी सप्लाई स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस समझौते का मतलब सीधे तौर पर सेना की ताकत में तत्काल बढ़ोतरी नहीं है। इसका बड़ा महत्व भारत की घरेलू रक्षा निर्माण क्षमता और लंबे समय की सप्लाई सुरक्षा को मजबूत करने में है।
रक्षा उत्पादन में बढ़ रही निजी क्षेत्र की भूमिका
भारत में रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। अदाणी डिफेंस भी छोटे कैलिबर के गोला-बारूद और अन्य रक्षा उत्पादों के निर्माण में अपनी क्षमता विकसित कर रही है।
AK-203 के लिए गोला-बारूद की सप्लाई का यह समझौता निजी क्षेत्र और सरकारी रक्षा उपक्रमों के बीच सहयोग का एक उदाहरण है। इससे भारत में छोटे हथियारों से जुड़े पूरे इकोसिस्टम को विकसित करने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, अदाणी डिफेंस और IRRPL के बीच पांच साल का यह समझौता AK-203 प्रोग्राम के लिए एक मजबूत घरेलू सप्लाई चेन तैयार करने की दिशा में अहम कदम है। भारत में ही राइफल और उसके लिए जरूरी गोला-बारूद की उपलब्धता बढ़ने से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिल सकती है।


