मुंबई: अच्छी सैलरी, बड़ी कंपनी और तेज़ी से बढ़ता करियर—अधिकांश लोगों के लिए यही सफलता की पहचान होती है। लेकिन 31 वर्षीय सान्या देशमुख ने इस पारंपरिक सोच से अलग फैसला लिया। Amazon जैसी वैश्विक कंपनी में सालाना करीब 30-35 लाख रुपये के पैकेज पर काम करने वाली सान्या ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी और अब नासिक में अपना डिजिटल मार्केटिंग बिजनेस चला रही हैं। उनका कहना है कि कमाई पहले से कम जरूर हुई है, लेकिन मानसिक शांति, परिवार के साथ समय और बेहतर जीवनशैली ने इस फैसले को पूरी तरह सफल बना दिया।
Amazon, ByteDance और InMobi जैसी कंपनियों में बनाया शानदार करियर
पुणे से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सान्या देशमुख ने पारंपरिक इंजीनियरिंग जॉब के बजाय डिजिटल मार्केटिंग को अपना करियर चुना। शुरुआत उन्होंने फूड से जुड़े एक सोशल मीडिया प्रोजेक्ट से की, जिसने उन्हें डिजिटल मार्केटिंग इंडस्ट्री में पहचान दिलाई।
इसके बाद उन्होंने लगातार बड़ी टेक कंपनियों में काम किया। पहले ByteDance से जुड़ीं, लेकिन भारत में कंपनी के संचालन पर रोक लगने के बाद उन्हें नई नौकरी तलाशनी पड़ी। फिर उन्होंने InMobi में काम किया और बाद में Amazon के विज्ञापन कारोबार (Advertising Business) से जुड़कर अहम जिम्मेदारियां संभालीं।
करियर में लगातार प्रमोशन मिलने के साथ वह टीम लीडर तक पहुंच गईं और उनकी सालाना सैलरी करीब 30 से 35 लाख रुपये हो गई। उनके पति भी लगभग इतने ही पैकेज पर काम करते थे, जिससे दोनों की संयुक्त वार्षिक आय 60 से 65 लाख रुपये तक पहुंच गई थी।
अच्छी सैलरी के बावजूद क्यों छोड़ी नौकरी?
बाहरी तौर पर सबकुछ शानदार दिख रहा था, लेकिन धीरे-धीरे सान्या को महसूस होने लगा कि मुंबई की तेज़ रफ्तार जिंदगी उनके लिए मानसिक रूप से थकाने वाली होती जा रही है।
शादी के बाद उनके पति नासिक में रहते थे जबकि उनके माता-पिता औरंगाबाद में थे। वहीं उन्हें हर सप्ताह मुंबई आना-जाना पड़ता था। शुरुआत में हफ्ते में दो दिन ऑफिस जाना होता था, लेकिन बाद में यह बढ़कर पांच दिन हो गया।
हर रविवार शाम मुंबई के लिए निकलना, पूरे सप्ताह काम करना और फिर वापस घर लौटना उनकी दिनचर्या बन गई थी। लगातार यात्रा और परिवार से दूर रहने की वजह से तनाव बढ़ने लगा।
परिवार के साथ समय बिताना हो गया था मुश्किल
सान्या ने बताया कि नौकरी की वजह से उन्हें परिवार के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम, त्योहार और पारिवारिक समारोह छोड़ने पड़े।
उन्होंने कहा कि अक्सर छुट्टियां इस सोच में खर्च हो जाती थीं कि परिवार के साथ समय बिताएं या भविष्य की किसी यात्रा के लिए बचाकर रखें। धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि अच्छी कमाई के बावजूद जीवन का संतुलन बिगड़ता जा रहा है।
मुंबई में किराए पर ही खर्च होते थे ₹65 हजार
सान्या और उनके पति ने ऑफिस के पास रहने के लिए मुंबई में एक बेडरूम का फ्लैट किराए पर लिया था। इस फ्लैट का मासिक किराया लगभग 65 हजार रुपये था।
हालांकि दोनों इस खर्च को आसानी से वहन कर सकते थे, लेकिन समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि इतनी बड़ी आय होने के बावजूद बचत उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही थी। बढ़ते किराए, रोजमर्रा के खर्च और भविष्य में बच्चों की परवरिश जैसी जिम्मेदारियों ने उन्हें अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर किया।
इसी दौरान दोनों ने मुंबई छोड़कर नासिक में परिवार के साथ रहने का फैसला किया, जहां उन्हें किराया नहीं देना पड़ता और घरेलू खर्च भी काफी कम हो गया।
कम कमाई के बावजूद बढ़ गई बचत
नासिक शिफ्ट होने के बाद उनकी आय पहले की तुलना में कम जरूर हुई, लेकिन खर्चों में भारी कमी आने से उनकी बचत पहले से बेहतर होने लगी।
सान्या ने बताया कि मुंबई में रहते समय वह निवेश पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाती थीं। उनकी बचत मुख्य रूप से PPF, यात्रा और कभी-कभी सोना खरीदने तक सीमित रहती थी।
अब उन्होंने नियमित SIP शुरू की है, PPF में निवेश जारी रखा है और वित्तीय प्रबंधन सीखने के लिए कई Financial Literacy Courses भी किए हैं। उनका कहना है कि पैसों को सही तरीके से मैनेज करना सीखने के बाद उनका पूरा नजरिया बदल गया।
नौकरी छोड़ने के बाद शुरू किया डिजिटल मार्केटिंग बिजनेस
सान्या ने किसी बड़े बिजनेस प्लान के साथ नौकरी नहीं छोड़ी थी। उन्होंने पहले कुछ समय का ब्रेक लिया और फिर अपने एक प्रोफेशनल पार्टनर के साथ मिलकर डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी शुरू की।
शुरुआत में क्लाइंट जुटाना आसान नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे काम बढ़ने लगा। अब उनका यह बिजनेस पिछले करीब आठ महीनों से सफलतापूर्वक चल रहा है और वह अपने समय के अनुसार काम कर रही हैं।
अब नहीं होता सोमवार का तनाव
सान्या का कहना है कि कॉर्पोरेट नौकरी के दौरान वह अक्सर मानसिक दबाव में रहती थीं। कई बार काम का तनाव इतना बढ़ जाता था कि ऑफिस के वॉशरूम में जाकर रोना पड़ता था।
आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अब वह नियमित जिम जाती हैं, खेलकूद करती हैं, पर्याप्त नींद लेती हैं और परिवार के साथ भरपूर समय बिताती हैं। उनका कहना है कि अब रविवार की शाम आते ही सोमवार का डर महसूस नहीं होता।
सान्या देशमुख की सीख
सान्या मानती हैं कि नौकरी छोड़ने का सबसे बड़ा डर हर महीने मिलने वाली निश्चित सैलरी को छोड़ना होता है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति के आर्थिक लक्ष्य स्पष्ट हों और उसने अपनी वित्तीय योजना सही तरीके से बनाई हो, तो वह जीवन में बेहतर फैसले लेने का साहस जुटा सकता है।
उनके अनुसार, कमाई थोड़ी कम होना हमेशा नुकसान नहीं होता, अगर उसके बदले आपको मानसिक शांति, बेहतर स्वास्थ्य, परिवार के साथ समय और संतुलित जीवन मिल रहा हो।
निष्कर्ष
सान्या देशमुख की कहानी बताती है कि करियर में सफलता केवल बड़े पैकेज या प्रतिष्ठित कंपनी तक सीमित नहीं होती। सही वित्तीय योजना, स्पष्ट प्राथमिकताएं और बेहतर जीवन गुणवत्ता को महत्व देकर भी सफलता हासिल की जा सकती है। Amazon जैसी हाई-पेइंग नौकरी छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करने का उनका फैसला आज कई पेशेवरों के लिए प्रेरणा बन रहा है।


