Edible Oil Price Hike: देशभर में खाद्य तेलों की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। सरसों, सोयाबीन और मूंगफली तेल के दाम पिछले सप्ताह के मुकाबले काफी बढ़ गए हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार किसानों द्वारा कम आवक, त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग, रुपये की कमजोरी और आयात शुल्क बढ़ने जैसे कई कारणों से खाने के तेल महंगे हुए हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई के बजट पर पड़ने वाला है।
Highlights
- सरसों, सोयाबीन और मूंगफली तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी।
- सरसों तेल अब सोयाबीन और पाम तेल से ₹10-15 प्रति किलो महंगा।
- किसानों की कम बिक्री और कम आवक से बाजार में सप्लाई घटी।
- त्योहारी मांग और अचार उद्योग की खरीद से बढ़ी कीमतें।
- रुपये की कमजोरी और आयात शुल्क बढ़ने से विदेशी तेल भी महंगे।
खाने के तेल की कीमतों में क्यों आई तेजी?
रसोई का सबसे जरूरी सामान माने जाने वाले खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। बाजार में सरसों तेल, सोयाबीन तेल, मूंगफली तेल, कच्चा पाम तेल (CPO), पामोलीन और बिनौला तेल सभी महंगे हो गए हैं।
व्यापारियों के अनुसार किसानों को पहले ही अच्छी कीमतें मिल चुकी हैं, इसलिए वे अब कम दाम पर अपनी उपज बेचने के लिए तैयार नहीं हैं। इसका असर मंडियों में आवक पर पड़ा है और सप्लाई कम होने से कीमतें ऊपर चली गई हैं।
त्योहारी सीजन ने बढ़ाई मांग
त्योहारी मौसम की शुरुआत के साथ ही खाद्य तेलों की मांग में तेजी आई है। इसके अलावा बरसात के दौरान अचार बनाने वाली कंपनियां बड़ी मात्रा में सरसों खरीद रही हैं, जिससे सरसों तेल की मांग और बढ़ गई है।
उधर डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने से आयातित खाद्य तेल पहले से अधिक महंगे हो गए हैं। हाल ही में सरकार द्वारा पाम और पामोलीन तेल पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने का असर भी बाजार में दिखाई दे रहा है।
सरसों तेल अब सबसे महंगा
कुछ सप्ताह पहले तक सरसों तेल की कीमतें सोयाबीन और पाम तेल के आसपास थीं, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
बाजार सूत्रों के अनुसार वर्तमान में सरसों तेल सोयाबीन और पाम-पामोलीन तेल से करीब ₹10-15 प्रति किलो महंगा बिक रहा है।
इसकी सबसे बड़ी वजह सरसों की कम आवक और लगातार बढ़ती मांग मानी जा रही है।
सोयाबीन की आवक में भारी गिरावट
सोयाबीन मंडियों में आवक तेजी से घट गई है।
- पहले प्रतिदिन लगभग 60 हजार बोरी की आवक हो रही थी।
- अब यह घटकर करीब 10 हजार बोरी रह गई है।
- जबकि देश में रोजाना सोयाबीन की मांग 2.5 से 3 लाख बोरी के बीच है।
किसानों को बेहतर दाम देने के लिए महाराष्ट्र के लातूर स्थित बड़े प्रोसेसिंग प्लांटों ने 10 अगस्त के बाद की खरीद के लिए सोयाबीन का भाव ₹7,700 से बढ़ाकर ₹8,100 प्रति क्विंटल कर दिया है।
मूंगफली तेल की कीमतों में भी तेजी
मूंगफली की उपलब्धता सीमित होने के बावजूद इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। बिनौला तेल की कमी के कारण कई ब्रांडेड कंपनियां मूंगफली तेल की ओर रुख कर रही हैं।
सरकारी स्टॉक उपलब्ध होने के बावजूद बाजार में बढ़ती मांग के चलते मूंगफली तेल और तिलहन की कीमतों में भी अच्छा सुधार देखने को मिला है।
रुपये की कमजोरी से आयातित तेल भी महंगे
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पाम तेल और अन्य खाद्य तेल विदेशों से आयात करता है। पिछले सप्ताह रुपये के कमजोर होने और आयात शुल्क बढ़ने से आयातित तेलों की लागत बढ़ गई, जिसका असर सीधे घरेलू बाजार की कीमतों पर पड़ा है।
खाद्य तेलों के ताजा थोक भाव
| उत्पाद | वर्तमान भाव |
|---|---|
| सरसों दाना | ₹8,075-8,100 प्रति क्विंटल |
| सरसों तेल | ₹16,550 प्रति क्विंटल |
| सरसों पक्की घानी | ₹2,705-2,805 प्रति 15 किलो टिन |
| सरसों कच्ची घानी | ₹2,705-2,855 प्रति 15 किलो टिन |
| सोयाबीन दाना | ₹7,550-7,600 प्रति क्विंटल |
| सोयाबीन लूज | ₹7,400-7,475 प्रति क्विंटल |
| मूंगफली तिलहन | ₹7,350-7,925 प्रति क्विंटल |
| मूंगफली तेल (गुजरात) | ₹17,000 प्रति क्विंटल |
| मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल | ₹2,665-2,965 प्रति 15 किलो टिन |
आम लोगों पर क्या होगा असर?
खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरों के मासिक खर्च पर पड़ेगा। होटल, रेस्टोरेंट, स्नैक और स्ट्रीट फूड कारोबारियों की लागत भी बढ़ सकती है। यदि आने वाले दिनों में किसानों की आवक नहीं बढ़ती और आयातित तेल महंगे बने रहते हैं, तो खुदरा बाजार में खाने के तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।


