सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम पर ₹73,996 करोड़ खर्च किए हैं। संसद में पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि फिलहाल पेट्रोल में 20% से अधिक इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। जानें पूरी जानकारी।
पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का आंकड़ा आया सामने
Highlights
- सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम पर ₹73,996 करोड़ से अधिक खर्च किए।
- इथेनॉल की खरीद घरेलू गन्ना और अनाज आधारित स्रोतों से की जा रही है।
- 501 इथेनॉल निर्माण इकाइयां कार्यक्रम से जुड़ी हैं।
- फिलहाल पेट्रोल में 20% से अधिक इथेनॉल मिलाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
- सरकार का लक्ष्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है।
नई दिल्ली: देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol) को लेकर लगातार चर्चा जारी है। सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से वाहनों का माइलेज प्रभावित होता है, जबकि दूसरी ओर केंद्र सरकार इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
इसी बीच संसद के मानसून सत्र में सरकार ने इथेनॉल कार्यक्रम पर विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस योजना पर अब तक हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
इथेनॉल कार्यक्रम पर सरकार ने कितना खर्च किया?
राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने इथेनॉल खरीद पर लगातार बड़े स्तर पर निवेश किया है।
सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार—
| एथेनॉल आपूर्ति वर्ष | खर्च |
|---|---|
| 2023-24 | ₹48,757 करोड़ |
| 2024-25 | ₹73,996 करोड़ |
| 2025-26 (जून 2026 तक) | ₹49,577 करोड़ |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम सरकार की सबसे बड़ी ऊर्जा पहलों में शामिल हो चुका है।
इथेनॉल किन स्रोतों से खरीदा जाता है?
सरकार ने संसद में बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां केवल घरेलू स्रोतों से ईंधन-ग्रेड इथेनॉल खरीदती हैं। इससे किसानों को भी लाभ मिलता है और देश में कृषि आधारित उद्योगों को मजबूती मिलती है।
इथेनॉल तैयार करने के लिए जिन प्रमुख कच्चे माल का उपयोग किया जा रहा है, उनमें शामिल हैं—
- गन्ने से बनने वाला सी-हेवी मोलासेस
- बी-हेवी मोलासेस
- गन्ने का रस
- चीनी की चाशनी (Sugar Syrup)
- क्षतिग्रस्त अनाज
- भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अतिरिक्त चावल
- मक्का (कॉर्न)
सरकार का कहना है कि इससे कृषि उत्पादों का बेहतर उपयोग हो रहा है और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।
501 इथेनॉल निर्माण इकाइयां जुड़ीं
मंत्री सुरेश गोपी ने जानकारी दी कि 16 जुलाई 2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने 501 इथेनॉल निर्माण इकाइयों को पंजीकृत किया है। ये सभी इकाइयां इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के तहत विकृत निर्जल इथेनॉल (Denatured Anhydrous Ethanol) की आपूर्ति कर रही हैं।
इससे देशभर में इथेनॉल उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है।
क्या पेट्रोल में 20% से ज्यादा इथेनॉल मिलाया जाएगा?
हाल के दिनों में E20 के बाद E30 या उससे अधिक इथेनॉल मिश्रण की चर्चाएं तेज हुई हैं। इस पर सरकार ने संसद में स्पष्ट जवाब दिया।
राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने बताया कि यदि भविष्य में E20 से आगे बढ़ने पर विचार किया जाता है तो उससे पहले कई महत्वपूर्ण पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा।
इनमें शामिल होंगे—
- वैज्ञानिक परीक्षण
- वाहन निर्माताओं (ऑटोमोबाइल कंपनियों) की राय
- इंजन कम्पैटिबिलिटी की जांच
- पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन
- सुरक्षा और गुणवत्ता संबंधी सभी आवश्यक परीक्षण
इन प्रक्रियाओं के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।
सरकार इथेनॉल मिश्रण पर इतना जोर क्यों दे रही है?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के जरिए सरकार कई उद्देश्यों को एक साथ पूरा करना चाहती है—
- कच्चे तेल के आयात में कमी
- विदेशी मुद्रा की बचत
- किसानों की आय में बढ़ोतरी
- गन्ना और अनाज आधारित उद्योगों को बढ़ावा
- प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी
- ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना
इसी वजह से सरकार लगातार इथेनॉल उत्पादन और उसके उपयोग को बढ़ावा दे रही है।
माइलेज को लेकर क्या कहती है सरकार?
सोशल मीडिया पर समय-समय पर यह दावा किया जाता है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहनों का माइलेज कम हो जाता है। हालांकि सरकार ने संसद में इस विषय पर कोई नई टिप्पणी नहीं की है। सरकार का जोर इस बात पर है कि इथेनॉल मिश्रण का विस्तार वैज्ञानिक परीक्षणों और वाहन निर्माताओं के मानकों के अनुरूप ही किया जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
निष्कर्ष
सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम पर अब तक ₹73,996 करोड़ तक का निवेश किया जा चुका है और इसका उद्देश्य भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है। हालांकि E20 से आगे बढ़ने को लेकर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार का कहना है कि भविष्य में यदि इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने पर विचार किया गया तो वह पूरी तरह वैज्ञानिक परीक्षण, उद्योग की राय और सुरक्षा मानकों के आधार पर ही होगा।


