नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के लिए आवाज उठाने वाले सोनम वांगचुक इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस बीच उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो भी चर्चा के केंद्र में हैं। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख कर अपने पति के इलाज और अस्पताल में रखे जाने को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू की है।
हालांकि, गीतांजलि आंग्मो की पहचान केवल सोनम वांगचुक की पत्नी तक सीमित नहीं है। उन्होंने करीब 15 वर्षों तक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने के बाद सामाजिक उद्यमिता (Social Entrepreneurship) का रास्ता चुना और आज वह हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की फाउंडिंग CEO और डीन हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा मामला
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी सेहत बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। गीतांजलि आंग्मो ने हाई कोर्ट में अपील दायर करते हुए कहा कि उनके पति को बिना औपचारिक गिरफ्तारी के अस्पताल में रोका जा रहा है और परिवार को इलाज से जुड़े फैसले लेने का अधिकार नहीं दिया जा रहा। उन्होंने मांग की कि वांगचुक को उनकी पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मिले।
कौन हैं गीतांजलि आंग्मो?
गीतांजलि जे. आंग्मो एक सोशल एंटरप्रेन्योर, शिक्षाविद और संस्थान निर्माता हैं। उन्होंने सोनम वांगचुक के साथ मिलकर Himalayan Institute of Alternatives, Ladakh (HIAL) की स्थापना की। यह संस्थान हिमालयी क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा, तकनीक और सतत विकास (Sustainable Development) पर काम करता है।
वह इस संस्थान की Founding CEO और Dean हैं। HIAL का उद्देश्य पारंपरिक शिक्षा प्रणाली से आगे बढ़कर ऐसी शिक्षा देना है, जो स्थानीय समस्याओं का व्यावहारिक समाधान तैयार कर सके।
HIAL किस काम के लिए जाना जाता है?
HIAL ने हिमालयी क्षेत्रों के लिए कई नवाचार विकसित किए हैं। इनमें शामिल हैं:
- ग्रीन और पर्यावरण-अनुकूल कैंपस
- पैसिव सोलर-हीटेड भवन
- हिमालयी परिस्थितियों के अनुकूल शिक्षा मॉडल
- भारतीय सेना के लिए सोलर-हीटेड टेंट
- स्थानीय संसाधनों पर आधारित तकनीकी समाधान
संस्थान अनुभव आधारित (Experiential Learning) और बहु-विषयक (Transdisciplinary) शिक्षा को बढ़ावा देता है।
ओडिशा से शुरू हुआ सफर
गीतांजलि आंग्मो का जन्म ओडिशा के बालासोर में एक पंजाबी परिवार में हुआ। उन्होंने फकीर मोहन यूनिवर्सिटी से फिजिक्स की पढ़ाई की। इसके बाद जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (XIMB), भुवनेश्वर से MBA किया।
बाद में उन्होंने श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमन एक्सीलेंस से इंटीग्रल एजुकेशन फ्रेमवर्क में डॉक्टरेट भी हासिल की।
15 साल कॉर्पोरेट सेक्टर में किया काम
सामाजिक क्षेत्र में आने से पहले गीतांजलि ने करीब 15 वर्षों तक कॉर्पोरेट दुनिया में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
उनके करियर की शुरुआत SRF लिमिटेड में असिस्टेंट मैनेजर के रूप में हुई। इसके बाद उन्होंने Deloitte में कंसल्टेंट के तौर पर काम किया। आगे चलकर वह Lister Technologies में यूरोपियन ऑपरेशन्स की प्रमुख रहीं और कोपेनहेगन में कार्य किया।
भारत लौटने के बाद उन्होंने कई सामाजिक और व्यावसायिक पहल शुरू कीं। इनमें Pushan, Shanghai Power Projects Limited और Helios Books Publishing House जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
कई राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं
गीतांजलि आंग्मो को शिक्षा और सामाजिक नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं।
उन्हें मिले प्रमुख सम्मान:
- Women Transforming India National Award (भारत सरकार)
- Chevening Fellowship
- शिक्षा और सामाजिक नेतृत्व से जुड़े कई राष्ट्रीय सम्मान
आध्यात्म और शिक्षा में भी गहरी रुचि
कॉर्पोरेट और सामाजिक उद्यमिता के अलावा गीतांजलि भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक परंपराओं से भी गहराई से जुड़ी हैं। वह श्री अरबिंदो के दृष्टिकोण से वेदांत और भगवद्गीता का अध्ययन और शिक्षण करती हैं।
इसके अलावा वह कराटे में ब्लैक बेल्ट हैं तथा ओडिसी और रूसी बैले (Russian Ballet) की भी प्रशिक्षण प्राप्त कलाकार हैं।
सोनम वांगचुक से कैसे हुई मुलाकात?
एक इंटरव्यू में गीतांजलि आंग्मो ने बताया था कि उनकी मुलाकात सोनम वांगचुक से एक शिक्षा सम्मेलन के दौरान हुई थी। पहली मुलाकात में ही उन्हें लगा कि उन्हें ऐसा व्यक्ति मिला है जो शिक्षा और समाज में बदलाव के लिए समर्पित है। यही साझा सोच आगे चलकर जीवनसाथी और कार्यसाथी दोनों में बदल गई।
दोनों ने मिलकर HIAL की स्थापना की और हिमालयी क्षेत्रों के लिए शिक्षा एवं तकनीक के नए मॉडल विकसित करने का लक्ष्य बनाया।
शिक्षा और समाज परिवर्तन की मिसाल
गीतांजलि आंग्मो का सफर इस बात का उदाहरण है कि कॉर्पोरेट क्षेत्र में सफल करियर बनाने के बाद भी समाज के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा सकता है। आज वह केवल HIAL की CEO ही नहीं, बल्कि शिक्षा, महिला नेतृत्व और सामाजिक नवाचार की एक मजबूत पहचान बन चुकी हैं। मौजूदा समय में सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और कानूनी मामले के बीच वह परिवार की ओर से सबसे प्रमुख आवाज बनकर सामने आई हैं।


