Share Market Crash: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेत और वैश्विक तनाव के बीच घरेलू बाजार दबाव में आ गया। सेंसेक्स (Sensex) शुरुआती कारोबार में 700 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 (Nifty 50) फिसलकर 24,200 के नीचे पहुंच गया। इस गिरावट में सबसे बड़ा दबाव HDFC Bank के शेयरों से आया, जिनमें 4% से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली।
एक कारोबारी दिन पहले यानी 17 जुलाई को बाजार शानदार तेजी के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स 964.58 अंकों की बढ़त के साथ 78,151.45 पर और निफ्टी 261.55 अंक चढ़कर 24,334.30 पर बंद हुआ था। लेकिन सोमवार को बाजार ने तेज गिरावट के साथ शुरुआत की और निवेशकों की धारणा अचानक बदल गई।
शुरुआती कारोबार में क्या रहा बाजार का हाल?
सुबह के कारोबार में बाजार पर बिकवाली पूरी तरह हावी रही। इंट्राडे के दौरान सेंसेक्स करीब 706 अंक टूटकर 77,444.79 तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 184 अंक गिरकर 24,149.90 के स्तर तक फिसल गया।
करीब 10:21 बजे तक सेंसेक्स 467.50 अंक (0.60%) की गिरावट के साथ 77,683.95 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 112.35 अंक (0.46%) टूटकर 24,221.95 के स्तर पर था।
हालांकि, व्यापक बाजार में तस्वीर थोड़ी बेहतर रही। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में हल्की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि बिकवाली मुख्य रूप से लार्जकैप और बैंकिंग शेयरों में केंद्रित रही।
HDFC Bank ने क्यों बढ़ाया बाजार पर दबाव?
इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण HDFC Bank के शेयरों में आई तेज कमजोरी रही। बैंक के शेयर 4% से अधिक टूट गए, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर बड़ा असर पड़ा।
एचडीएफसी बैंक का भार (Weightage) प्रमुख सूचकांकों में काफी अधिक है। ऐसे में इसके शेयरों में तेज गिरावट का सीधा असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया। दिलचस्प बात यह रही कि जून तिमाही के नतीजों के बाद अधिकांश ब्रोकरेज हाउस बैंक के प्रति सकारात्मक बने हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।
बाजार में गिरावट की चार बड़ी वजहें
1. अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता
वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार सैन्य गतिविधियों के कारण मध्य-पूर्व में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता कमजोर हुई।
ऐसे समय में निवेशक आमतौर पर जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाते हैं, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
भूराजनीतिक तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई, चालू खाते के घाटे (CAD) और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में उछाल को बाजार ने नकारात्मक संकेत के रूप में लिया।
3. बैंकिंग शेयरों में तेज बिकवाली
सोमवार को सबसे अधिक दबाव बैंकिंग सेक्टर में देखने को मिला। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में करीब ढाई फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
10 प्रमुख निजी बैंकों में से केवल ICICI Bank का शेयर ही हरे निशान में कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि HDFC Bank, Axis Bank, Kotak Mahindra Bank समेत अधिकांश बैंकिंग शेयर लाल निशान में रहे। बैंकिंग सेक्टर की कमजोरी ने पूरे बाजार का सेंटीमेंट खराब कर दिया।
4. India VIX में उछाल
बाजार की घबराहट को मापने वाला India VIX भी तेजी के साथ ऊपर गया। यह करीब 2.98% बढ़कर 13.54 के स्तर पर पहुंच गया।
India VIX का बढ़ना इस बात का संकेत माना जाता है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। जब VIX ऊपर जाता है तो निवेशकों में अनिश्चितता और डर का माहौल बनता है, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है।
क्या आगे भी बनी रहेगी कमजोरी?
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मध्य-पूर्व में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसके अलावा, बैंकिंग सेक्टर की चाल भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
हालांकि, मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था, कंपनियों के तिमाही नतीजे और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। यदि HDFC Bank और अन्य बड़े बैंकों में स्थिरता लौटती है तो बाजार में रिकवरी की संभावना भी बन सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
ऐसे उतार-चढ़ाव वाले माहौल में विशेषज्ञ लंबी अवधि के निवेशकों को घबराकर फैसले लेने से बचने की सलाह देते हैं। गुणवत्ता वाले शेयरों में चरणबद्ध निवेश (SIP या स्टैगर्ड बाइंग) की रणनीति अपनाना बेहतर माना जाता है। वहीं, शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को उच्च वोलैटिलिटी के दौरान उचित जोखिम प्रबंधन के साथ ही ट्रेड करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


