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Reading: ईरान का ‘अजेय किला’ ग्रेटर टुनब द्वीप तबाह? अमेरिका के हमले से बढ़ा तेल संकट का खतरा, जानें क्यों है इतना अहम
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ईरान का ‘अजेय किला’ ग्रेटर टुनब द्वीप तबाह? अमेरिका के हमले से बढ़ा तेल संकट का खतरा, जानें क्यों है इतना अहम

Namam Sharma
Last updated: 2026/07/18 at 12:53 पूर्वाह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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9 Min Read
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US Strikes Greater Tunb Island: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले ग्रेटर टुनब (Greater Tunb) द्वीप को निशाना बनाया है। यह द्वीप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास स्थित है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक मार्गों में से एक है।

Contents
ग्रेटर टुनब द्वीप क्या है और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?क्यों कहा जाता है इसे ईरान का ‘न डूबने वाला विमानवाहक पोत’?स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्यों है पूरी दुनिया की नजर?ईरान के सात रणनीतिक द्वीप कौन-कौन से हैं?ग्रेटर टुनब को लेकर ईरान और UAE में पुराना विवादअमेरिका ने ग्रेटर टुनब को ही क्यों बनाया निशाना?1. समुद्री मिसाइल क्षमता को कमजोर करना2. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की पकड़ कम करना3. IRGC की ऑपरेशनल क्षमता को नुकसान पहुंचानाईरान के अन्य सैन्य ठिकानों पर भी हमले का दावातेल सप्लाई पर कितना बड़ा खतरा?निष्कर्ष: छोटा द्वीप, बड़ा रणनीतिक महत्व

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई करीब 90 मिनट तक चली, जिसमें ईरान के तटीय रक्षा सिस्टम और क्रूज मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि, हमले से हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इस हमले के बाद ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। अगर यह समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित होता है तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों से लेकर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

ग्रेटर टुनब द्वीप क्या है और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

ग्रेटर टुनब आकार में भले ही छोटा द्वीप है, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति इसे बेहद शक्तिशाली बनाती है। यह द्वीप फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नजदीक है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां से रोजाना बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई होती है।

दुनिया के कई बड़े तेल उत्पादक देश जैसे:

  • सऊदी अरब
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
  • कतर
  • कुवैत
  • इराक

अपने ऊर्जा निर्यात के लिए इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर हैं।

यही वजह है कि ग्रेटर टुनब जैसे द्वीपों पर नियंत्रण किसी भी देश को समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने और रणनीतिक बढ़त हासिल करने में मदद देता है।


क्यों कहा जाता है इसे ईरान का ‘न डूबने वाला विमानवाहक पोत’?

ईरान लंबे समय से फारस की खाड़ी में मौजूद अपने द्वीपों को रणनीतिक सुरक्षा कवच के तौर पर इस्तेमाल करता आया है।

ईरानी सैन्य रणनीति में इन द्वीपों को एक तरह के स्थायी सैन्य प्लेटफॉर्म की तरह देखा जाता है। इन्हें इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहां से:

  • समुद्री निगरानी की जा सकती है
  • मिसाइल सिस्टम तैनात किए जा सकते हैं
  • ड्रोन ऑपरेशन चलाए जा सकते हैं
  • तेज गति वाली हमला नौकाओं को नियंत्रित किया जा सकता है

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन द्वीपों की स्थिति ईरान को समुद्री क्षेत्र में अचानक कार्रवाई करने की क्षमता देती है।


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्यों है पूरी दुनिया की नजर?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बेहद संकरा समुद्री रास्ता है। इसकी चौड़ाई इतनी सीमित है कि बड़े तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को तय रास्तों से गुजरना पड़ता है।

यही कारण है कि यहां किसी भी सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।

अगर ईरान इस रास्ते को बंद करता है या यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो:

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है
  • पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं
  • वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है
  • ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ सकता है

भारत भी अपनी बड़ी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया से आने वाले तेल पर निर्भर है, इसलिए इस क्षेत्र की स्थिति भारतीय बाजारों के लिए भी महत्वपूर्ण है।


ईरान के सात रणनीतिक द्वीप कौन-कौन से हैं?

ईरान ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में कई द्वीपों को सैन्य और रणनीतिक दृष्टि से विकसित किया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  1. होर्मुज (Hormuz)
  2. लारक (Larak)
  3. केश्म (Qeshm)
  4. हेंगाम (Hengam)
  5. अबू मूसा (Abu Musa)
  6. ग्रेटर टुनब (Greater Tunb)
  7. लेसर टुनब (Lesser Tunb)

इन द्वीपों की श्रृंखला ईरान को समुद्री क्षेत्र में निगरानी और रक्षा क्षमता प्रदान करती है।


ग्रेटर टुनब को लेकर ईरान और UAE में पुराना विवाद

ग्रेटर टुनब द्वीप पर ईरान का प्रशासनिक नियंत्रण है, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी इस पर अपना दावा करता है।

यह विवाद 1971 में उस समय गहरा गया था जब ब्रिटेन ने खाड़ी क्षेत्र से अपनी सैन्य मौजूदगी समाप्त की और UAE एक स्वतंत्र देश बना। उसी दौरान ईरान ने ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा द्वीपों पर नियंत्रण स्थापित किया।

UAE का कहना है कि इन द्वीपों पर उसका ऐतिहासिक अधिकार है, जबकि ईरान इन्हें अपनी संप्रभु सीमा का हिस्सा मानता है।


अमेरिका ने ग्रेटर टुनब को ही क्यों बनाया निशाना?

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सैन्य अभियान में ऐसे ठिकानों को निशाना बनाया जाता है जो विरोधी देश की रणनीतिक क्षमता को कमजोर कर सकें।

ग्रेटर टुनब पर हमला करने के पीछे संभावित कारण:

1. समुद्री मिसाइल क्षमता को कमजोर करना

द्वीप पर मौजूद तटीय रक्षा सिस्टम और मिसाइल ठिकाने अमेरिकी नौसेना के लिए खतरा माने जाते हैं।

2. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की पकड़ कम करना

यह द्वीप ईरान को समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करता है।

3. IRGC की ऑपरेशनल क्षमता को नुकसान पहुंचाना

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) इन क्षेत्रों में ड्रोन और तेज हमला नौकाओं का इस्तेमाल करती है।


ईरान के अन्य सैन्य ठिकानों पर भी हमले का दावा

ग्रेटर टुनब के अलावा ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका ने सीस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित एक सैन्य ठिकाने को भी निशाना बनाया।

बताया गया कि यह ठिकाना ईरानी सेना की 388वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड से जुड़ा था, जो बख्तरबंद वाहनों और सैन्य अभियानों के लिए जिम्मेदार है।

हालांकि, इन हमलों और नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।


तेल सप्लाई पर कितना बड़ा खतरा?

अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक प्रभावित होता है तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

तेल बाजार पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव के प्रति संवेदनशील है। किसी भी बड़े सैन्य घटनाक्रम से:

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
  • शेयर बाजारों में गिरावट
  • डॉलर और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव
  • महंगाई का दबाव

देखने को मिल सकता है।


निष्कर्ष: छोटा द्वीप, बड़ा रणनीतिक महत्व

ग्रेटर टुनब भले ही नक्शे पर छोटा दिखाई देता है, लेकिन इसकी स्थिति इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य और ऊर्जा क्षेत्रों में शामिल करती है।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल दो देशों का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति दुनिया के ऊर्जा बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

(डिस्क्लेमर: इस रिपोर्ट में शामिल सैन्य घटनाओं की कुछ जानकारियां संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित हैं। स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध होने पर स्थिति बदल सकती है।)

लेटेस्ट रेट्स और बाजार अपडेट्स के लिए NewsJagran पर आज का सोने का भाव, चांदी का भाव, पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट, LPG, CNG और PNG की कीमतें, कच्चे तेल (Crude Oil) का भाव, डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट और IPO GMP Today की लाइव जानकारी देखें।

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TAGGED: अमेरिका ईरान युद्ध, ईरान न्यूज, कच्चा तेल, ग्रेटर टुनब द्वीप, ग्लोबल मार्केट, तेल संकट, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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