India Defence Exports: कभी दुनिया के सबसे बड़े रक्षा उपकरण आयातकों में शामिल भारत अब वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी अलग पहचान बना रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत विकसित स्वदेशी मिसाइल और रक्षा प्रणालियां अब दुनिया के कई देशों की पहली पसंद बनती जा रही हैं। ब्रह्मोस, आकाश और पिनाका जैसे अत्याधुनिक हथियारों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग ने भारत के रक्षा निर्यात को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। यही वजह है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात दोनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात
रक्षा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया। वहीं रक्षा निर्यात में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली।
- रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये पहुंचा।
- पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 23,622 करोड़ रुपये था।
- यानी एक साल में 62.66% की शानदार वृद्धि दर्ज हुई।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत का रक्षा निर्यात लगभग 50 गुना बढ़ चुका है। वित्त वर्ष 2014 में जहां यह सिर्फ 700 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2029 तक भारत का रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच सकता है।
इंडो-पैसिफिक बना भारतीय हथियारों का सबसे बड़ा बाजार
भारत के रक्षा निर्यात में सबसे बड़ी हिस्सेदारी अब इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र की है। खासकर म्यांमार, फिलीपींस और वियतनाम भारतीय रक्षा उपकरणों के प्रमुख खरीदार बनकर उभरे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक:
- 2020-2025 के दौरान भारत के कुल रक्षा निर्यात में इन तीन देशों की हिस्सेदारी 70.1% रही।
- 2014-2019 में यह हिस्सेदारी 16.5% थी।
- 2008-2013 में यह सिर्फ 14.7% थी।
यह बदलाव दर्शाता है कि दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का भरोसा भारतीय रक्षा तकनीक पर तेजी से बढ़ रहा है।
ब्रह्मोस मिसाइल की दुनिया में बढ़ती मांग
भारत की सबसे चर्चित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस लगातार नए अंतरराष्ट्रीय ग्राहक जोड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया जकार्ता यात्रा के दौरान इंडोनेशिया ने ब्रह्मोस मिसाइल खरीद समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए।
इसके साथ ही:
- फिलीपींस
- वियतनाम
- इंडोनेशिया
ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस रक्षा समझौते का मूल्य 200 मिलियन डॉलर से 630 मिलियन डॉलर के बीच है। इसमें मिसाइल बैटरी, तटीय रक्षा प्रणाली और सैन्य प्रशिक्षण भी शामिल है।
क्यों खास है ब्रह्मोस?
- सुपरसोनिक गति से हमला करने में सक्षम।
- एंटी-शिप और तटीय रक्षा के लिए बेहद प्रभावी।
- दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने की क्षमता।
- दक्षिण चीन सागर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में मजबूत सैन्य संतुलन बनाने में उपयोगी।
ब्रह्मोस का विकास डीआरडीओ (DRDO) और रूस की NPO Mashinostroyenia के संयुक्त उपक्रम के तहत किया गया है।
पिनाका रॉकेट सिस्टम की बढ़ रही अंतरराष्ट्रीय पहचान
भारत का स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम भी तेजी से वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना रहा है।
- आर्मेनिया ने वर्ष 2022 में करीब 2,000 करोड़ रुपये का सौदा किया।
- जुलाई 2023 से इसकी डिलीवरी शुरू हुई।
- जनवरी 2026 में गाइडेड पिनाका सिस्टम की पहली खेप रवाना की गई।
हाल ही में डीआरडीओ ने ओडिशा के चांदीपुर परीक्षण केंद्र से लॉन्ग रेंज गाइडेड पिनाका रॉकेट का सफल परीक्षण किया, जिसने लगभग 60 किलोमीटर दूरी पर लक्ष्य को सटीकता से निशाना बनाया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब फ्रांस भी अपने पुराने आर्टिलरी सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए पिनाका खरीदने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। यदि यह सौदा होता है तो भारतीय रक्षा उद्योग के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी।
आकाश एयर डिफेंस सिस्टम ने भी बनाई वैश्विक पहचान
भारत का स्वदेशी आकाश एयर डिफेंस सिस्टम भी अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान बना चुका है। यह विदेशों में निर्यात होने वाला भारत का पहला स्वदेशी एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म है।
मुख्य बातें:
- वर्ष 2022 में आर्मेनिया ने लगभग 720 मिलियन डॉलर का समझौता किया।
- इसकी डिलीवरी 2024 में शुरू हुई।
- डीआरडीओ द्वारा विकसित और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा निर्मित।
यह प्रणाली निम्न खतरों से सुरक्षा देने में सक्षम है—
- लड़ाकू विमान
- ड्रोन
- क्रूज मिसाइल
- हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों को विफल करने में आकाश सिस्टम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
आत्मनिर्भर भारत से मजबूत हो रही रक्षा इंडस्ट्री
भारत सरकार लगातार रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की भागीदारी बढ़ा रही है। आधुनिक मिसाइल सिस्टम, रडार, ड्रोन, गोला-बारूद और एयर डिफेंस तकनीक में निवेश बढ़ने से देश की रक्षा निर्माण क्षमता तेजी से मजबूत हो रही है।
रक्षा निर्यात बढ़ने से:
- विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि हो रही है।
- घरेलू रक्षा उद्योग को नए ऑर्डर मिल रहे हैं।
- लाखों रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।
- भारत की सामरिक और कूटनीतिक ताकत भी बढ़ रही है।
आगे क्या?
बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां और कई देशों द्वारा रक्षा बजट बढ़ाए जाने के बीच भारतीय हथियारों की वैश्विक मांग आगे भी मजबूत रहने की उम्मीद है। ब्रह्मोस, आकाश और पिनाका जैसे स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म भारत को केवल आत्मनिर्भर ही नहीं बना रहे, बल्कि उसे दुनिया के उभरते रक्षा निर्यातकों की अग्रिम पंक्ति में भी खड़ा कर रहे हैं।


