उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में उद्यमिता को बढ़ावा देने और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए नई स्टार्टअप पॉलिसी 2026 और स्वतंत्र यूपी स्टार्टअप मिशन को मंजूरी दे दी है। नई नीति के तहत स्टार्टअप्स को मिलने वाली शुरुआती आर्थिक सहायता में बड़ा इजाफा किया गया है। अब पात्र स्टार्टअप्स को 17,500 रुपये की जगह 20,000 रुपये प्रति माह का भत्ता मिलेगा और यह सहायता एक साल के बजाय दो साल तक जारी रहेगी।
सरकार का मानना है कि इस नई नीति से युवाओं, महिला उद्यमियों और तकनीक आधारित स्टार्टअप्स को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। यह पहल उत्तर प्रदेश को वर्ष 2030 तक वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है।
मासिक भत्ता बढ़ा, अब दो साल तक मिलेगा लाभ
नई स्टार्टअप नीति के तहत शुरुआती चरण में काम कर रहे स्टार्टअप्स को मिलने वाला मासिक भत्ता 17,500 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दिया गया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब यह सहायता केवल 12 महीने नहीं, बल्कि 24 महीने तक मिलेगी, जिससे नए उद्यमियों को कारोबार खड़ा करने में अधिक वित्तीय सहयोग मिलेगा।
प्रोटोटाइप अनुदान और सीड फंडिंग भी दोगुनी
सरकार ने शुरुआती निवेश सहायता में भी बड़ा इजाफा किया है।
- प्रोटोटाइप अनुदान: 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये
- सीड फंडिंग: 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये
- विशेष परिस्थितियों में सीड फंडिंग 50 लाख रुपये तक दी जा सकेगी।
इस कदम का उद्देश्य शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को पूंजी की कमी से उबारना और उन्हें तेजी से बाजार तक पहुंचने में मदद करना है।
1,000 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड और क्लाउड रिम्बर्समेंट
नई नीति के तहत 1,000 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड बनाया जाएगा। इसके अलावा स्टार्टअप्स को हर वर्ष 2 लाख रुपये तक क्लाउड सेवाओं का रिम्बर्समेंट भी मिलेगा, जिससे टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों की परिचालन लागत कम होगी।
AI और डीप-टेक स्टार्टअप्स पर रहेगा विशेष फोकस
सरकार ने इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, एयरोस्पेस और अन्य डीप-टेक क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी है। इन क्षेत्रों की बड़ी परियोजनाओं को 100 करोड़ रुपये तक की पेशेंट कैपिटल उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है, ताकि अत्याधुनिक तकनीक आधारित नवाचारों को बढ़ावा मिल सके।
स्वतंत्र यूपी स्टार्टअप मिशन का गठन
नई नीति के साथ स्वतंत्र यूपी स्टार्टअप मिशन को भी मंजूरी दी गई है। यह एक स्वायत्त संस्था के रूप में कार्य करेगा और अब स्टार्टअप्स से जुड़े सभी कामकाज की जिम्मेदारी यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन की जगह संभालेगा। मिशन की अगुवाई राज्य के मुख्य सचिव करेंगे।
महिला और पिछड़े क्षेत्रों के उद्यमियों को मिलेगा अतिरिक्त लाभ
सरकार ने महिला उद्यमियों, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर उद्यमियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष प्रोत्साहन की व्यवस्था को जारी रखा है। इसके अलावा पूर्वांचल और बुंदेलखंड में स्थापित स्टार्टअप्स को अतिरिक्त सहायता और प्रोत्साहन मिलता रहेगा, ताकि क्षेत्रीय असमानता कम हो और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें।
अंजलि सिंह की सफलता बनी प्रेरणा
लखनऊ जिले के भुलभुलपुर गांव की अंजलि सिंह इस नीति की सोच का एक उदाहरण हैं। उन्होंने मात्र 10 हजार रुपये की शुरुआती लागत से ‘जूट फॉर लाइफ’ नाम से स्टार्टअप शुरू किया, जो आज करीब 5 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है। इस उद्यम ने लगभग 250 महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराया है। सरकार का लक्ष्य ऐसे हजारों नए स्टार्टअप्स को तैयार करना है।
यूपी की ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था में होगी अहम भूमिका
योगी सरकार का मानना है कि नई स्टार्टअप पॉलिसी 2026 राज्य में नवाचार, रोजगार और निवेश को गति देगी। स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता, तकनीकी समर्थन और संस्थागत सहयोग देकर उत्तर प्रदेश को 2030 तक वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।


