दो साल तक लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। रिकॉर्ड हाई से करीब 25% फिसलने के बाद निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब गोल्ड में खरीदारी का सही समय आ गया है? दूसरी ओर, पोर्टफोलियो को मजबूत बनाने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग भी चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। ऐसे में Truvanta Wealth के फाउंडर और CEO कीर्तन शाह ने सोने और ग्लोबल निवेश को लेकर अपनी रणनीति साझा की है।
क्यों टूटा सोना?
कीर्तन शाह के मुताबिक, हालिया गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण रहे हैं। मार्च के दौरान दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों ने करीब 30 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचा। तुर्की ने अपनी कमजोर होती मुद्रा लीरा को संभालने के लिए गोल्ड रिजर्व बेचा, जबकि रूस ने यूक्रेन युद्ध से जुड़े खर्चों के लिए अपने भंडार का उपयोग किया।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बॉन्ड यील्ड बढ़ी, जिससे निवेशकों का रुझान फिक्स्ड इनकम एसेट्स की ओर बढ़ गया। वहीं डॉलर इंडेक्स मजबूत होने से भी सोने पर दबाव बना, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है और मजबूत डॉलर से इसकी मांग घट जाती है।
क्या अब सोने में निवेश का समय है?
कीर्तन शाह का मानना है कि अब धीरे-धीरे सोने में निवेश बढ़ाने का समय बन रहा है। उनका कहना है कि जिन वजहों से सोने की कीमतों में गिरावट आई थी, वही कारण अब इसके पक्ष में काम कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर युद्धों की तीव्रता कम होने से केंद्रीय बैंकों की फंडिंग जरूरतें घटेंगी और वे फिर से अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाने पर ध्यान देंगे। डी-डॉलराइजेशन की वैश्विक प्रवृत्ति भी सोने के लिए सकारात्मक संकेत है।
वर्तमान में केंद्रीय बैंकों की बैलेंस शीट में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 27% हो गई है, जबकि डॉलर रिजर्व का हिस्सा घटा है। अप्रैल से कई केंद्रीय बैंकों ने दोबारा सोना खरीदना शुरू कर दिया है। चीन लगातार 19 महीनों से गोल्ड खरीद रहा है और हाल के महीनों में उसकी खरीदारी सबसे अधिक रही है। साथ ही, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर पहले जैसी सख्ती की आशंका भी कम हुई है, जिससे सोने को आगे समर्थन मिल सकता है।
पोर्टफोलियो में ग्लोबल इन्वेस्टिंग क्यों जरूरी?
कीर्तन शाह का कहना है कि पिछले दो वर्षों ने यह साबित किया है कि बेहतर डायवर्सिफिकेशन के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग जरूरी है। दुनिया में कई ऐसे सेक्टर और बिजनेस मॉडल हैं जिनमें भारतीय निवेशकों को घरेलू बाजार के जरिए निवेश का अवसर नहीं मिलता।
इसके अलावा भारतीय रुपये में हर साल औसतन लगभग 4% की कमजोरी भी विदेशी निवेश को लंबी अवधि में लाभदायक बना सकती है। ऐसे में पोर्टफोलियो का एक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश करना समझदारी हो सकती है।
क्या अभी ग्लोबल बाजारों में निवेश करना चाहिए?
हालांकि कीर्तन शाह फिलहाल ग्लोबल बाजारों में नई खरीदारी को लेकर सतर्क नजरिया रखते हैं। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहले ही काफी तेजी आ चुकी है और अधिकांश अच्छी खबरें कीमतों में शामिल हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) थीम की तेजी अब कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित रह गई है। बड़े लैंग्वेज मॉडल (LLM) से जुड़ी कंपनियों पर प्राइसिंग का दबाव बढ़ रहा है। टोकन प्राइस इंडेक्स में भी गिरावट आई है, जबकि चीन के ओपन-सोर्स AI मॉडल अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ा रहे हैं।
अभी कहां हैं बेहतर अवसर?
कीर्तन शाह का मानना है कि यदि AI सेक्टर में करेक्शन आता है तो वैश्विक निवेशकों का ध्यान फिर से भारत की ओर लौट सकता है। भारतीय शेयर बाजार पिछले दो वर्षों से समय और वैल्यूएशन करेक्शन से गुजर रहा है, जिसके कारण कई सेक्टर अब आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं।
उनके अनुसार, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में चुनिंदा सेक्टर बेहतर अवसर प्रदान कर सकते हैं, जबकि सोने में भी धीरे-धीरे चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाई जा सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित एक्सपर्ट के निजी विचार हैं। किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


