नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें गिरकर एक बार फिर निचले स्तर पर आ गई हैं। लेकिन इस गिरावट के बावजूद आपके शहर में पेट्रोल और डीजल के दाम कम नहीं हुए हैं। आम जनता के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि जब ग्लोबल मार्केट में क्रूड सस्ता होता है, तो भारत में तेल के दाम तुरंत क्यों नहीं घटते?
सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के हालिया आंकड़े और पेट्रोलियम मंत्रालय के बयान इस पूरे गणित को साफ-साफ समझाते हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे की असली वजह।
1. तेल कंपनियों का बड़ा नुकसान (Negative Margin)
सबसे बड़ी वजह यह है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें आसमान छू रही थीं, तब भी घरेलू स्तर पर पेट्रोल-पंपों पर कीमतें ज्यादातर स्थिर रखी गईं। इसकी वजह से तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
ICICI सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक:
- डीजल पर नुकसान: कंपनियों को प्रति लीटर ₹18.9 का नुकसान उठाना पड़ा।
- पेट्रोल पर नुकसान: प्रति लीटर ₹6.0 का नुकसान हुआ।
- कुल नुकसान: केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, बाजार दरों से कम कीमत पर ईंधन (पेट्रोल, डीजल, LPG और ATF) बेचने के कारण OMCs को लगभग ₹75,000 करोड़ का नुकसान हुआ है।
सीधा गणित: जब कच्चा तेल सस्ता होता है, तो कंपनियां तुरंत दाम घटाने के बजाय सबसे पहले अपने इस पुराने घाटे की भरपाई करती हैं।
2. ‘पहले की खरीद’ का खेल (Time Lag)
आज आप पेट्रोल पंप पर जो ईंधन अपनी गाड़ी में डलवा रहे हैं, वह आज खरीदे गए कच्चे तेल से नहीं बना है। रिफाइनरियों में जो तेल आज प्रोसेस हो रहा है, उसे हफ्तों पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदा गया था। इसलिए, आज क्रूड ऑयल की कीमतों में जो गिरावट आई है, उसका असर घरेलू बाजार तक पहुंचने में समय (Time Lag) लगता है।
3. कच्चा तेल नहीं, रिफाइंड ईंधन की कीमतें हैं असली फैक्टर
एक आम धारणा है कि पेट्रोल-डीजल के दाम सिर्फ कच्चे तेल पर निर्भर करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। भारत में ईंधन की कीमतें सिंगापुर और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रिफाइन किए गए (साफ) ईंधन की कीमतों के आधार पर तय होती हैं। इसके साथ ही इसमें निम्नलिखित खर्च भी जुड़ते हैं:
- समुद्री ढुलाई और लॉजिस्टिक्स का खर्च
- तेल का बीमा (Insurance)
- डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर (Exchange Rate)
समझिए 1 लीटर पेट्रोल-डीजल की कीमत का गणित
आपके पास पहुंचने से पहले ईंधन की अंतिम कीमत इन ५ कड़ियों से मिलकर बनती है:
| घटक (Component) | विवरण (Details) |
| रिफाइनरी कीमत | अंतरराष्ट्रीय रिफाइंड ईंधन की कीमतों पर आधारित बेसिक लागत। |
| भाड़ा और रसद | डिपो और पेट्रोल पंपों तक ईंधन पहुंचाने का परिवहन खर्च। |
| डीलर कमीशन | पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को दिया जाने वाला कमीशन। |
| टैक्स | केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक्साइज ड्यूटी और राज्यों का वैट (VAT)। |
| रिटेल मार्जिन | तेल कंपनियों (OMCs) का मुनाफा या नुकसान। |
निष्कर्ष
जब तक तेल मार्केटिंग कंपनियों का पिछला घाटा पूरी तरह रिकवर नहीं हो जाता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिफाइंड ईंधन के दाम लंबे समय तक स्थिर नहीं रहते, तब तक कच्चे तेल में आई तात्कालिक गिरावट का सीधा और तुरंत फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलना मुश्किल होता है।


