नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में 5 जुलाई का दिन बेहद खास माना जाता है। इसी दिन वर्ष 1960 में देश के दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला का जन्म हुआ था। शेयर बाजार में उनकी सफलता इतनी शानदार रही कि उन्हें ‘बिग बुल’ और ‘भारत का वॉरेन बफे’ कहा जाने लगा।
राकेश झुनझुनवाला ने महज ₹5,000 के शुरुआती निवेश से अपनी निवेश यात्रा शुरू की थी। दूरदर्शिता, धैर्य, रिसर्च और सही समय पर फैसले लेने की क्षमता के दम पर उन्होंने करीब ₹40,000 करोड़ की संपत्ति बनाई। 14 अगस्त 2022 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके निवेश के सिद्धांत आज भी लाखों निवेशकों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।
बचपन से ही शेयर बाजार में थी दिलचस्पी
राकेश झुनझुनवाला का जन्म मुंबई में हुआ था। उनके पिता आयकर विभाग में वरिष्ठ अधिकारी थे। घर में अक्सर शेयर बाजार, अर्थव्यवस्था और कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर चर्चा होती रहती थी। इन्हीं चर्चाओं ने बचपन से ही राकेश के मन में शेयर बाजार को समझने की जिज्ञासा पैदा कर दी।
उन्होंने मुंबई के सिडेनहैम कॉलेज से कॉमर्स की पढ़ाई की और बाद में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बने। जब उन्होंने अपने पिता से शेयर बाजार में निवेश करने की इच्छा जताई तो पिता ने उन्हें सीधे पैसे देने के बजाय सलाह दी कि पहले बाजार को अच्छी तरह समझो और सीखो। इसके बाद उन्होंने दोस्तों और भाई से पैसे जुटाकर वर्ष 1985 में निवेश की शुरुआत की।
टाटा टी के शेयर से मिली पहली बड़ी सफलता
राकेश झुनझुनवाला की पहली बड़ी सफलता टाटा टी के शेयरों से मिली। उन्होंने करीब ₹43 प्रति शेयर के भाव पर निवेश किया था। कुछ ही महीनों में शेयर की कीमत बढ़कर लगभग ₹143 पहुंच गई।
इस सौदे से उन्हें शानदार मुनाफा हुआ और यहीं से उनकी पहचान बाजार में बनने लगी। पहली सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने रिसर्च आधारित निवेश की रणनीति को और मजबूत किया।
मंदी में तलाशे मौके, कमाया बड़ा मुनाफा
राकेश झुनझुनवाला की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे बाजार की गिरावट से डरते नहीं थे। जब दूसरे निवेशक अच्छे शेयरों से दूरी बना रहे होते थे, तब वे मजबूत कंपनियों में निवेश के अवसर तलाशते थे।
उन्होंने एक समय सेसा गोवा (अब वेदांता समूह का हिस्सा) के करीब 4 लाख शेयर खरीदे थे, जब धातु क्षेत्र दबाव में था। बाद में कंपनी के प्रदर्शन में सुधार हुआ और इस निवेश से उन्हें शानदार रिटर्न मिला।
इसी तरह उन्होंने प्राज इंडस्ट्रीज में भी निवेश किया, जहां उन्हें लगभग 250 प्रतिशत तक का रिटर्न मिला।
टाइटन बना सबसे बड़ा मल्टीबैगर निवेश
राकेश झुनझुनवाला के निवेश करियर का सबसे चर्चित फैसला टाइटन कंपनी में किया गया निवेश माना जाता है।
साल 2000 के आसपास जब अधिकांश निवेशक इस शेयर को लेकर उत्साहित नहीं थे, तब झुनझुनवाला ने कंपनी में बड़ा निवेश किया। उन्हें भरोसा था कि भारत में बढ़ती आय, ब्रांडेड ज्वेलरी और घड़ियों की मांग भविष्य में कंपनी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
उनकी यह सोच बिल्कुल सही साबित हुई। आने वाले वर्षों में टाइटन का शेयर कई हजार प्रतिशत तक चढ़ा और यह उनके पोर्टफोलियो का सबसे मूल्यवान निवेश बन गया। यही निवेश उन्हें हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति तक पहुंचाने वाला सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
सिर्फ निवेशक ही नहीं, सफल उद्यमी भी थे
राकेश झुनझुनवाला केवल शेयर खरीदने-बेचने तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने अपनी निवेश कंपनी Rare Enterprises की स्थापना की।
इसके अलावा वे Aptech और Hungama Media जैसी कंपनियों से भी जुड़े रहे। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने एविएशन सेक्टर में बड़ा कदम उठाते हुए Akasa Air की शुरुआत की।
अकासा एयर उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था, जिसका उद्देश्य भारत में कम लागत वाली और आधुनिक एयरलाइन सेवा उपलब्ध कराना था।
राकेश झुनझुनवाला के 5 गुरुमंत्र, जो आज भी हर निवेशक के लिए हैं बेहद काम के
1. लंबी अवधि का निवेश ही असली दौलत बनाता है
झुनझुनवाला का मानना था कि शेयर बाजार में सबसे बड़ा फायदा उन्हीं लोगों को मिलता है जो अच्छे व्यवसायों में लंबे समय तक निवेश बनाए रखते हैं। रोजाना के उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया देने के बजाय कंपनी की दीर्घकालिक क्षमता पर भरोसा करना चाहिए।
2. बाजार की गिरावट से घबराएं नहीं
उनका कहना था कि बाजार में गिरावट निवेशकों के लिए अवसर लेकर आती है। अगर किसी मजबूत कंपनी का शेयर केवल बाजार की कमजोरी के कारण गिर रहा है, तो यह निवेश बढ़ाने का मौका हो सकता है।
3. बिना रिसर्च के कभी निवेश न करें
वे हमेशा सलाह देते थे कि किसी भी कंपनी में पैसा लगाने से पहले उसके बिजनेस मॉडल, मैनेजमेंट, कर्ज, कमाई और भविष्य की संभावनाओं को अच्छी तरह समझें।
दूसरों की सलाह या सोशल मीडिया की अफवाहों के आधार पर निवेश करना नुकसानदायक हो सकता है।
4. अपनी गलतियों से सीखें
राकेश झुनझुनवाला खुलकर स्वीकार करते थे कि उन्होंने भी अपने निवेश करियर में कई गलत फैसले लिए हैं। लेकिन हर गलती से सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफल निवेशक की पहचान है।
उनका मानना था कि बाजार हर दिन कुछ नया सिखाता है और सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती।
5. हमेशा पोर्टफोलियो में विविधता रखें
वे किसी एक सेक्टर या एक ही कंपनी में पूरा पैसा लगाने के पक्ष में नहीं थे। उनका मानना था कि अलग-अलग सेक्टरों और कंपनियों में निवेश करने से जोखिम कम होता है और लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
आज भी क्यों प्रासंगिक हैं उनके निवेश के सिद्धांत?
आज शेयर बाजार पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, डिजिटल और अस्थिर हो चुका है। इसके बावजूद राकेश झुनझुनवाला के निवेश सिद्धांत पहले जितने ही प्रासंगिक हैं। लंबी अवधि का नजरिया, मजबूत कंपनियों का चयन, धैर्य, रिसर्च और गिरावट में अवसर तलाशने की सोच आज भी सफल निवेश की बुनियाद मानी जाती है।
नए निवेशकों के लिए उनकी यात्रा यह साबित करती है कि बड़ी पूंजी से नहीं, बल्कि सही सोच, अनुशासन और धैर्य से भी शेयर बाजार में असाधारण सफलता हासिल की जा सकती है।
निष्कर्ष
राकेश झुनझुनवाला की कहानी केवल करोड़ों रुपये कमाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह विश्वास, धैर्य और सही निवेश दर्शन की मिसाल भी है। ₹5,000 से शुरू हुई उनकी यात्रा करीब ₹40,000 करोड़ की संपत्ति तक पहुंची, जो यह दिखाती है कि शेयर बाजार में सफलता रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि वर्षों की समझ, अनुशासन और लगातार सीखने से हासिल होती है। उनके बताए पांच गुरुमंत्र आज भी हर छोटे और बड़े निवेशक के लिए उतने ही उपयोगी हैं जितने उनके समय में थे।


