Air India Fined: एयर इंडिया द्वारा एक बुजुर्ग दंपति की पहले से बुक की गई सीटें बदलना कंपनी को महंगा पड़ गया। पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एयरलाइन को निर्देश दिया है कि वह पीड़ित दंपति को 60,000 रुपये का मुआवजा दे। आयोग ने माना कि एयर इंडिया की लापरवाही के कारण सर्जरी करा चुके वरिष्ठ नागरिक को लंबी उड़ान के दौरान गंभीर शारीरिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
14 घंटे की फ्लाइट में बदल दी गई बुक की हुई सीट
यह मामला पंजाब के शहीद भगत सिंह नगर (SBS Nagar) जिले के उरापर गांव के रहने वाले अमरजीत सिंह रल्ला और उनकी पत्नी परमजीत कौर रल्ला से जुड़ा है। दोनों वरिष्ठ नागरिक एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए एयर इंडिया की AI-0188 फ्लाइट से यात्रा करने वाले थे।
दंपति ने ‘मान ट्रैवल्स’ नामक ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से पहले ही 17A और 17B सीटें बुक कर ली थीं। लेकिन बोर्डिंग के समय एयर इंडिया ने बिना उनकी सहमति के सीट बदलकर उन्हें 19D सीट आवंटित कर दी। शिकायत के अनुसार नई सीट पर लेगरूम काफी कम था, जिससे यात्रा बेहद असुविधाजनक हो गई।
हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी करा चुके थे अमरजीत सिंह
मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि अमरजीत सिंह की पहले हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी हो चुकी थी। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उन्हें लंबी यात्रा के दौरान अधिक लेगरूम वाली सीट की आवश्यकता थी।
हालांकि एयर इंडिया द्वारा सीट बदल दिए जाने के कारण उन्हें लगभग 14 घंटे की पूरी उड़ान कम जगह वाली सीट पर बैठकर यात्रा करनी पड़ी। यात्रा समाप्त होने के बाद उनकी स्थिति और बिगड़ गई।
शिकायत के अनुसार उन्हें:
- रीढ़ की हड्डी में तेज दर्द हुआ।
- पैरों में सूजन आ गई।
- लगभग एक महीने तक बिस्तर पर आराम करना पड़ा।
- जिस पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए यात्रा की थी, उसमें भी शामिल नहीं हो सके।
पत्नी को भी पति से अलग बैठना पड़ा
सीट बदलने का असर केवल अमरजीत सिंह तक सीमित नहीं रहा। उनकी पत्नी परमजीत कौर को भी उड़ान के दौरान अपने पति से अलग बैठना पड़ा।
आयोग ने माना कि एक वरिष्ठ नागरिक दंपति को अलग-अलग बैठाने से उन्हें मानसिक तनाव, अपमान और चिंता का सामना करना पड़ा। खासकर उस समय जब पति स्वास्थ्य संबंधी परेशानी झेल रहे थे।
एयर इंडिया और ट्रैवल एजेंसी से नहीं मिला संतोषजनक जवाब
घटना के बाद दंपति ने एयर इंडिया और ट्रैवल एजेंसी से शिकायत की, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला।
इसके बाद उन्होंने अपने अधिकृत प्रतिनिधि डॉ. पी.जे.एस. रल्ला, जो परिवार के सदस्य होने के साथ-साथ एक प्रैक्टिसिंग डॉक्टर भी हैं, के माध्यम से शहीद भगत सिंह नगर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में की गई थीं ये प्रमुख मांगें
दंपति ने आयोग के सामने कई मांगें रखीं, जिनमें शामिल थीं:
- टिकट की पूरी राशि 12% ब्याज सहित वापस की जाए।
- इलाज के खर्च के लिए 50,000 रुपये दिए जाएं।
- शारीरिक और मानसिक पीड़ा के लिए उचित मुआवजा मिले।
- मुकदमे के खर्च के रूप में 50,000 रुपये प्रदान किए जाएं, क्योंकि उनके प्रतिनिधि डॉक्टर को अपनी पेशेवर प्रैक्टिस छोड़कर केस लड़ना पड़ा।
जिला आयोग ने पहले दिया था ₹40,000 मुआवजा
मामले की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार किया।
आयोग ने एयर इंडिया को 40,000 रुपये का एकमुश्त मुआवजा देने का आदेश दिया, जिसमें मुकदमे का खर्च भी शामिल था।
वहीं, ट्रैवल एजेंसी मान ट्रैवल्स आयोग के सामने पेश नहीं हुई, जिसके चलते उसके खिलाफ एकतरफा (Ex-Parte) कार्रवाई की गई।
पंजाब राज्य आयोग ने बढ़ाया मुआवजा
जिला आयोग के फैसले से असंतुष्ट होकर दंपति ने पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील दायर की।
उन्होंने दलील दी कि 40,000 रुपये का मुआवजा उस शारीरिक और मानसिक नुकसान की तुलना में बेहद कम है, जिसका उन्हें सामना करना पड़ा।
मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष जस्टिस दया चौधरी तथा सदस्य सिमरजोत कौर और विश्व कांत गर्ग की पीठ ने की।
आयोग ने माना- एयर इंडिया की सेवा में थी स्पष्ट कमी
राज्य आयोग ने अपने आदेश में कहा कि:
- एयर इंडिया की ओर से सेवा में स्पष्ट कमी (Deficiency in Service) रही।
- एयरलाइन ने वरिष्ठ नागरिक यात्री की स्वास्थ्य स्थिति को नजरअंदाज किया।
- रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि शिकायतकर्ता को वास्तविक शारीरिक और मानसिक पीड़ा हुई।
- जिला आयोग द्वारा तय किया गया मुआवजा पर्याप्त नहीं था।
इन्हीं आधारों पर आयोग ने मुआवजे की राशि 40,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दी।
एयर इंडिया को आदेश का पालन करने के निर्देश
पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग ने एयर इंडिया को निर्देश दिया है कि वह निर्धारित समय के भीतर 60,000 रुपये का मुआवजा अदा करे। यह राशि मानसिक कष्ट, शारीरिक उत्पीड़न और मुकदमे के खर्च को ध्यान में रखते हुए तय की गई है।
आयोग ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि एयरलाइन यात्रियों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे यात्रियों की सुविधाओं की अनदेखी नहीं कर सकती।
वरिष्ठ नागरिक यात्रियों के अधिकार क्यों हैं महत्वपूर्ण?
यह फैसला केवल एक दंपति के मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी एयरलाइंस के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है। यदि किसी यात्री ने विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सीट बुक की है, तो बिना उचित कारण और बिना सहमति के सीट बदलना सेवा में कमी माना जा सकता है।
विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांग यात्री या गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे यात्रियों के मामलों में एयरलाइंस की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उपभोक्ता आयोग का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में यात्रियों के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।


