देश में चिप प्रोजेक्ट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि लगभग दो दशक पहले ही उन्होंने सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने की पूरी योजना तैयार कर ली थी, लेकिन तत्कालीन केंद्र सरकार के असहयोग के कारण वह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका।
पीएम मोदी ने सुनाई 20 साल पुरानी कहानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के साणंद में CG Semi के आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (OSAT) प्लांट का उद्घाटन किया। इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने पुराने दिनों के इस अधूरे सपने को याद किया।
क्या बोले पीएम मोदी?
अपनी पुरानी योजना का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा:
“20 साल पहले, शायद उससे भी पहले, मैंने गुजरात में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने का पूरा प्लान तैयार किया था। मैंने गांधीनगर और प्रांतिज के पास 350 से 400 एकड़ जमीन भी तय कर ली थी और कुछ कंपनियों से बातचीत भी हो चुकी थी। उस समय भारत सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही थी, जिससे कंपनियां बातचीत के लिए आती थीं। लेकिन न जाने क्यों, तत्कालीन केंद्र सरकार के पैर जैसे बेड़ियों में जकड़े हुए थे और मामला आगे नहीं बढ़ सका।”
पीएम मोदी ने आगे कहा, “जब मैं उस समय इस विषय पर बात करता था, तो मीडिया मेरा मजाक उड़ाता था। तब यह नहीं हो सका, लेकिन आज इसे हकीकत बनते देख मुझे दिल से बेहद खुशी हो रही है।”
सेमीकंडक्टर हब बनने का सफर: नीतियां और निवेश
भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने के लिए सालों से कोशिशें चल रही हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें तेजी आई है:
- 2007-2009 की नीति: जनवरी 2009 में तत्कालीन आईटी मंत्री ए. राजा ने कहा था कि 2007 की सेमीकंडक्टर नीति के तहत 1.57 लाख करोड़ रुपये के 17 प्रस्ताव मिले थे, लेकिन यह इंडस्ट्री रफ्तार नहीं पकड़ सकी।
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 (2021): मोदी सरकार ने दिसंबर 2021 में 76,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ इस मिशन को मंजूरी दी, जिसमें कंपनियों को 50% तक की वित्तीय मदद दी गई।
- मिशन 2.0 (बजट 2026-27): सरकार ने अब रिसर्च और वर्कफोर्स ट्रेनिंग के लिए 1000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन के साथ मिशन 2.0 की घोषणा की है।
- बड़ा निवेश: दिसंबर 2025 तक सरकार ने 6 राज्यों में 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
कितना बड़ा है भारतीय चिप बाजार?
भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार का आकार जो 2023 में 38 अरब डॉलर था, उसके साल 2030 तक 100 से 110 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
विदेशी बाजारों में गूंजेगा भारत का नाम
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि साणंद प्लांट में बनने वाली चिप्स का इस्तेमाल कारों, स्कूटरों और अन्य औद्योगिक उपकरणों में किया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि यहां बनी चिप्स को जापान, अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक्सपोर्ट किया जाएगा, जिससे वैश्विक स्तर पर भारतीय तकनीक की मजबूत पहचान बनेगी।

