नई दिल्ली: भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी और अदाणी समूह से जुड़े चर्चित अमेरिकी आपराधिक मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने अदालत में दायर विस्तृत दस्तावेज में गौतम अदाणी और सात अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला वापस लेने के अपने फैसले का जोरदार बचाव किया है। विभाग ने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला कानूनी रूप से कमजोर, कूटनीतिक दृष्टि से नुकसानदेह और अमेरिकी सरकार की नई प्रवर्तन (Enforcement) प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं था। इतना ही नहीं, DOJ ने यह तक कह दिया कि “यह मामला एक साल पहले ही समाप्त कर दिया जाना चाहिए था या फिर इसे कभी शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी संघीय अदालत के जज ने न्याय विभाग से पूछा था कि वह आरोप-पत्र को स्थायी रूप से खारिज करने के पीछे ठोस कानूनी कारण क्यों नहीं बता रहा है। अब विभाग ने 10 पन्नों की विस्तृत फाइलिंग के जरिए अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
अदालत ने मांगा था जवाब
अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गैराफिस ने DOJ से सवाल किया था कि आखिर वह आरोपों को “विद प्रेजुडिस” यानी हमेशा के लिए खारिज क्यों करना चाहता है। जज ने पहले दायर की गई याचिका को बेहद संक्षिप्त और अपर्याप्त बताया था।
इसके बाद न्याय विभाग ने विस्तृत जवाब दाखिल करते हुए कहा कि अदालत की भूमिका सीमित है और अभियोजन पक्ष को यह अधिकार है कि वह परिस्थितियों और सरकारी नीतियों के आधार पर मामला वापस लेने का निर्णय ले।
क्या था पूरा मामला?
साल 2024 में तत्कालीन बाइडेन प्रशासन के दौरान अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अदाणी और उनके सहयोगियों पर लगभग 25 करोड़ डॉलर की कथित रिश्वत योजना से जुड़े आरोप लगाए थे। आरोप था कि भारतीय सरकारी अधिकारियों से जुड़े सौदों में रिश्वत देकर अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के लिए लाभ हासिल किया गया और अमेरिकी निवेशकों के सामने कंपनी से जुड़ी कुछ जानकारियां सही तरीके से प्रस्तुत नहीं की गईं।
हालांकि अब ट्रंप प्रशासन के तहत न्याय विभाग इस पूरे मामले को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं दिख रहा है।
DOJ ने केस बंद करने की बताईं 6 प्रमुख वजहें
1. यह मूल रूप से भारत का मामला है
न्याय विभाग ने अदालत में कहा कि यह मामला भारतीय नागरिकों, भारत सरकार से जुड़े अनुबंधों और भारत की बिजली परियोजनाओं से संबंधित है। ऐसे मामलों में अमेरिकी एजेंसियों को दुनिया भर के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। विभाग का कहना है कि भारत अपने कानूनी और प्रशासनिक ढांचे के माध्यम से ऐसे मामलों को संभालने में सक्षम है।
2. भारत में पहले ही जांच हो चुकी
DOJ ने अदालत को बताया कि भारतीय अधिकारियों ने संबंधित तथ्यों की जांच की थी और उन्हें ऐसी कोई आपराधिक गतिविधि नहीं मिली, जिससे अमेरिकी आपराधिक मुकदमे को आगे बढ़ाने की आवश्यकता साबित हो सके।
3. अमेरिकी निवेशकों को आर्थिक नुकसान नहीं हुआ
फाइलिंग में कहा गया कि इस मामले में अमेरिकी निवेशकों का कोई प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान नहीं हुआ। जिन वित्तीय व्यवस्थाओं का जिक्र किया गया था, वे या तो पूरी तरह चुकाई जा चुकी हैं या सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। इसलिए बड़े निवेशक नुकसान का आधार भी मजबूत नहीं बनता।
4. कानूनी आधार कमजोर था
DOJ ने कहा कि कथित धोखाधड़ी के आरोपों को अदालत में साबित करना कठिन होता। विभाग के अनुसार कंपनी की ओर से किए गए कई बयान सामान्य कॉर्पोरेट दावे या व्यावसायिक अनुमान की श्रेणी में आते हैं, जिन्हें आपराधिक धोखाधड़ी का मजबूत आधार नहीं माना जा सकता।
5. सबूत और गवाह भारत में मौजूद
न्याय विभाग ने यह भी कहा कि अधिकांश दस्तावेज, गवाह और संबंधित सबूत भारत में हैं। इसके अलावा यह संभावना भी बेहद कम है कि सभी आरोपी अमेरिकी अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होंगे। ऐसे में मुकदमे को प्रभावी ढंग से चलाना व्यावहारिक रूप से कठिन है।
6. नई सरकार की प्रवर्तन प्राथमिकताएं बदल गई हैं
DOJ ने कहा कि वर्तमान प्रशासन अब उन मामलों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है जो अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध या अमेरिकी कंपनियों को सीधे नुकसान पहुंचाने वाले अपराधों से जुड़े हों। अदाणी से संबंधित यह मामला इन नई प्राथमिकताओं में शामिल नहीं होता।
निवेश सौदे के बदले केस बंद करने के आरोपों का खंडन
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अदाणी समूह के संभावित अमेरिकी निवेश के बदले यह मामला वापस लिया गया है। हालांकि न्याय विभाग ने अदालत में इस तरह की सभी अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि मामला वापस लेने का निर्णय पूरी तरह कानूनी और नीतिगत कारणों पर आधारित है। संभावित निवेश या व्यावसायिक समझौतों का इस फैसले से कोई संबंध नहीं है।
आगे क्या होगा?
अब अंतिम फैसला अमेरिकी संघीय अदालत को करना है कि वह DOJ की मांग स्वीकार करते हुए आरोप-पत्र को स्थायी रूप से खारिज करती है या नहीं। यदि अदालत विभाग की दलीलों से सहमत होती है, तो गौतम अदाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ यह आपराधिक मामला हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है।
हालांकि इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट मुकदमों, सीमा-पार कानूनी अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) और अमेरिकी प्रवर्तन नीतियों को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।


