Share Market Crash: घरेलू शेयर बाजार में लगातार सातवें कारोबारी दिन बिकवाली का दबाव देखने को मिल रहा है। कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 गिरकर 24,000 के करीब पहुंच गया।
बाजार के व्यापक स्तर पर भी कमजोरी दिखाई दे रही है। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में करीब आधे-आधे फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। खास तौर पर FMCG और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों पर दबाव बाजार की कमजोरी बढ़ा रहा है।
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
बुधवार को करीब 11:44 बजे सेंसेक्स 348.59 अंक यानी 0.45% की गिरावट के साथ 76,886.87 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 में 104.70 अंक यानी 0.43% की गिरावट थी और यह 24,050.20 के स्तर पर पहुंच गया था।
इंट्रा-डे कारोबार में सेंसेक्स 411.55 अंक तक गिरकर 76,823.91 और निफ्टी 127 अंक तक टूटकर 24,027.90 के स्तर पर आ गया था।
10 अगस्त के करीब फ्लैट क्लोजिंग स्तर 24,583.80 से तुलना करें तो निफ्टी अपने इंट्रा-डे निचले स्तर तक करीब 556 अंक फिसल चुका है। वहीं 13 अगस्त को 78,079.96 पर बंद हुए सेंसेक्स से चार कारोबारी दिनों में करीब 1,256 अंकों की गिरावट देखी गई है।
Share Market Crash की 4 बड़ी वजहें
1. ट्रंप के नक्शे से बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हॉर्मुज को लेकर जारी किए गए नक्शे ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। दूसरी तरफ ईरान ने बातचीत को लेकर सख्त रुख अपनाया है और कहा है कि किसी भी बातचीत की शर्तें ईरान तय करेगा।
हॉर्मुज क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यहां तनाव बढ़ने की आशंका से निवेशकों में चिंता बढ़ी है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और उन कंपनियों पर पड़ सकता है जिनकी लागत तेल की कीमतों से प्रभावित होती है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी देखने को मिली। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
महंगा कच्चा तेल भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता का विषय है। इससे आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई तथा कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ सकता है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में तेजी का असर शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर भी दिखाई दे रहा है।
3. एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली
भारतीय बाजार को एशियाई शेयर बाजारों से भी मजबूत सपोर्ट नहीं मिला। बुधवार को कई प्रमुख एशियाई बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
दक्षिण कोरिया का KOSPI 5% से अधिक, जापान का Nikkei 225 करीब 3%, चीन का Shanghai Composite 2% से अधिक और ताइवान का Taiwan Weighted Index करीब डेढ़ फीसदी कमजोर रहा।
इसके अलावा थाईलैंड के SET Composite और सिंगापुर के Straits Times Index में भी गिरावट देखी गई। हालांकि हॉन्ग कॉन्ग के Hang Seng में मामूली मजबूती दिखाई दी।
एशियाई बाजारों में इतनी व्यापक बिकवाली का असर भारतीय निवेशकों के सेंटीमेंट पर भी पड़ा और बाजार खुलने के बाद दबाव और बढ़ गया।
4. FMCG और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों पर दबाव
बाजार में किसी भी बड़े सेक्टर में फिलहाल खास मजबूती नहीं दिखाई दे रही है। हालांकि FMCG कंपनियों और हैवीवेट प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में गिरावट ने निफ्टी पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
निफ्टी में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले बैंकिंग शेयरों में बिकवाली होने पर पूरे इंडेक्स पर इसका असर पड़ता है। इसी तरह FMCG जैसे डिफेंसिव सेक्टर में कमजोरी बाजार में निवेशकों के सतर्क रुख का संकेत देती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
मौजूदा गिरावट के पीछे सिर्फ घरेलू कारण नहीं हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और एशियाई बाजारों की कमजोरी जैसे वैश्विक कारण भारतीय बाजार पर दबाव बना रहे हैं।
ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और बाजार की व्यापक दिशा पर नजर रखनी चाहिए। खासकर ऐसे शेयरों में जोखिम अधिक हो सकता है जिनकी कमाई कच्चे तेल की कीमतों या वैश्विक परिस्थितियों से ज्यादा प्रभावित होती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या निवेश विकल्प में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। NewsJagran.in किसी निवेश की गारंटी या व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं देता।


