भारत की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र (Service Sector) की बढ़ती भूमिका को देखते हुए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) पहली बार 14 जुलाई को सेवा उत्पादन सूचकांक (Index of Service Production – ISP) जारी करेगा। यह सूचकांक ठीक उसी तरह हर महीने जारी किया जाएगा, जैसे अभी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production – IIP) जारी होता है।
इस नए इंडेक्स का उद्देश्य देश के सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को नियमित रूप से मापना है, जिससे आर्थिक स्थिति का अधिक सटीक और समयबद्ध आकलन किया जा सके।
14 जुलाई को पहली बार जारी होगा ISP
अब तक भारत में उद्योगों की गतिविधियों को मापने के लिए IIP का उपयोग किया जाता था, लेकिन सेवा क्षेत्र के लिए ऐसा कोई मासिक सूचकांक उपलब्ध नहीं था। जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान लगातार बढ़ रहा है।
इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने Index of Service Production (ISP) तैयार किया है। इसका पहला आधिकारिक डेटा 14 जुलाई को जारी किया जाएगा और इसके बाद यह नियमित रूप से प्रकाशित होगा।
GDP में 50% से ज्यादा है सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी
भारत की कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में सेवा क्षेत्र का योगदान 50 प्रतिशत से अधिक है। बैंकिंग, बीमा, परिवहन, आईटी, रियल एस्टेट, संचार और प्रोफेशनल सेवाएं देश की आर्थिक वृद्धि की प्रमुख ताकत बन चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले एक-दो वर्षों में भारत का सेवा निर्यात (Services Export) वस्तुओं (Merchandise Export) के निर्यात से भी आगे निकल सकता है।
ऐसे में इस सेक्टर के प्रदर्शन को हर महीने ट्रैक करने वाला सूचकांक नीति निर्माताओं और निवेशकों दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
ISP में किन-किन क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा?
सेवा उत्पादन सूचकांक तैयार करने के लिए कई प्रमुख सेवा गतिविधियों के आंकड़ों को शामिल किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल होंगे—
- एयर ट्रांसपोर्ट
- भारतीय रेलवे
- अन्य परिवहन सेवाएं
- बैंकिंग सेवाएं
- बीमा (Insurance)
- थोक एवं खुदरा व्यापार (GST डेटा के आधार पर)
- संचार सेवाएं
- रियल एस्टेट
- सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एवं कंप्यूटर सेवाएं
- प्रोफेशनल सेवाएं
- अनुसंधान एवं विकास (R&D)
- मनोरंजन एवं मीडिया सेवाएं
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में स्वास्थ्य (Healthcare) और शिक्षा (Education) से जुड़ी सेवाओं को भी इस सूचकांक में शामिल किया जाएगा।
किन सेवाओं को नहीं मिलेगा स्थान?
हालांकि सभी सेवा गतिविधियां ISP का हिस्सा नहीं होंगी। कुछ क्षेत्रों को फिलहाल इस सूचकांक से बाहर रखा गया है।
इनमें शामिल हैं—
- सार्वजनिक प्रशासन
- रक्षा सेवाएं
- बैंकिंग और बीमा को छोड़ अन्य वित्तीय सेवाएं
- सामाजिक सेवाएं
- व्यक्तिगत सेवाएं
- जुआ और सट्टेबाजी से जुड़ी गतिविधियां
- अनौपचारिक (Informal) सेवा क्षेत्र
सरकार का कहना है कि फिलहाल विश्वसनीय और नियमित डेटा उपलब्ध होने वाले संगठित सेवा क्षेत्रों को ही इसमें शामिल किया गया है।
कैसे तैयार होगा सेवा उत्पादन सूचकांक?
ISP तैयार करने के लिए मात्रा (Volume) और मूल्य (Value) दोनों प्रकार के आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा।
उदाहरण के लिए—
- रेलवे और हवाई परिवहन में यात्रियों की संख्या, यात्री-किलोमीटर और माल ढुलाई जैसे मात्रा आधारित संकेतकों का उपयोग होगा।
- वहीं बैंकिंग, बीमा, आईटी, रियल एस्टेट और अन्य सेवाओं के लिए सेवा से प्राप्त राजस्व एवं आर्थिक मूल्य को आधार बनाया जाएगा।
इस मिश्रित पद्धति से सेवा क्षेत्र की वास्तविक आर्थिक गतिविधियों का अधिक सटीक आकलन संभव होगा।
अर्थव्यवस्था की निगरानी होगी आसान
अब तक उद्योगों के प्रदर्शन के लिए IIP उपलब्ध था, लेकिन सेवा क्षेत्र की मासिक तस्वीर स्पष्ट नहीं मिल पाती थी। ISP आने के बाद सरकार और नीति निर्माता अर्थव्यवस्था की स्थिति का अधिक व्यापक विश्लेषण कर सकेंगे।
इससे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहायता मिलेगी—
- आर्थिक गतिविधियों की नियमित निगरानी
- GDP के अनुमान को अधिक सटीक बनाना
- सरकारी नीतियों का समय पर मूल्यांकन
- निवेश एवं आर्थिक शोध को बेहतर आधार
- राष्ट्रीय आय (National Accounts) तैयार करने में सहायता
निवेशकों और कारोबारियों को क्या होगा फायदा?
सेवा क्षेत्र से जुड़े कंपनियों, निवेशकों और आर्थिक विश्लेषकों के लिए ISP एक महत्वपूर्ण संकेतक बन सकता है। हर महीने आने वाले आंकड़ों से यह पता चलेगा कि बैंकिंग, परिवहन, आईटी, रियल एस्टेट और अन्य सेवा क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां किस दिशा में बढ़ रही हैं।
इससे बाजार की धारणा, निवेश रणनीति और आर्थिक पूर्वानुमानों को भी बेहतर आधार मिलेगा।
निष्कर्ष
भारत की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी को देखते हुए सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) की शुरुआत एक महत्वपूर्ण सुधार मानी जा रही है। 14 जुलाई को पहली बार जारी होने वाला यह सूचकांक देश की आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक तस्वीर सामने लाएगा। इससे सरकार, उद्योग, निवेशकों और शोध संस्थानों को सेवा क्षेत्र के प्रदर्शन का समयबद्ध और विश्वसनीय आकलन मिलेगा, जिससे भविष्य की आर्थिक नीतियां अधिक प्रभावी ढंग से बनाई जा सकेंगी।


