नई दिल्ली: भारत और फ्रांस ने अपनी रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण और फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त एवं उद्योग मंत्री रोलैंड लेस्क्योर की संयुक्त अध्यक्षता में फ्रांस के ऐक्स-एन-प्रोवेंस में आयोजित भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (Economic and Financial Dialogue) के दौरान दोनों देशों ने निवेश, व्यापार, क्रिटिकल मिनरल्स, हाई-स्पीड रेल, वित्तीय सहयोग और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब भारत और फ्रांस रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों में अपने सहयोग का लगातार विस्तार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी और निजी निवेश के नए अवसर खुलेंगे।
फरवरी 2026 की सहमति का परिणाम
यह बैठक फरवरी 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच हुई सहमति का परिणाम है। उस दौरान दोनों नेताओं ने वर्ष 2026 में भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद आयोजित करने का निर्णय लिया था, ताकि द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को संस्थागत रूप से और मजबूत बनाया जा सके।
इस पहल का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग के लिए एक स्थायी मंच तैयार करना भी है।
निवेश और व्यापार बढ़ाने पर विशेष जोर
बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देने और कंपनियों के बीच क्रॉस-इनवेस्टमेंट को प्रोत्साहित करने पर विस्तार से चर्चा की। भारत ने फ्रांसीसी कंपनियों को विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसरों से अवगत कराया, जबकि फ्रांस ने भारतीय कंपनियों के लिए अपने बाजार में उपलब्ध संभावनाओं को साझा किया।
दोनों पक्षों का मानना है कि मजबूत निवेश संबंध रोजगार सृजन, तकनीकी हस्तांतरण और आर्थिक विकास को नई दिशा देंगे।
क्रिटिकल मिनरल्स पर बढ़ेगा सहयोग
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय क्रिटिकल मिनरल्स रहा। इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, बैटरी निर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक इन महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है।
भारत और फ्रांस ने इस क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, नई परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने और तकनीकी साझेदारी विकसित करने पर सहमति जताई। इससे दोनों देशों की आर्थिक सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं पर भी हुई चर्चा
बैठक में हाई-स्पीड रेल क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। फ्रांस को हाई-स्पीड रेल तकनीक और संचालन में वैश्विक अनुभव हासिल है, जबकि भारत तेजी से अपने आधुनिक रेल नेटवर्क का विस्तार कर रहा है।
दोनों देशों ने तकनीकी सहयोग, परियोजना विकास और भविष्य की संभावित साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।
वैश्विक आर्थिक मंचों पर बढ़ेगा समन्वय
भारत और फ्रांस ने G20 तथा Paris Club जैसे वैश्विक आर्थिक मंचों पर बेहतर समन्वय बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की मौजूदा चुनौतियों, वित्तीय स्थिरता और सतत विकास जैसे मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए।
बैठक में आर्थिक सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
वित्तीय क्षेत्रों को जोड़ने की तैयारी
दोनों देशों ने वित्तीय संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने और पूंजी बाजारों को अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने के लिए नए प्रस्तावों पर विचार किया। इससे निवेशकों को नए अवसर मिल सकते हैं और द्विपक्षीय वित्तीय गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय क्षेत्र में गहरा सहयोग भारत और फ्रांस के व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करेगा।
फ्रांसीसी विकास एजेंसी की भूमिका की सराहना
बैठक के दौरान भारत में फ्रांसीसी विकास एजेंसी (French Development Agency) द्वारा संचालित विकास परियोजनाओं की भी सराहना की गई। दोनों पक्षों ने भविष्य में शहरी विकास, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा और सतत बुनियादी ढांचे जैसी परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।
2027 में होगा अगला आर्थिक एवं वित्तीय संवाद
बैठक के समापन पर दोनों देशों ने सहमति जताई कि भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद भविष्य में आर्थिक, वित्तीय, तकनीकी, निवेश और व्यापार संबंधी मुद्दों पर नियमित चर्चा का प्रमुख मंच बना रहेगा। साथ ही वर्ष 2027 में इस संवाद का अगला संस्करण आयोजित करने की दिशा में भी सहमति बनी।
भारत-फ्रांस साझेदारी क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत और फ्रांस के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी करीबी सहयोगी हैं। अब आर्थिक और वित्तीय सहयोग को नई मजबूती मिलने से दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और व्यापक होने की संभावना है।
क्रिटिकल मिनरल्स, हाई-स्पीड रेल, स्वच्छ ऊर्जा और वित्तीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में बढ़ती भागीदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।


