Bihar Longest River Bridge: बिहार में गंगा नदी पर बना कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन पुल देश के सबसे लंबे नदी पुलों में एक नया रिकॉर्ड कायम करने जा रहा है। 9.76 किलोमीटर लंबे मुख्य पुल वाला यह प्रोजेक्ट पटना और वैशाली को जोड़ेगा। करीब ₹4,988 करोड़ की लागत से तैयार इस पुल से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवाजाही आसान होने के साथ-साथ मौजूदा पुलों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। बिहार के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर बड़ी खबर है। गंगा नदी पर बनाया गया कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन पुल अब निर्माण के अंतिम चरण से आगे बढ़कर तैयार हो चुका है। जुलाई 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक परियोजना का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है और इसके उद्घाटन की तैयारी की जा रही है।
इस परियोजना की खासियत सिर्फ इसका छह लेन का होना नहीं है, बल्कि इसका 9.76 किलोमीटर लंबा मुख्य पुल भी इसे देश के सबसे लंबे नदी पुलों की सूची में सबसे ऊपर पहुंचाता है। पूरी परियोजना की लंबाई करीब 19.76 किलोमीटर है, जिसमें मुख्य पुल के अलावा लगभग 10 किलोमीटर के एप्रोच रोड शामिल हैं। बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड (BSRDCL) के आधिकारिक दस्तावेज में भी परियोजना की यही लंबाई और ₹4,988.4 करोड़ की लागत दर्ज है।
भारत के सबसे लंबे नदी पुलों में शामिल
अब तक लोहित नदी पर बना डॉ. भूपेन हजारिका सेतु यानी ढोला-सदिया पुल 9.15 किलोमीटर की लंबाई के साथ भारत का सबसे लंबा नदी पुल माना जाता था। कच्ची दरगाह-बिदुपुर का 9.76 किलोमीटर लंबा मुख्य पुल इससे आगे निकलता है।
हालांकि यहां एक जरूरी अंतर समझना भी जरूरी है। कच्ची दरगाह-बिदुपुर परियोजना की पूरी लंबाई 19.76 किलोमीटर है, लेकिन इसमें एप्रोच रोड भी शामिल हैं। नदी के ऊपर बने मुख्य पुल की लंबाई 9.76 किलोमीटर है।
पटना और वैशाली के बीच बनेगा सीधा कनेक्शन
यह छह लेन वाला पुल पटना जिले के कच्ची दरगाह को वैशाली जिले के बिदुपुर से जोड़ेगा। इससे उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच सड़क संपर्क और बेहतर होगा।
पुल के शुरू होने के बाद पटना की ओर आने-जाने वाले लोगों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। इसके अलावा महात्मा गांधी सेतु जैसे मौजूदा पुलों पर वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद है।
यह परियोजना खास तौर पर राघोपुर दियारा और आसपास के इलाकों की कनेक्टिविटी के लिए भी महत्वपूर्ण है। परियोजना के एक हिस्से को पहले ही यातायात के लिए खोला जा चुका था।
₹4,988 करोड़ में तैयार हुआ महासेतु
कच्ची दरगाह-बिदुपुर ब्रिज परियोजना की लागत करीब ₹4,988.4 करोड़ है। BSRDCL के आधिकारिक प्रोजेक्ट दस्तावेज के अनुसार यह 19.76 किलोमीटर लंबी छह लेन वाली ग्रीनफील्ड परियोजना है।
इस प्रोजेक्ट का निर्माण L&T और दक्षिण कोरिया की Daewoo E&C के जॉइंट वेंचर ने किया है। L&T के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक कंपनी को Daewoo E&C के साथ मिलकर इस छह लेन एक्स्ट्रा-डोज्ड केबल ब्रिज के डिजाइन और निर्माण का काम मिला था।
एक्स्ट्रा-डोज्ड केबल ब्रिज क्यों है खास?
कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल की सबसे बड़ी तकनीकी खूबियों में इसका Extra-Dosed Cable Bridge डिजाइन शामिल है। इसमें पुल के कुछ बड़े स्पैन को केबल के जरिए अतिरिक्त सपोर्ट दिया जाता है।
इस तरह का डिजाइन सामान्य बॉक्स-गर्डर पुल और केबल-स्टेयड पुल के बीच की तकनीक के तौर पर देखा जाता है। परियोजना के मुख्य हिस्से में लंबे स्पैन के साथ केबल सपोर्ट का इस्तेमाल किया गया है।
L&T ने परियोजना को देश का सबसे लंबा extra-dosed bridge बनाने की बात कही थी।
61 नंबर पियर पर लगा आखिरी सेगमेंट
पुल के निर्माण में एक बड़ा मील का पत्थर तब आया जब पियर नंबर 61 पर अंतिम सेगमेंट सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। इसके साथ ही मुख्य पुल की संरचनात्मक निर्माण प्रक्रिया पूरी होने की दिशा में महत्वपूर्ण चरण हासिल हुआ।
इसके बाद सड़क की फिनिशिंग, डामर और अन्य जरूरी तकनीकी कार्य पूरे किए गए। जून-जुलाई 2026 में अधिकारियों की ओर से परियोजना को पूरा करने और इसे आम लोगों के लिए खोलने की तैयारी की जानकारी दी गई थी।
6 लेन होने से क्या फायदा होगा?
इस पुल के शुरू होने के बाद बिहार के सड़क नेटवर्क को कई स्तरों पर फायदा मिलने की उम्मीद है।
- पटना और वैशाली के बीच सीधा और तेज संपर्क बनेगा।
- उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन आसान होगा।
- महात्मा गांधी सेतु सहित मौजूदा पुलों पर ट्रैफिक का दबाव कम हो सकता है।
- राघोपुर और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
- पटना आने-जाने वाले यात्रियों को एक अतिरिक्त महत्वपूर्ण मार्ग मिलेगा।
- क्षेत्र में व्यापार और माल ढुलाई की आवाजाही को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
100 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार का दावा
परियोजना से जुड़ी रिपोर्टों में पुल पर वाहनों के लिए करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की डिजाइन स्पीड का उल्लेख किया गया है। हालांकि वास्तविक परिचालन गति ट्रैफिक नियमों और संबंधित प्राधिकरण द्वारा तय की गई गति सीमा पर निर्भर करेगी।
बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ा कदम
कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल सिर्फ एक नदी पुल नहीं है, बल्कि यह बिहार के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर है। करीब ₹4,988 करोड़ की लागत और 19.76 किलोमीटर की पूरी परियोजना लंबाई के साथ यह राज्य की बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल है।
अब जबकि निर्माण पूरा हो चुका है, लोगों की नजर इसके औपचारिक उद्घाटन और यातायात शुरू होने पर है। इसके चालू होने के बाद पटना, वैशाली और आसपास के इलाकों में सड़क कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।


