नई दिल्ली: भारत में पाम ऑयल (Palm Oil) की मांग में सुस्ती और अन्य खाद्य तेलों की तुलना में इसकी कीमतों का फायदा कम होने से जून 2026 में पाम ऑयल आयात (India Palm Oil Imports) 14 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। दुनिया के सबसे बड़े वेजिटेबल ऑयल आयातक भारत की घटती खरीदारी ने इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे प्रमुख उत्पादक देशों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो इन देशों में पाम ऑयल का स्टॉक बढ़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है।
Highlights
- जून में भारत का पाम ऑयल आयात 14 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा।
- मई के मुकाबले पाम ऑयल आयात में 10.5% की गिरावट दर्ज की गई।
- कम मांग और घटती मूल्य छूट आयात में कमी की मुख्य वजह।
- इंडोनेशिया और मलेशिया में स्टॉक बढ़ने की आशंका।
- कुल खाद्य तेल आयात भी जून में 16.6% घटा।
जून में कितना घटा पाम ऑयल आयात?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार के पांच प्रमुख डीलरों के अनुमान बताते हैं कि जून 2026 में भारत ने करीब 4.92 लाख टन पाम ऑयल का आयात किया। यह मई के मुकाबले 10.5 फीसदी कम है और अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक है। ऐसे में उसकी खरीदारी में आई गिरावट का असर वैश्विक बाजार पर भी साफ दिखाई दे सकता है।
सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का आयात भी घटा
केवल पाम ऑयल ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख खाद्य तेलों के आयात में भी कमी दर्ज की गई।
- सोयाबीन तेल का आयात 23% घटकर 3.81 लाख टन रह गया।
- सूरजमुखी तेल का आयात 17.5% घटकर 2.44 लाख टन रहा, जो पिछले तीन महीनों का सबसे निचला स्तर है।
इससे साफ है कि जून में खाद्य तेलों की कुल मांग में कमजोरी देखने को मिली।
कुल खाद्य तेल आयात में 16.6% की गिरावट
अनुमानों के अनुसार, जून में भारत का कुल खाद्य तेल आयात 11 लाख टन रहा, जो मई की तुलना में 16.6 फीसदी कम है।
हालांकि, व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि इन आंकड़ों में नेपाल से सड़क मार्ग के जरिए आने वाले ड्यूटी-फ्री खाद्य तेल को शामिल नहीं किया गया है।
आखिर क्यों घटी पाम ऑयल की मांग?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं।
1. कीमतों में पहले जैसी छूट नहीं
पहले पाम ऑयल, सोयाबीन तेल की तुलना में काफी सस्ता पड़ता था। लेकिन हाल के महीनों में दोनों के बीच कीमत का अंतर काफी कम हो गया है।
मुंबई स्थित एक वैश्विक ट्रेडिंग कंपनी के डीलर के मुताबिक, अब सोयाबीन तेल के मुकाबले पाम ऑयल पर मिलने वाली छूट 50 डॉलर प्रति टन से भी कम रह गई है। इससे रिफाइनर बड़े ऑर्डर देने से बच रहे हैं।
2. घरेलू मांग में कमजोरी
राजकोट स्थित GGN Research के मैनेजिंग पार्टनर राजेश पटेल का कहना है कि डिस्ट्रीब्यूटर फिलहाल केवल जरूरत भर की खरीदारी कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में कीमतों में और गिरावट आ सकती है।
इसी वजह से रिफाइनर भी सीमित मात्रा में आयात कर रहे हैं।
3. गर्मी और गैस संकट का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भीषण गर्मी और कुकिंग गैस की ऊंची कीमतों ने भी खाद्य तेलों की मांग को प्रभावित किया।
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे भारत में औद्योगिक गैस सप्लाई पर असर पड़ा और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी महंगे हुए। इसका असर होटल, रेस्टोरेंट और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर की मांग पर भी पड़ा।
मलेशिया और इंडोनेशिया पर क्या होगा असर?
भारत अपने कुल पाम ऑयल आयात का बड़ा हिस्सा इंडोनेशिया और मलेशिया से खरीदता है।
यदि भारत की खरीदारी लगातार कमजोर रहती है तो इन दोनों देशों में तैयार स्टॉक बढ़ सकता है। इससे:
- निर्यातकों पर दबाव बढ़ेगा।
- मलेशियाई पाम ऑयल फ्यूचर्स में गिरावट आ सकती है।
- अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है।
- उत्पादक देशों को नए खरीदार तलाशने पड़ सकते हैं।
भारत किन देशों से कौन-सा खाद्य तेल खरीदता है?
भारत अलग-अलग देशों से अलग-अलग प्रकार के खाद्य तेल आयात करता है।
- पाम ऑयल: इंडोनेशिया और मलेशिया
- सोयाबीन तेल: अर्जेंटीना और ब्राजील
- सूरजमुखी तेल: रूस और यूक्रेन
इस विविध आयात व्यवस्था की वजह से भारत वैश्विक कीमतों के आधार पर अपनी खरीदारी में बदलाव करता रहता है।
सालभर का औसत क्या रहा?
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार, अक्टूबर 2025 में समाप्त हुए मार्केटिंग वर्ष के दौरान भारत का औसत मासिक पाम ऑयल आयात करीब 6.32 लाख टन रहा था।
इसके मुकाबले जून 2026 का 4.92 लाख टन का आयात काफी कमजोर माना जा रहा है। एसईए द्वारा जून के आधिकारिक आयात आंकड़े जुलाई के मध्य तक जारी किए जाने की उम्मीद है।
आगे क्या रह सकती है स्थिति?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि:
- पाम ऑयल की कीमतों में फिर से गिरावट आती है,
- सोयाबीन तेल के मुकाबले इसकी छूट बढ़ती है,
- और घरेलू मांग में सुधार होता है,
तो आने वाले महीनों में भारत का आयात फिर बढ़ सकता है। लेकिन फिलहाल बाजार सतर्क रुख अपनाए हुए है और रिफाइनर बड़े स्टॉक बनाने से बच रहे हैं।
निष्कर्ष
जून 2026 में भारत का पाम ऑयल आयात 14 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंचना केवल घरेलू मांग में कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि यह वैश्विक खाद्य तेल बाजार के लिए भी अहम संकेत है। भारत की घटती खरीदारी का सीधा असर इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे प्रमुख निर्यातक देशों पर पड़ सकता है। आने वाले महीनों में कीमतों, मांग और वैश्विक आपूर्ति की स्थिति तय करेगी कि पाम ऑयल बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है।


