नई दिल्ली: पेप्सिको की पूर्व चेयरपर्सन और सीईओ इंदिरा नूयी (Indra Nooyi) का भारत को लेकर दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस (Condoleezza Rice) के साथ बातचीत के दौरान नूयी ने भारत को ‘अराजक (Chaotic)’ देश बताया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अव्यवस्था भारत की कमजोरी नहीं बल्कि उसकी सबसे बड़ी पहचान और खूबसूरती है।
हूवर इंस्टीट्यूशन के एक कार्यक्रम में नूयी ने भारत और चीन की तुलना करते हुए बताया कि दोनों देशों का विकास मॉडल, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है। उनके मुताबिक भारत की विविधता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और रोजमर्रा का जीवन पहली नजर में अव्यवस्थित लग सकता है, लेकिन यही चीज लोगों को बार-बार भारत लौटने के लिए आकर्षित करती है।
भारत की अराजकता ही उसकी सबसे बड़ी खूबसूरती
बातचीत की शुरुआत उस सवाल से हुई जिसमें कोंडोलीजा राइस ने पूछा कि यदि किसी अमेरिकी छात्र या पर्यटक को चीन की बजाय भारत घूमने के लिए प्रेरित करना हो तो वह क्या कहेंगी।
इस पर इंदिरा नूयी ने कहा कि भारत का अनुभव चीन से बिल्कुल अलग है। भारत में सब कुछ एक साथ चलता हुआ दिखाई देता है और यही इसकी असली पहचान है।
उन्होंने कहा,
“भारत एक अराजक देश है। भारत की खूबसूरती इसी अराजकता में है। अगर आपने पहले भारत की यात्रा की है और आपको यह माहौल पसंद आ गया, तो आप बार-बार यहां लौटना चाहेंगे। यह किसी नशे की तरह है, जिसकी आदत पड़ जाती है।”
उनका कहना था कि भारत को समझने के लिए सिर्फ पर्यटन नहीं बल्कि उसके सामाजिक जीवन और विविधता को महसूस करना जरूरी है।
सड़कों पर कारों के साथ गाय देख लोग हो जाते हैं हैरान
इंदिरा नूयी ने भारत की सड़कों का जिक्र करते हुए कहा कि यहां पहली बार आने वाले विदेशी पर्यटक अक्सर ट्रैफिक के बीच घूमती गायों और अन्य जानवरों को देखकर हैरान रह जाते हैं।
उन्होंने कहा,
“जब आप कारों के साथ सड़कों पर गायों को चलते देखते हैं तो आपके मन में सवाल आता है कि यहां आखिर हो क्या रहा है? लेकिन भारत में लोग जानते हैं कि इस माहौल में कैसे आगे बढ़ना है।”
उन्होंने कहा कि भारतीयों के लिए यह रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है और लोग ऐसी परिस्थितियों को सहज रूप से स्वीकार कर लेते हैं।
चीन और भारत की तुलना पर क्या बोलीं नूयी?
इंदिरा नूयी ने कहा कि चीन में काफी हद तक एक जैसी संस्कृति और केंद्रीकृत व्यवस्था होने के कारण वहां यात्रा करना अपेक्षाकृत आसान लगता है।
उनके अनुसार, चीन ने तेज गति से मैन्युफैक्चरिंग हब बनने में सफलता इसलिए हासिल की क्योंकि वहां फैसले तेजी से और केंद्रीकृत तरीके से लिए जाते हैं।
वहीं भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण निर्णय लेने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रहती है, क्योंकि यहां हर व्यक्ति को अपनी राय रखने और मतदान का अधिकार है।
लोकतंत्र के कारण धीमी है भारत की रफ्तार
नूयी ने कहा कि भारत का विकास चीन की तुलना में धीमा जरूर दिखाई देता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी वजह लोकतंत्र है।
उन्होंने कहा,
“भारत अभी भी विश्व शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है क्योंकि यहां लोकतंत्र है। जब हर नागरिक के पास वोट देने और अपनी बात रखने का अधिकार होता है, तब फैसले लेने में समय लगता है। लेकिन मुझे खुशी है कि भारत का सिस्टम ऐसा ही है।”
उनका मानना है कि लोकतंत्र कभी-कभी विकास की गति को धीमा कर सकता है, लेकिन यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा भी करता है।
चीन के सिस्टम का किया सम्मान, लेकिन बताई बड़ी कमी
इंदिरा नूयी ने चीन की आर्थिक प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और देश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग शक्ति बनाया।
हालांकि उन्होंने कहा कि चीन का मॉडल पूरी तरह केंद्रीकृत है, जहां सरकार फैसले लेती है और संस्थागत स्वतंत्रता अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है।
उनके मुताबिक भारत में न्यायपालिका और लोकतांत्रिक संस्थाएं नागरिकों को भरोसा देती हैं कि उनके अधिकार सुरक्षित हैं।
भारत की न्यायपालिका को बताया बड़ी ताकत
नूयी ने भारत और अमेरिका की तुलना करते हुए कहा कि दोनों देशों में अदालतों और न्यायिक संस्थाओं की मौजूदगी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है।
उन्होंने कहा कि भारत के लगभग हर बड़े शहर में कोर्ट मौजूद हैं, जहां आम नागरिक अपनी बात रख सकता है।
इसके विपरीत उन्होंने कहा कि चीन में शासन व्यवस्था अलग तरीके से काम करती है, जहां अधिकांश निर्णय सरकार के स्तर पर लिए जाते हैं।
सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस
इंदिरा नूयी के बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
कुछ लोगों ने उनके बयान को भारत की वास्तविक तस्वीर बताया और कहा कि उन्होंने भारत की विविधता और जीवंत संस्कृति को सकारात्मक रूप में पेश किया है।
वहीं कुछ लोगों ने “अराजक” शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई और कहा कि भारत की चुनौतियों के साथ उसकी उपलब्धियों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
इंदिरा नूयी के बयान का मूल संदेश यह था कि भारत की पहचान उसकी विविधता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और जीवंत सामाजिक जीवन से बनती है। उन्होंने भारत की अव्यवस्था को नकारात्मक नहीं बल्कि उसकी विशिष्टता बताया। साथ ही यह भी कहा कि लोकतंत्र के कारण विकास की गति भले धीमी हो, लेकिन नागरिक अधिकारों और संस्थागत व्यवस्था के लिहाज से यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में उनके बयान को केवल “अराजक देश” वाले शब्द तक सीमित देखने के बजाय उसके व्यापक संदर्भ में समझना अधिक उचित होगा।


