नई दिल्ली: भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ी घोषणा की है। 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने भारत-जापान कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) पहल की शुरुआत का ऐलान किया। इस पहल के तहत देशभर में 1,000 बायोगैस और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर प्लांट स्थापित किए जाएंगे।
HighLights
- भारत-जापान मिलकर लगाएंगे 1,000 बायोगैस और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर प्लांट।
- गोबर-धन योजना को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी मजबूत।
- स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खेती और किसानों की आय बढ़ाने पर रहेगा फोकस।
सरकार का मानना है कि इस पहल से गोबर और कृषि अपशिष्ट जैसी जैविक सामग्री का बेहतर उपयोग होगा, स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को अतिरिक्त आय के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही यह पहल भारत की गोबर-धन (GOBARdhan) योजना को भी नई गति देगी।
गांवों की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
संयुक्त बयान जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत-जापान सीबीजी पहल देश के गांवों में स्थिरता, समृद्धि और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से भारत में एक हजार बायोगैस और जैविक खाद संयंत्र स्थापित करने में मदद मिलेगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार यह पहल केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि किसानों, डेयरी सेक्टर, सहकारी समितियों और जैविक खेती को भी बड़ा लाभ पहुंचाएगी।
क्या है India-Japan CBG Initiative?
भारत-जापान कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) पहल एक संयुक्त सहयोग कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य गाय के गोबर, कृषि अवशेष और अन्य जैविक कचरे से स्वच्छ ईंधन तैयार करना है। इस परियोजना में जापान तकनीकी सहयोग, निवेश और विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा, जबकि भारत स्थानीय संसाधनों और सहकारी मॉडल के जरिए इसे लागू करेगा।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य है—
- गोबर और कृषि अपशिष्ट से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाना।
- किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित करना।
- रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना।
- जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा देना।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना।
गोबर-धन योजना को मिलेगी नई मजबूती
भारत सरकार पहले से ही गोबर-धन योजना के माध्यम से गांवों में जैविक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा दे रही है। भारत-जापान की नई साझेदारी इस योजना को बड़े स्तर पर विस्तार देने में मदद करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 1,000 नए बायोगैस संयंत्र समय पर स्थापित हो जाते हैं, तो देश में बायोगैस उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे प्राकृतिक गैस के आयात पर भी कुछ हद तक निर्भरता कम की जा सकेगी।
जापान क्यों बना इस मिशन का साझेदार?
जापान लंबे समय से स्वच्छ ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उन्नत तकनीक विकसित करता रहा है। जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने कहा कि भारत ने सहकारी समितियों के माध्यम से गाय के गोबर से ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है और जापान इस लक्ष्य को पूरा करने में सक्रिय योगदान देगा।
उन्होंने बताया कि Japan-India Cooperative Biogas for Growth (CBG) पहल इसी उद्देश्य से शुरू की गई है, ताकि दोनों देश मिलकर स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ा सकें।
किसानों को कैसे होगा फायदा?
इस पहल से किसानों को कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है।
- गोबर और कृषि अवशेष बेचकर अतिरिक्त आय मिलेगी।
- जैविक खाद स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगी।
- रासायनिक उर्वरकों पर खर्च कम होगा।
- गांवों में रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
- डेयरी और पशुपालन से जुड़ी आय बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सहकारी समितियों को इस परियोजना से प्रभावी रूप से जोड़ा जाता है, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है।
ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है। सरकार 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। ऐसे में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्राकृतिक गैस का एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रही है।
सीबीजी का उपयोग परिवहन, उद्योगों और घरेलू ऊर्जा जरूरतों में किया जा सकता है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
पीएम मोदी ने किया सनाए तकाइची का स्वागत
शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि तकाइची जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ एक दूरदर्शी और लोकप्रिय नेता हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि जापान का नारा प्रांत भारत और जापान की साझा बौद्ध विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, जिससे दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होते हैं।
भारत दौरे पर क्यों हैं जापान की प्रधानमंत्री?
सनाए तकाइची 1 से 3 जुलाई तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने ऊर्जा, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, हरित विकास और क्षेत्रीय सहयोग समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय के अनुसार इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करना है। यह प्रधानमंत्री तकाइची की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है और अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता का अगला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
भारत-जापान संबंधों को मिलेगी नई दिशा
हाल के वर्षों में भारत और जापान के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश बुनियादी ढांचा, हाई-स्पीड रेल, रक्षा, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
भारत-जापान CBG Initiative इस साझेदारी में एक नया अध्याय जोड़ता है, जिसका सीधा लाभ ग्रामीण भारत, किसानों और हरित ऊर्जा क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। यदि योजना निर्धारित समय में लागू होती है, तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।


