Asian Market Today: सोमवार, 17 अगस्त 2026 को एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जापान की दूसरी तिमाही की GDP ग्रोथ उम्मीद से कमजोर रहने से बाजार की धारणा पर असर पड़ा। वहीं, हांगकांग के बाजार में तेजी रही, जबकि दक्षिण कोरिया का बाजार छुट्टी के कारण बंद रहा। निवेशकों की नजर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को लेकर चल रही गतिविधियों और अमेरिका-ईरान तनाव पर भी बनी हुई है।
हाइलाइट्स
- एशियाई बाजारों में सोमवार को मिला-जुला कारोबार रहा।
- हैंग सेंग फ्यूचर्स में करीब 0.6% की तेजी देखी गई।
- निक्केई इंट्राडे में 0.13% ऊपर रहा, जबकि टॉपिक्स 0.45% नीचे आया।
- जापान की दूसरी तिमाही GDP ग्रोथ 1.1% रही, जो 2% के अनुमान से कम है।
- ब्रेंट क्रूड 89 डॉलर प्रति बैरल से नीचे स्थिर रहा।
- कमजोर अमेरिकी डॉलर के बीच सोने की कीमतों में शुरुआती कारोबार में मामूली तेजी रही।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
सोमवार को एशियाई शेयर बाजारों में निवेशकों का रुख सतर्क नजर आया। हांगकांग के बाजार में अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला और हैंग सेंग फ्यूचर्स करीब 0.6% ऊपर रहे।
जापान में बाजार के प्रमुख सूचकांकों में अलग-अलग रुझान देखने को मिले। इंट्राडे कारोबार में निक्केई करीब 0.13% ऊपर रहा, जबकि व्यापक टॉपिक्स इंडेक्स में लगभग 0.45% की गिरावट दर्ज की गई।
दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार ‘लिबरेशन डे’ की छुट्टी के कारण बंद रहा। बाजार में निवेशकों की नजर जापान के आर्थिक आंकड़ों के साथ-साथ मिडिल ईस्ट में जारी घटनाक्रम पर भी बनी हुई है।
जापान की GDP ग्रोथ अनुमान से कम
जापान की अर्थव्यवस्था अप्रैल-जून तिमाही में सालाना आधार पर 1.1% की दर से बढ़ी। यह अर्थशास्त्रियों के करीब 2% के अनुमान से कम है। इससे जापानी अर्थव्यवस्था में घरेलू मांग की कमजोरी को लेकर चिंता बढ़ी है।
इससे पिछली तिमाही की 2.1% सालाना ग्रोथ की तुलना में आर्थिक विस्तार की रफ्तार भी धीमी हुई है। हालांकि, साल-दर-साल आधार पर जापान की GDP में दूसरी तिमाही में 0.7% की वृद्धि हुई, जबकि पहली तिमाही में यह आंकड़ा 0.5% था।
कमजोर GDP आंकड़ों का असर जापानी शेयर बाजार की धारणा पर पड़ा है। निवेशक अब यह आकलन कर रहे हैं कि कमजोर घरेलू मांग और बाहरी परिस्थितियां जापान की आर्थिक रिकवरी को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं।
वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स में मामूली तेजी
अमेरिकी बाजार में रविवार शाम को स्टॉक फ्यूचर्स में ज्यादा हलचल नहीं रही। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स में करीब 11 अंक या 0.02% की मामूली तेजी देखी गई।
वहीं, S&P 500 फ्यूचर्स में लगभग 0.1% और नैस्डैक 100 फ्यूचर्स में करीब 0.2% की बढ़त रही।
हालांकि शुक्रवार के कारोबार में अमेरिकी शेयर बाजार में कमजोरी रही थी, लेकिन S&P 500 ने इससे पहले लगातार तीन सप्ताह बढ़त दर्ज की थी। मजबूत कॉरपोरेट अर्निंग्स ने अमेरिकी शेयर बाजार को सपोर्ट दिया है। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी भी बाजार के लिए अहम कारक बनी हुई है।
हालांकि, मिडिल ईस्ट तनाव और AI आधारित शेयरों में तेजी के टिकाऊपन को लेकर निवेशकों की चिंता बनी हुई है।
क्रूड ऑयल की कीमतों पर भी नजर
मिडिल ईस्ट में जारी घटनाक्रम का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। लेबनान में फिर से झड़पों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से जुड़े घटनाक्रम के बीच अमेरिका-ईरान तनाव को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
पिछले सप्ताह करीब 6% की तेजी के बाद ब्रेंट क्रूड 89 डॉलर प्रति बैरल से नीचे स्थिर रहा। वहीं, WTI क्रूड करीब 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया।
तेल बाजार के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए प्रमुख समुद्री मार्गों में शामिल है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का व्यवधान कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव पर बाजार की नजर
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव भी वैश्विक बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बना हुआ है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के संकेत दिए गए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की ओर से भी इसी सप्ताह अतिरिक्त प्रतिबंधों की घोषणा की संभावना जताई गई है।
दूसरी ओर, ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के प्रबंधन को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों पर भी बाजार की नजर है। हालांकि, किसी संभावित समझौते और उसके वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि मिडिल ईस्ट में तनाव आगे किस दिशा में जाता है। यदि ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान बढ़ता है, तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर संबंधी नीतियों पर पड़ सकता है।
आज सोने की कीमत में मामूली तेजी
एशियाई बाजार में सोमवार के शुरुआती कारोबार के दौरान सोने की कीमतों में मामूली तेजी देखी गई। कमजोर अमेरिकी डॉलर और हालिया आर्थिक आंकड़ों के बाद अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव से सोने को सपोर्ट मिला।
स्पॉट गोल्ड करीब 0.3% बढ़कर 4,388.62 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 0.2% की तेजी रही और यह 4,444.30 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया।
सोने की कीमतों के लिए आगे अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा, डॉलर की चाल और मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख फैक्टर रहेंगे।
भारतीय शेयर बाजार के लिए क्या मायने?
एशियाई बाजारों का मिला-जुला रुख भारतीय शेयर बाजार के लिए भी शुरुआती संकेत दे सकता है। खासकर जापान के कमजोर GDP आंकड़े वैश्विक आर्थिक विकास को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा सकते हैं।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट तनाव पर भी भारतीय बाजार की नजर रहेगी। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।
निवेशकों को सोमवार के कारोबार में ग्लोबल संकेतों के साथ-साथ डॉलर, क्रूड ऑयल, सोने और विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी नजर रखनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए बाजार संबंधी विचार और जानकारी केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है।


