Vande Mataram Row: ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। BJP नेताओं ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कर्नाटक के मंगलुरु स्थित उर्वा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप लगाया गया है कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर कथित तौर पर अनुचित व्यवहार किया गया।
हालांकि, पुलिस ने अभी इस मामले में FIR दर्ज नहीं की है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, FIR दर्ज करने से पहले मामले में कानूनी राय ली जा रही है। वहीं, कांग्रेस ने BJP के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सोनिया गांधी ने ‘वंदे मातरम’ के गायन को रोकने की कोई कोशिश नहीं की थी।
मंगलुरु में सोनिया गांधी के खिलाफ शिकायत
BJP नेताओं विकास के. और राजगोपाल ने रविवार, 16 अगस्त को मंगलुरु के उर्वा थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में सोनिया गांधी पर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के प्रति कथित अनुचित आचरण का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।
BJP नेताओं का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर ‘वंदे मातरम’ को लेकर हुई कथित घटना से देशवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं। पुलिस ने शिकायत प्राप्त करने के बाद मामले में कानूनी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल FIR दर्ज नहीं की गई है। मामले में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की संभावना पर राय ली जा रही है।
‘वंदे मातरम’ को लेकर क्या है पूरा विवाद?
BJP ने शनिवार को आरोप लगाया था कि कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सोनिया गांधी ने ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण के गायन पर आपत्ति जताई थी। इस आरोप के बाद कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।
कांग्रेस ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण के गायन को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया था।
कांग्रेस के मुताबिक, सोनिया गांधी केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं, क्योंकि खड़गे काफी समय से खड़े थे। पार्टी ने कहा कि इस सामान्य घटनाक्रम को गलत तरीके से राष्ट्रगीत के अपमान से जोड़कर पेश किया जा रहा है।
राष्ट्रगीत के अपमान पर कानून का भी हुआ जिक्र
इस विवाद के बीच राष्ट्रगीत के अपमान से जुड़े नए कानूनी प्रावधान भी चर्चा में हैं। संसद ने पिछले महीने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी थी।
यह विधेयक 29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा में पारित हुआ था। इसके तहत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा दिए जाने की बात कही गई है। इसी वजह से BJP नेताओं ने शिकायत में कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, सोनिया गांधी के खिलाफ शिकायत में FIR या आगे की कार्रवाई होगी या नहीं, यह पुलिस की कानूनी समीक्षा और जांच पर निर्भर करेगा।
ओडिशा में भी सोनिया, खड़गे और राहुल के खिलाफ शिकायत
वंदे मातरम विवाद अब कर्नाटक तक सीमित नहीं है। BJP युवा मोर्चा की ओडिशा इकाई ने भी कांग्रेस नेताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
BJYM की ओडिशा इकाई ने रविवार को भुवनेश्वर के खारवेल नगर थाने में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दी। पार्टी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम’ के कथित अपमान और गायन में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
BJYM के प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पांडा ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका आरोप है कि राष्ट्रगीत के गायन में कथित तौर पर बाधा डालकर दंडनीय अपराध किया गया है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने यहां भी BJP के आरोपों को खारिज किया है। कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रगीत को रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी और सोनिया गांधी केवल मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने को कह रही थीं।
BJP ने भुवनेश्वर में निकाला मौन जुलूस
मामले को लेकर BJP की भुवनेश्वर जिला इकाई के कार्यकर्ताओं ने भी विरोध जताया। BJP कार्यकर्ताओं ने राज्य पार्टी कार्यालय से मास्टर कैंटीन चौक स्थित कांग्रेस भवन तक मौन जुलूस निकाला।
पार्टी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं के कथित व्यवहार से देशभर के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। BJP इस पूरे मामले को राष्ट्रगीत के सम्मान और राष्ट्रीय भावनाओं से जोड़कर कांग्रेस पर राजनीतिक हमला कर रही है।
बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी से मांगी माफी
विवाद के बीच ‘वंदे मातरम’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज और BJP नेता सुमित्रो चटर्जी ने भी सोनिया गांधी से माफी मांगने की मांग की है।
सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के गायन से जुड़ी कथित घटना पर बिना शर्त माफी मांगने को कहा है।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में गीत का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर कथित तौर पर असहजता दिखाई गई और इसे रोकने के प्रयास किए गए। चटर्जी ने इस घटना को देश के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और ‘वंदे मातरम’ की विरासत से जोड़ते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।
स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम’ की अहम भूमिका
सुमित्रो चटर्जी ने अपने पत्र में ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह गीत किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और देश की सामूहिक स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने 1896 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति का उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न चरणों में इस गीत के इस्तेमाल की घटनाओं को भी सामने रखा।
चटर्जी ने 1905 के कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी द्वारा इसके गायन और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों तथा राष्ट्रवादी छात्रों के बीच इसकी लोकप्रियता का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसका सम्मान करना स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और उसमें दिए गए बलिदानों का सम्मान करने के समान है।
राजनीतिक विवाद और बढ़ने के आसार
‘वंदे मातरम’ को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप अब पुलिस शिकायतों तक पहुंच गया है। एक तरफ BJP इसे राष्ट्रगीत के अपमान और राष्ट्रीय भावनाओं से जोड़कर कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं कांग्रेस पूरे आरोप को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज कर रही है।
फिलहाल मंगलुरु पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की है और मामले में कानूनी राय ली जा रही है। आने वाले दिनों में पुलिस का फैसला और दोनों दलों की ओर से सामने आने वाली प्रतिक्रियाएं इस विवाद को और तूल दे सकती हैं।


