Israel-Lebanon Conflict: पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। इजरायल की ओर से लेबनान में नए हमलों और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध के बीच कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। सोमवार, 17 अगस्त 2026 को ब्रेंट क्रूड करीब 88.5 डॉलर प्रति बैरल, जबकि WTI क्रूड करीब 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। पिछले सप्ताह दोनों प्रमुख बेंचमार्क में 5% से अधिक की तेजी आई थी।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर केवल क्रूड ऑयल तक सीमित नहीं है। निवेशकों की नजर सोने-चांदी, भारतीय शेयर बाजार, रुपये और महंगाई पर भी है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में जहाजों की आवाजाही धीमी होने से तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है।
क्रूड ऑयल की कीमतों में क्यों हो रहा उतार-चढ़ाव?
कच्चे तेल की कीमतों में सबसे बड़ा कारण भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई बाधित होने का खतरा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मूज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। हाल के दिनों में यहां टैंकरों की आवाजाही काफी कम हुई है। रॉयटर्स के मुताबिक 16 अगस्त को स्ट्रेट से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या बेहद कम रही, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यहां काफी अधिक ट्रैफिक रहता है।
हालांकि, तेल की कीमतों में अभी बहुत बड़ी तेजी इसलिए नहीं दिख रही है क्योंकि वैश्विक बाजार में अन्य स्रोतों से सप्लाई जारी है और कमजोर मांग भी कीमतों पर दबाव बना रही है। यही वजह है कि मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बावजूद क्रूड अभी 90 डॉलर के आसपास ही बना हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पर बाजार की नजर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए चल रही बातचीत में फिलहाल कोई बड़ा ब्रेकथ्रू नहीं हुआ है। ईरान की ओर से भी बातचीत दोबारा शुरू करने को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इस स्थिति ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
अमेरिका की ओर से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिशों और स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में शिपिंग गतिविधियों में गिरावट के कारण बाजार में रिस्क प्रीमियम बना हुआ है।
ईरान-ओमान की बातचीत क्यों अहम?
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज के संचालन और सुरक्षित समुद्री आवाजाही को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बाजार के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस रणनीतिक मार्ग से तेल और गैस की सप्लाई कितनी तेजी से सामान्य होती है।
अगर होर्मूज में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है, तो वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई को लेकर दबाव बढ़ सकता है। इसके विपरीत तनाव कम होने और शिपिंग सामान्य होने पर क्रूड की कीमतों में राहत देखने को मिल सकती है।
भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर होगा?
मिडिल ईस्ट का बढ़ता तनाव भारतीय शेयर बाजार के लिए भी जोखिम बढ़ा सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत जैसी बड़ी तेल आयातक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है।
तेल महंगा होने पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एयरलाइंस, पेंट कंपनियों, केमिकल कंपनियों और कई अन्य आयात-निर्भर सेक्टरों की लागत बढ़ सकती है। वहीं, तेल और गैस से जुड़े कुछ उत्पादकों को ऊंची कीमतों का फायदा मिल सकता है।
इसके अलावा, भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने पर विदेशी निवेशक जोखिम वाले बाजारों में अपनी पोजीशन कम कर सकते हैं। इससे भारतीय इक्विटी बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
सोना-चांदी में भी बढ़ सकती है मांग
जब दुनिया में युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो निवेशक अक्सर सुरक्षित माने जाने वाले एसेट्स की ओर रुख करते हैं। यही कारण है कि मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति में सोने और चांदी की कीमतों पर भी नजर बनी हुई है।
अगर अमेरिका-ईरान तनाव और इजरायल-लेबनान संघर्ष आगे बढ़ता है, तो सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ सकती है। इससे सोने की कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने का सीधा असर देश के इंपोर्ट बिल, चालू खाते और महंगाई पर पड़ सकता है।
हालांकि, घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय क्रूड के हर उतार-चढ़ाव के साथ तुरंत नहीं बदलतीं। सोमवार को भी देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो आगे चलकर इसका असर परिवहन लागत और कंपनियों की इनपुट कॉस्ट पर पड़ सकता है। इससे महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।
आगे क्रूड ऑयल की दिशा क्या रहेगी?
फिलहाल क्रूड ऑयल की दिशा मुख्य रूप से तीन चीजों पर निर्भर करेगी—अमेरिका-ईरान बातचीत, स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में शिपिंग गतिविधियां और इजरायल-लेबनान समेत पूरे मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव।
अगर तनाव बढ़ता है और तेल की सप्लाई प्रभावित होती है तो ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के ऊपर जा सकता है। वहीं, अगर बातचीत आगे बढ़ती है और होर्मूज में शिपिंग सामान्य होती है तो कीमतों पर दबाव आ सकता है।
इसलिए आने वाले दिनों में निवेशकों के लिए केवल क्रूड की कीमत ही नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट से जुड़ी हर बड़ी खबर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।


