भारत के संगठित डेयरी सेक्टर (Organized Dairy Sector) के लिए चालू वित्त वर्ष अच्छी खबर लेकर आया है। क्रिसिल रेटिंग्स (CRISIL Ratings) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में संगठित डेयरी उद्योग का राजस्व 13-15% तक बढ़ सकता है। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह दूध और पारंपरिक डेयरी उत्पादों की मजबूत मांग, प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती बिक्री और कंपनियों द्वारा चरणबद्ध तरीके से की गई कीमतों में बढ़ोतरी है।
हालांकि, इस सकारात्मक तस्वीर के साथ उपभोक्ताओं के लिए एक चिंता भी जुड़ी हुई है। अल नीनो, भीषण गर्मी और चारे की बढ़ती लागत के कारण कच्चे दूध का उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे आने वाले महीनों में दूध और डेयरी उत्पादों की कीमतों में 5-6% तक बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है।
Highlights
- संगठित डेयरी सेक्टर का राजस्व 13-15% बढ़ने का अनुमान।
- दूध, घी और मक्खन की मजबूत मांग से मिलेगी रफ्तार।
- अल नीनो और महंगे चारे से दूध उत्पादन प्रभावित।
- दूध और डेयरी उत्पादों की कीमतों में 5-6% तक बढ़ोतरी संभव।
- कंपनियों की ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी बनी रहने की उम्मीद।
13-15% तक बढ़ सकता है डेयरी सेक्टर का राजस्व
क्रिसिल रेटिंग्स द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस वित्त वर्ष में संगठित डेयरी क्षेत्र का राजस्व 13-15% तक बढ़ने का अनुमान है। यह पहले लगाए गए लगभग 11% के अनुमान से अधिक है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस वृद्धि के पीछे दो प्रमुख कारण हैं—
- डेयरी उत्पादों की मांग में लगातार बढ़ोतरी।
- कंपनियों द्वारा चरणबद्ध तरीके से कीमतों में वृद्धि।
इसके अलावा, दूध, दही, मक्खन, घी और अन्य पारंपरिक डेयरी उत्पादों की नॉन-डिस्क्रेशनरी (आवश्यक) प्रकृति के कारण इनकी मांग लगातार बनी हुई है। उपभोक्ताओं का प्रीमियम डेयरी उत्पादों की ओर बढ़ता रुझान भी उद्योग की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
दूध उत्पादन क्यों हुआ प्रभावित?
क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर शौनक चक्रवर्ती के अनुसार, अल नीनो के कारण लंबे समय तक भीषण गर्मी और सामान्य से कमजोर मानसून ने पशुओं के दूध उत्पादन को प्रभावित किया।
इसके साथ ही—
- पशु चारे की कीमतों में वृद्धि,
- उत्पादन लागत में बढ़ोतरी,
- कच्चे दूध की सीमित उपलब्धता,
जैसे कारणों से दूध उत्पादन की वृद्धि दर घट गई।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2020 से 2025 के दौरान कच्चे दूध उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि दर लगभग 5% थी, जबकि अब यह घटकर करीब 4% रह गई है।
क्या फिर महंगा होगा दूध?
रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे दूध की खरीद लागत बढ़ने से डेयरी कंपनियों का खर्च भी बढ़ा है। हालांकि कंपनियां अपनी ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने के लिए इस अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं।
इसी वजह से वित्त वर्ष के दौरान—
- दूध,
- दही,
- मक्खन,
- घी,
- पनीर,
- अन्य डेयरी उत्पादों
की औसत खुदरा कीमतों में 5-6% तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
हालांकि यह वृद्धि एक साथ नहीं होगी, बल्कि कंपनियां इसे फेज़वाइज (चरणबद्ध तरीके से) लागू कर सकती हैं।
बढ़ती लागत के बावजूद कंपनियों की कमाई रहेगी मजबूत
कच्चे दूध की लागत बढ़ने के बावजूद संगठित डेयरी कंपनियों की लाभप्रदता पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
क्रिसिल का मानना है कि—
- मजबूत मांग,
- प्रीमियम उत्पादों की बिक्री,
- समय-समय पर कीमतों में बढ़ोतरी,
के कारण कंपनियां अपनी ऑपरेटिंग मार्जिन को स्थिर बनाए रख सकेंगी।
इसके अलावा कंपनियों की मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर नकदी प्रवाह और स्थिर वर्किंग कैपिटल साइकिल उनके वित्तीय प्रदर्शन को मजबूती देती रहेगी।
कैपेक्स पर भी रहेगा फोकस
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संगठित डेयरी कंपनियां अपनी विस्तार योजनाओं को जारी रखेंगी।
अच्छी आय और मजबूत वित्तीय स्थिति के चलते कंपनियां पिछले चार वर्षों के औसत के अनुरूप पूंजीगत व्यय (Capex) जारी रख सकती हैं। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और भविष्य की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।
37 बड़ी कंपनियों के विश्लेषण से मिले संकेत
क्रिसिल रेटिंग्स ने उन 37 प्रमुख डेयरी कंपनियों का विश्लेषण किया है, जो संगठित डेयरी क्षेत्र के लगभग 60% राजस्व का प्रतिनिधित्व करती हैं।
विश्लेषण से यह निष्कर्ष सामने आया कि निकट भविष्य में सेक्टर की विकास दर मजबूत बनी रह सकती है, हालांकि कच्चे दूध की सीमित उपलब्धता और बढ़ती इनपुट लागत कीमतों पर दबाव बनाए रखेंगी।
उपभोक्ताओं और किसानों पर क्या होगा असर?
दूध की कीमतों में संभावित वृद्धि का असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर, यदि कच्चे दूध की खरीद कीमतें बढ़ती हैं तो डेयरी किसानों को बेहतर भुगतान मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
हालांकि, पशु चारे और उत्पादन लागत में लगातार वृद्धि किसानों के मुनाफे को भी प्रभावित कर सकती है। ऐसे में आने वाले महीनों में दूध की उपलब्धता, मानसून और चारे की कीमतें इस सेक्टर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
निष्कर्ष
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट बताती है कि भारत का संगठित डेयरी सेक्टर मजबूत मांग के चलते इस वित्त वर्ष में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज कर सकता है। लेकिन अल नीनो, बढ़ती इनपुट लागत और सीमित दूध उत्पादन के कारण उपभोक्ताओं को दूध और अन्य डेयरी उत्पादों के लिए पहले से अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। यदि लागत का दबाव जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में दूध की महंगाई और बढ़ सकती है।


